अक्षय नवमी का पर्व आंवले से संबंधित है. कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवला नवमी (Amla Navami) मनाई जाती है. इसे अक्षय नवमी भी कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दिन से द्वापर युग आरम्भ हुआ था. इसी दिन कृष्ण ने कंस का वध भी किया था और धर्म की स्थापना की थी. आंवले को अमरता का फल भी कहा जाता है. इस दिन आंवले का सेवन करने से सेहत का वरदान मिलता है. आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. इस दिन आंवले के वृक्ष के पास विशेष तरह की पूजा उपासना भी की जाती है. इस बार आंवला नवमी 02 नवंबर को मनाई जाएगी.
आंवला नवमी (Amla Navami) कब है
दिवाली के ठीक 10 दिन बाद मनायी जाने वाली अक्षय नवमी (Akshaya Navami 2025) का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। पुराणों में इस दिन से ही सतयुग की शुरुआत मानी जाती है। अक्षय का अर्थ होता है- जिसका क्षरण न हो। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किए गए कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है। इसे इच्छा नवमी, आंवला नवमी, कूष्मांड नवमी, आरोग्य नवमी और धातृ नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किये गये व्रत के पुण्य से सुख-शांति, सद्भाव और वंश वृद्धि का फल प्राप्त होता है। आंवला नवमी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
अक्षय नवमी – 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार
अक्षय नवमी पूर्वाह्न समय – 06:32 AM से 10:03 AM
नवमी तिथि प्रारम्भ – 30 अक्टूबर 2025 को 10:06 AM बजे
नवमी तिथि समाप्त – 31 अक्टूबर 2025 को 10:03 AM बजे
आंवला नवमी (Amla Navami) मुहूर्त
– आंवला नवमी (Amla Navami) पर पूजा का शुभ मुहूर्त 3 घंटे 31 मिनट तक है। आंवला नवमी पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 32 मिनट से प्रारंभ होगा और यह सुबह 10 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में आपको आंवला नवमी की पूजा कर लेनी चाहिए।
– आंवला नवमी के दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:49 ए एम से 05:41 ए एम तक है। उस दिन का शुभ समय या अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक है।
2 शुभ योग में आंवला नवमी (Amla Navami)
इस साल आंवला नवमी पर 2 शुभ योग बन रहे हैं। आंवला नवमी पर प्रात:काल में वृद्धि योग बनेगा, जो 1 नवंबर को 04:32 ए एम तक रहेगा। इस योग में आप जो शुभ कार्य करेंगे, उसके फल में वृद्धि होगी।
वहीं आंवला नवमी पर पूरे दिन रवि योग बनेगा। रवि योग में सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं। आंवला नवमी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 06 बजकर 51 मिनट तक है, उसके बाद से शतभिषा नक्षत्र है।
आंवला नवमी (Amla Navami) का महत्व
कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को यह पर्व मनाया जाता है. ऋग्वेद में बताया गया है कि इस दिन सतयुग आरम्भ हुआ था. इसलिए इस दिन व्रत, पूजा, तर्पण और दान का विशेष महत्व होता है. आंवला नवमी को ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन-गोकुल की गलियां छोड़कर मथुरा प्रस्थान किया था. इसी दिन से वृंदावन की परिक्रमा भी प्रारंभ होती है.
आंवला नवमी (Amla Navami) की पूजा विधि
आंवला नवमी (Amla Navami) के दिन स्नान करके पूजा करने का संकल्प लें. प्रार्थना करें कि आंवले की पूजा से आपको सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिले. इसके बाद आंवले के वृक्ष के निकट पूर्व की ओर मुख करके जल अर्पित करें. वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और कपूर से आरती करें. वृक्ष के नीचे निर्धनों को भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन करें.
आंवले के जादुई उपाय
आंवले का वृक्ष घर में लगाना वास्तु की दृष्टि से भी शुभ माना जाता है. इस दिन आंवले के पेड़ पर हल्दी का स्वस्तिक बनाएं. इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी. ऐसा कहते हैं कि आंवले के बीजों को हरे कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से आर्थिक लाभ होता है. इस पोटली को आप तिजोरी या धन के स्थान पर भी रख सकते हैं. अगर आप व्यापारी हैं तो आवले के बीजों की बंधी पोटली अपने गल्ले में रख सकते हैं.








