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कब है पौष पुत्रदा एकादशी? जानें पूजा करने का सही समय

Paush Putrada Ekadashi

Paush Putrada Ekadashi

सनातन धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा-अराधना से जीवन के सारे दुख दूर होते हैं और मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने लिए एकादशी का दिन सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दिन भगवान विष्णु को ही समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु का विशेष पूजन और व्रत किया जाता है। साल में कुल 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं।

पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, पौष पुत्रदा एकादशी कही जाती है। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान की कामना करने वाले लोगों के लिए अत्यंत ही फलदायी माना जाता है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति आती है, लेकिन इस बार लोगों के मन में इस एकादशी व्रत की तारीख को लेकर संशय है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi) का व्रत किस दिन रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं स्नान और पूजा करने का सही समय।

कब है पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi)

द्रिक पंचांग के अनुसार, पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर होगी। वहीं इस एकादशी तिथि का समापन 31 दिसंबर को प्रात:काल 05 बजे हो जाएगा। पुत्रदा एकादशी व्रत इस साल 30 और 31 दिसंबर दो दिन रखा जाएगा। गृहस्थ जीवन के लोग 30 दिसंबर को एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं वैष्णव परंपरा को मानने वाले लोग 31 दिसंबर को इसका व्रत रखेंगे।

पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi) स्नान पूजा शुभ मुहूर्त

पौष पुत्रदा एकादशी के दिन 30 दिसंबर को पूजा करने का शुभ ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 पर शुरू होगा। ये मुहूर्त 06 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में स्नान के बाद पूजा करना सबसे उत्तम होगा। वहीं इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 03 मिनट पर शुरू होगा। ये मुहूर्त 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi) पूजा विधि

– पौष पुत्रदा एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें।
– एकादशी व्रत करने का विधि-विधान से संकल्प लें।
– भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
– उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं।
– पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें।
– भगवान विष्णु को पीली मिठाई और फल का भोग अर्पित करें।
– भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।
– “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
– पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
– अंत में आरती कर पूजा पूरी करें।

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