World Press Freedom Day : मजबूत लोकतंत्र के लिए प्रेस की आजादी जरूरी – मोदी

World Press Freedom Day:
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने World Press Freedom Day पर प्रेस की आजादी का समर्थन किया और कहा कि स्वतंत्र प्रेस एक मजबूत लोकतंत्र और समाज को ज्यादा जीवंत बनाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं उन सभी की सराहना करता हूं जो प्रेस की आजादी बनाए रखने की दिशा में अथक परिश्रम कर रहे हैं। यह उन अनगिनत महिलाओं और पुरुषों की वजह से है कि प्रेस की आजादी की अवधारणा में वृद्धि हुई है।

World Press Freedom Day: स्वतंत्र प्रेस एक मजबूत लोकतंत्र का करता है निर्माण

मोदी ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि स्वतंत्र प्रेस एक मजबूत लोकतंत्र का निर्माण करता है। आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर, चलिए हम प्रेस की आजादी का ढृढ़ता से समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। यह विचारों और मानव की अभिव्यक्ति की विविधता है जो हमें समाज के रूप में ज्यादा जीवंत बनाता है।

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मोदी ने प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति को सुरक्षित रखने के लिए सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की भूमिका की भी सराहना की। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रेस की आजादी की महत्ता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 3 मई को World Press Freedom Day घोषित किया है।

UNESCO ने ट्वीट कर लिखा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं  

World Press Freedom Day पूरी दुनिया में गुरुवार को जहां मनाया जा रहा है। तो दुनियाभर की नामचीन हस्तियां इस मौके पर पत्रकारों को बधाई दे रही हैं। वैश्विक संगठन यूनेस्को ने ट्वीट कर लिखा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। बिना सुरक्षित पत्रकारिता के सुरक्षित सूचना हो नहीं सकती। बिना सूचना के कोई आजादी नहीं होती। आज और रोजाना प्रेस की आजादी के लिए खड़े हों।

World Press Freedom Index भारत तीन पायदान फिसलकर 136वें नंबर पर आया

भारत में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। मगर हमारे देश में पत्रकारों की स्थिति पिछले कुछ सालों के दौरान बदतर हुई है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की 180 मजबूत देशों की सूची में भारत तीन पायदान फिसलकर 136वें नंबर पर आ गया है। इससे पहले भारत 133वें स्थान पर था। इस सूची में पहले नंबर पर जहां नॉर्वे है, वहीं दक्षिण कोरिया सबसे नीचे पायदान पर मौजूद है। पूरी दुनिया में इस समय 193 पत्रकार जेल में हैं।

सात सालों में 389 पत्रकारों की जान केवल भारत में गंवाई

भारत के पिछले सात सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो परिस्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साल 2012 में 74, 2013 में 73, 2014 में 61, 2015 में 73, 2016 में 48, 2017 में 46 और साल 2018 में अब तक 14 पत्रकारों ने काम के दौरान अपनी जान गंवाई है। यानी सात सालों में 389 पत्रकारों की जान केवल भारत में गई है।

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 21 देशों को काले रंग में दिखाया

दुनिया पत्रकारों के लिए नर्क वाली जगह बन चुकी है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 21 देशों को काले रंग में दिखाया गया है। जिसका मतलब है कि इन देशों में प्रेस की आजादी बहुत खराब है। वही 51 देशों को खराब स्थिति वाले वर्ग में रखा गया है। इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पत्रकारों को प्रेस फ्रीडम की बधाई देते हुए लिखा है कि आज भारतीय पत्रकारों के लिए कठिन समय है। ईमानदार और संतुलित आवाजों को झूठ से दबा दिया जाता है। यह बहुत जरूरी है कि हमारे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत बनाया जाए और इसे और निडर बनाने के लिए योगदान दिया जाए।

मुक्त और ईमानदार प्रेस लोकतंत्र के रीढ़: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पत्रकारों को सूचना का महत्वपूर्ण जरिया बताया है। उन्होंने लिखा कि  मुक्त और ईमानदार प्रेस लोकतंत्र के रीढ़ है। प्रेस हमेशा से दुनिया भर में सूचना, आलोचना और संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इसलिए प्रेस की स्वतंत्रता आवश्यक है।

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