दूरसंचार विभाग ने टेलीकम्युनिकेशन साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024 में बदलाव किया है. इसमें मोबाइल नंबर वैलिडेशन (Mobile Number Validation) प्लेटफार्म और रीसेल डिवाइस स्क्रबिंग जैसे फ्रेमवर्क जोड़े गए हैं. साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) का नया प्लेटफॉर्म लाया गया है. अब बैंक और अन्य सर्विस प्रोवाइडर को नंबर वेरिफिकेशन की सुविधा मिलेगी और चोरी के मोबाइल फोन की बिक्री पर रोक लगेगी. पुराने फोन बेचने वाले अब आईएमईआई नंबर की जांच करना अनिवार्य होगा. यह कदम फर्जी सिम और साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए उठाया गया है.
मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) क्या है
मोबाइल नंबर वैलिडेशन (Mobile Number Validation) एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसे संचार मंत्रालय ने साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाया गया है. इस प्लेटफॉर्म पर किसी भी व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालने पर जानकारी सीधे टेलीकॉम ऑपरेटर के पास जाती है. ऑपरेटर जांच के बाद नंबर की वैधता एमएनवी सिस्टम पर अपडेट कर देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नंबर उसी व्यक्ति के नाम पर है जो उसका इस्तेमाल कर रहा है.
सेकेंड हैंड फोन पर नए नियम
पुराने मोबाइल फोन बेचने वाले अब हर फोन का आईएमईआई नंबर जांचेंगे. यदि किसी फोन का आईएमईआई नंबर ब्लैक लिस्टेड है, तो उसकी बिक्री अवैध मानी जाएगी. यह कदम चोरी और फर्जी फोन बिक्री को रोकने के लिए लिया गया है. एमएनवी प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी अपडेट की जाती है जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से यह जांच सकता है कि उसके नाम पर कितने सिम जारी हैं.
बैंकिंग और सर्विस में MNV की जरूरत
बैंक और अन्य सर्विस प्रोवाइडर मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के जरिए यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि सर्विस का उपयोग वही व्यक्ति कर रहा है जिसके नाम पर नंबर है. इससे फर्जी तरीके से खोले गए म्युचुअल फंड या बैंक अकाउंट पर रोक लगेगी और साइबर फ्रॉड से बचाव होगा. MNV (Mobile Number Validation) सिस्टम से नंबर की वैधता तुरंत जांची जा सकेगी.
सरकार का कदम और सुरक्षा उपाय
संचार मंत्रालय ने टेलीकॉम आइडेंटिफायर यूजर एंटिटी के तहत मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य कर दिया है. इससे साइबर फ्रॉड कम होगा और यूजर अपने नाम पर जारी सभी सिम आसानी से देख सकता है. MNV प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में मोबाइल फोन और सिम की सुरक्षा मजबूत होगी.
