चेस्ट एक्स-रे में मौजूद लक्षणों को समझकर व जानकारी निकालते हुए व्यक्ति की मौत का अनुमान लग सकता

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न्यू यॉर्क में एक ऐसे एआई टूल को डिवलप किया गया है जो चेस्ट एक्स-रे में मौजूद लक्षणों को समझकर व जानकारी निकालते हुए व्यक्ति की मौत के बारे में पूर्वानुमान लगा सकता है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मैसचूसट्स जनरल हॉस्पिटल में कार्यरत माइकल लू जो इस स्टडी के रिसर्चर्स में से एक हैं उनके मुताबिक, ‘यह हर दिन होने वाले जांच व टेस्ट के आधार पर पूर्वाभासी जानकारी निकालने का नया तरीका है’। उन्होंने आगे कहा, ‘यह ऐसी जानकारी है जो पहले से सबके सामने मौजूद है, जिसके आधार पर व्यक्ति की सेहत को सुधारा जा सकता है, लेकिन इस जानकारी का इस्तेमाल नहीं किया जाता’।

लू और उनके सहयोगियों ने इस जानकारी को निकालने के लिए एक कॉन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क यानी एक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस टूल डिवलप किया है जिसका नाम सीएक्सआर-रिस्क (CXR-risk) रखा गया है।

इसकी ट्रेनिंग के लिए करीब 42,000 पार्टिसिपेंट्स के 85,000 से भी ज्यादा एक्स-रेज का इस्तेमाल किया गया। हर इमेज को इस पॉइंट पर पेयर किया गया कि क्या टेस्ट लेने वाला व्यक्ति टेस्ट लेने के बाद के 12 साल में जिंदा बचा।

इस ट्रेनिंग का लक्ष्य यह था कि इन एक्स-रेज को स्टडी कर सीएक्सआर-रिस्क ऐसे फीचर्स और कॉम्बिनेशन का पता लगाए जो व्यक्ति की सेहत और मौत के बारे में सही अंदाजा लगा सके।

इसके बाद लू और उनके सहयोगियों ने सीएक्सआर-रिस्क का इस्तेमाल पहले दो क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा रह चुके करीब 16,000 मरीजों के चेस्ट एक्स-रेज पर किया। इसमें उन्हें पता चला कि ऐसे व्यक्ति जिनके लक्षणों को पढ़ न्यूरल नेटवर्क ने उनकी स्थिति को ‘वेरी हाई रिस्क’ बताया था उनमें से 53 प्रतिशत की मौत 12 साल में हो गई, वहीं जिन्हें सीएक्सआर-रिस्क ने ‘वेरी लो रिस्क’ का लेबल दिया था उनमें यह प्रतिशत सिर्फ चार रहा।

स्टडी में सामने आया कि सीएक्सआर-रिस्क ने वह जानकारी दी जिससे दीर्घकालिक मृत्यु के बारे में पता लगाया जा सकता है। लू का विश्वास है कि इस नए टूल को और भी ज्यादा सटीक बनाया जा सकता है अगर इसमें अन्य रिस्क फैक्टर जैसे जेनेटिक्स व स्मोकिंग स्टेटस को जोड़कर स्टडी किया जाए।

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