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कब है फाल्गुन माह की अमावस्या? जानें पूजा विधि और नियम

Falguna Amavasya

Amavasya

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि बहुत विशेष और महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर माह में एक अमावस्या पड़ती है। इस हिसाब से साल भर में 12 अमावस्या पड़ती है। अमावस्या पर स्नान-दान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और फिर दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

साथ ही फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya )पर भोलेनाथ की पूजा करने से मनोवांछित फल मिलते हैं। जीवन में खुशहाली का आती है। अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित की गई है, इसलिए इस पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस दिन पितृ दोष से छुटकारा पाने के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल फाल्गुन माह की अमावस्या कब है? साथ ही जानते हैं इसकी पूजा विधि और नियम।

फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya ) कब है?

पंचाग के अनुसार, इस साल फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि 16 फरवरी 2026, सोमवार की शाम 05 बजकर 34 पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 17 फरवरी 2026, मंगलवार को शाम 05 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या इस साल 17 फरवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन अमावस्या का स्नान-दान किया जाएगा।

फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya ) पूजा विधि

फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह उठकर पवित्र नदी, सरोवर या घर पर स्नान करें। फिर तिल, गुड़, आटे के पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें।पितृ तर्पण के लिए जल में काले तिल डालकर अर्पण करें। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दान करें। भगवान शिव की पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya ) पर करें इन नियमों का पालन

फाल्गुन अमावस्या पर बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं कटवाएं। इस दिन पुराने और गंदे कपड़े नहीं पहनें। किसी के साथ वाद-विवाद नहीं करें। तामसिक चीजों का सेवन नहीं करें। दूसरे व्यक्ति का दिया हुआ अन्न नहीं खाएं।

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