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लगातार तीसरे महीने चढ़ी थोक महंगाई, जनवरी में 1.81% पर पहुंची दर

Wholesale Inflation

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देश में थोक कीमतों पर महंगाई (Wholesale Inflation) का दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। जनवरी महीने में थोक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो लगातार तीसरा महीना है जब इसमें इजाफा दर्ज किया गया है। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से साफ है कि विभिन्न वस्तु समूहों में कीमतों की तेजी ने इस उछाल को गति दी है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर दिसंबर 2025 में 0.83 प्रतिशत थी, जो जनवरी में बढ़कर 1.81 प्रतिशत हो गई। हालांकि पिछले साल जनवरी में यह दर 2.51 प्रतिशत के स्तर पर थी। यानी सालाना आधार पर स्थिति कुछ नरम जरूर है, लेकिन हाल के महीनों में मासिक स्तर पर बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ाई है।

खाद्य और विनिर्मित उत्पादों ने बढ़ाया दबाव

उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जनवरी 2026 में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) बढ़ने के पीछे कई श्रेणियों में कीमतों का उछाल जिम्मेदार रहा। इनमें मूल धातुओं का विनिर्माण, अन्य विनिर्मित उत्पाद, गैर-खाद्य वस्तुएं, खाद्य सामग्री और वस्त्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लागत बढ़ने से कुल थोक महंगाई पर सीधा असर पड़ा है।

खाद्य वस्तुओं की बात करें तो जनवरी में इनकी महंगाई दर 1.55 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे पहले दिसंबर में खाद्य श्रेणी में 0.43 प्रतिशत की गिरावट आई थी। यानी एक महीने में ही खाद्य कीमतों ने रुख बदल लिया। सब्जियों की कीमतों में भी उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। जनवरी में सब्जियों की महंगाई दर 6.78 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में इसमें 3.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में भी तेजी का रुझान रहा। जनवरी में इस वर्ग की महंगाई दर बढ़कर 2.86 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर में 1.82 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि औद्योगिक क्षेत्र में लागत दबाव बना हुआ है।

गैर-खाद्य वस्तुओं में तेज उछाल

गैर-खाद्य उत्पादों की श्रेणी में महंगाई ने और भी तेज रफ्तार पकड़ी। जनवरी में इस वर्ग की थोक महंगाई दर 7.58 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि दिसंबर में यह 2.95 प्रतिशत थी। यह उछाल दर्शाता है कि कच्चे माल और अन्य गैर-खाद्य सामग्रियों की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

हालांकि ईंधन और बिजली क्षेत्र में महंगाई का दबाव कुछ कम होता नजर आया। जनवरी में इस श्रेणी की महंगाई दर 4.01 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में यह 2.31 प्रतिशत थी। इस क्षेत्र में उतार-चढ़ाव के बावजूद अन्य श्रेणियों की तेजी ने कुल थोक महंगाई को ऊपर बनाए रखा।

खुदरा महंगाई (Wholesale Inflation) और ब्याज दरों पर असर

इससे पहले जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की खुदरा महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 2.75 प्रतिशत हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति तय करते समय खुदरा मुद्रास्फीति को मुख्य आधार मानता है। महंगाई के मौजूदा रुझान को देखते हुए ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में अटकलें तेज हो गई हैं।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है, जिसके बाद यह 5.25 प्रतिशत पर आ गई है। आगे महंगाई के आंकड़े किस दिशा में जाते हैं, इसी पर भविष्य की मौद्रिक नीति निर्भर करेगी। फिलहाल थोक स्तर पर बढ़ती कीमतें संकेत दे रही हैं कि लागत का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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