भविष्य में आपका बच्चा पढ़ाई में तेज़ होगा या नही, जानिये इस प्रकार

- in फैशन/शैली, शिक्षा

नई दिल्ली: पढ़ाई के मामले में हर बच्चा अलग होता है। कोई तेज होता है, तो किसी को समझने में वक़्त लगता है।ध्यान देने वाली बात ये है कि स्कूल में कौन सा बच्चा तेज होगा और कौन औसत से कम होगा, ये बात बच्चों के जीन पर निर्भर करती है। जीन के आधार पर ये भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई बच्चा प्राइमरी स्कूल में कैसा परफॉर्म करेगा, किस विषय में उसकी दिलचस्पी ज़्यादा होगी। लेकिन, ये बात बहुत कम ही लोगों को पता है कि हमारे जीन्स की बनावट और माहौल का असर बच्चे की आगे के बर्ताव और पढ़ाई में वो कैसा रहेगा इस बात पर पड़ता है।

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जुड़वा बच्चों पर रिसर्च:

इसके लिए ब्रिटेन के छह हजार जोड़ी जुड़वां बच्चों की पढ़ाई पर रिसर्च की गई। पढ़ाई में उनके स्तर पर गहरी निगाह रखी गई। देखा गया कि जो बच्चे प्राइमरी स्कूल में अच्छा करते हैं, वो आगे की पढ़ाई में भी बेहतर होते हैं। ये रिसर्च जुड़वां बच्चों पर इसलिए की गई क्योंकि बच्चों की पढ़ाई पर जेनेटिक्स के असर को गहराई से मापा जा सक। एक जैसे दिखने वाले जुड़वां बच्चों के 100 फीसद जीन्स एक जैसे होते हैं।

वहीं, जो जुड़वां बच्चे एक जैसे नहीं दिखते, उनके औसत 50 फीसद जीन्स एक जैसे होते हैं। अब एक जैसे दिखने वाले जुड़वां बच्चे अगर पढ़ाई में एक जैसे स्तर को हासिल करते हैं, तो साफ है कि उनके जीन्स का पढ़ाई पर असर होता है और अगर उनकी पढ़ाई के स्तर में फर्क होता है, तो उसकी वजह भी बच्चों के डीएनए में फर्क हो सकती है। अगर बच्चों का स्कूल का ग्रेड प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी स्कूल तक एक जैसा ही रहता है, तो इसके पीछे बड़ी वजह बच्चों का जीन सीक्वेंस होता है।

बच्चों के पढ़ाई के स्तर में 70 फीसद योगदान उनके डीएनए सीक्वेंस पर निर्भर करता है, तो 25 फीसद उनके माहौल पर। बाकी का पांच फीसद फर्क अलग-अलग दोस्तों और टीचर के होने से होता है।अगर जुड़वां बच्चों के ग्रेड में बहुत उतार-चढ़ाव आया, तो इसकी बड़ी वजह ये रही कि उन जुड़वां बच्चों को पढ़ाई और रहन-सहन का अलग-अलग माहौल मिला।

जीन्स से जुड़ा है प्रदर्शन:

आम तौर पर बच्चों की अच्छी या बुरी ग्रेड के लिए उनकी अक़्लमंदी के स्तर को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन, सच ये है कि बच्चे स्कूल में जो ग्रेड लाते हैं, उसकी सबसे बड़ी वजह उनके जीन्स यानी डीएनए सीक्वेंस होते हैं। हाल के दिनों में पढ़ाई के जीन्स से ताल्लुक को लेकर जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडीज (GWAS) की गई हैं। इन रिसर्च से ये पता चलता है कि छात्रों के कुछ खास गुणों का ताल्लुक किस जीन से होता है। दिक़्कत ये आई कि इस स्टडी से पढ़ाई से जिन जीन्स का ताल्लुक पाया गया, उनका असर सिर्फ 0.1 फीसद था। तो, एक और रिसर्च के जरिए बच्चों के जीनोम के पढ़ाई के स्तर से संबंध को मापा गया। इसे पॉलीजेनिक स्कोर कहते हैं। इसके आधार पर आज ये बताया जा सकता है कि कोई बच्चा स्कूल में कैसा परफॉर्म करेगा।
इस पॉलीजेनिक स्कोर की मदद से उन छह हजार जुड़वां बच्चों की पढ़ाई के पूर्वानुमान लगाए गए। ये पूर्वानुमान जुड़वां लोगों के बारे में तुलनात्मक अध्ययन नहीं थे। बल्कि, इनके जरिए ये पता लगा कि दो अलग-अलग बच्चों के स्कूल में ग्रेड में कितना फर्क हो सकता है।फिर उनकी सेकेंडरी एजुकेशन का ग्रेड कैसा रहने वाला है। इस पॉलीजेनिक स्कोर से एक बात तो साफ हो गई कि एक जैसे जीन वाले बच्चों की पढ़ाई में उपलब्धि कमोबेश एक जैसी ही आती है।

इस रिसर्च का एक बड़ा फायदा ये हो सकता है, कि उन बच्चों की शुरुआत में ही मदद हो जाए, जो पढ़ाई में कमजोर रहने वाले हैं। आगे चलकर पॉलीजेनिक स्कोर और बच्चों के आस-पास के माहौल की पड़ताल कर के ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस बच्चे को पढ़ाई में मदद की जरूरत  होगी। फिर उन्हें पढ़ाई में बेहतर करने के लिए खास मदद उपलब्ध कराई जा सकती है। हम डीएनए टेस्ट की मदद से बच्चों की पैदाइश के वक़्त ही पता लगा सकते हैं कि कोई बच्चा स्कूल की पढ़ाई में कैसा रहेगा। फिर शुरुआत से ही उस पर ज़्यादा ध्यान दिया जा सकेगा। पढ़ाई में कमजोर बच्चों की शुरू से ही मदद कर के उन्हें जिंदगी में आगे चल कर कामयाब बनाया जा सकता है।

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