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चेन्नई फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में छाया उत्तराखंड, तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने शूटिंग में दिखाई रुचि

Uttarakhand Shines at Chennai Film Tourism Conclave

Uttarakhand Shines at Chennai Film Tourism Conclave

देहरादून। उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग और फिल्म टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ’ में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। कॉन्क्लेव में उत्तराखंड की फिल्म नीति, प्राकृतिक एवं विविध शूटिंग लोकेशंस और फिल्म निर्माताओं को दी जा रही सुविधाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस दौरान तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स ने उत्तराखंड में फिल्मांकन को लेकर रुचि दिखाई।

चेन्नई में मंगलवार को आयोजित कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रमुख फिल्ममेकर्स, प्रोड्यूसर्स और फिल्म कमीशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रसार भारती वेव्स ओटीटी, उत्तराखंड एफडीसी और महाराष्ट्र एफएससीडीसी समेत विभिन्न प्रदर्शकों ने भी इसमें प्रतिभाग किया। ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान सहित कई देशों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

फिल्म नीति की सुविधाओं से कराया परिचित

कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्तराखंड की फिल्म नीति और प्रदेश में उपलब्ध शूटिंग की संभावनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य में फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म नीति लागू की गई है। इसके तहत फिल्म निर्माताओं को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। नीति के तहत उत्तराखंड में फिल्माई गई हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

के.एस. चौहान के अनुसार, प्रदेश में फिल्म शूटिंग की अनुमति ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने के साथ सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सात दिनों के भीतर अनुमति प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। शूटिंग शुल्क माफ किए जाने के साथ शूटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था तथा जीएमवीएन और केएमवीएन के गेस्ट हाउसों में विशेष छूट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

200 से अधिक प्रोजेक्ट्स की शूटिंग का दावा

चौहान ने बताया कि उत्तराखंड में हर वर्ष 200 से अधिक फिल्मों, वेब सीरीज और धारावाहिकों की शूटिंग हो रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियां, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण इसे फिल्म निर्माण के लिए उपयुक्त बनाते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश और दुनिया के फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनाते हुए एक मजबूत फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोडक्शन हाउस ने दिखाई रुचि

कॉन्क्लेव के दौरान उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें भी कीं। इन बैठकों में इंडिया टॉकीज, स्टोन बीच स्टूडियो, गिरीश प्रधान, बीटीजीआई प्रोडक्शंस (यूएस), पारसा पिक्चर, लाइका प्रोडक्शंस, मसाला पिक्स, कवि क्रिएशन्स और ड्रीम वारियर पिक्चर सहित कई प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग को लेकर रुचि दिखाई।

फिल्म टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के अनुसार, चेन्नई में आयोजित कॉन्क्लेव में राज्य की भागीदारी से फिल्म निर्माताओं तक उत्तराखंड की शूटिंग लोकेशंस और फिल्म नीति की जानकारी पहुंचाने में मदद मिली है। इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण के साथ-साथ फिल्म टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राज्य की प्राकृतिक लोकेशंस पर होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज के माध्यम से उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों को देश-विदेश में व्यापक पहचान मिलने की संभावना है। सरकार की ओर से फिल्म निर्माण के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि फिल्म उद्योग के साथ स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी लाभ मिल सके।

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