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Yogi Cabinet: उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 में प्रोत्साहन की बौछार

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Yogi Cabinet: A shower of incentives in UP Startup Policy-2026

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के साथ उत्तर प्रदेश प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दे दी गई। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर का मजबूत, समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यह नीति प्रदेश को नवाचार और उद्यमिता का अग्रणी केंद्र बनाने के साथ-साथ वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार (स्केल-अप) तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके तहत सस्टेनेंस अलाउंस (भरण-पोषण भत्ता) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। वहीं प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।

स्टार्टअप्स को मिलेंगे कई नए वित्तीय प्रोत्साहन-

नई नीति में स्टार्टअप्स को मजबूत बनाने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 2 करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति, 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, 2 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ईपीएफ और ईएसआई की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्टार्टअप्स की शुरुआती वित्तीय चुनौतियां कम होंगी और उन्हें तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा विशेष पैकेज-

सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल सहायता तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इन्क्यूबेटर्स को मिलेगा अधिक सहयोग-

नई नीति में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इन्क्यूबेटर्स को भी अधिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इन्क्यूबेटर्स के लिए पूंजीगत अनुदान 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए यह राशि बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके अलावा परिचालन व्यय अनुदान 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष किया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डीप-टेक यू-हब की स्थापना-

प्रदेश में अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए जाएंगे। इनका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक, रोबोटिक्स सहित अन्य उभरती तकनीकों पर रहेगा। साथ ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है। सरकार राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब की स्थापना करेगी, जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, निवेश, उद्योग सहयोग, मेंटरशिप तथा अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का एकीकृत मंच उपलब्ध कराएगा।

स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा व्यापक विस्तार-

नई नीति के तहत प्रदेश में बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, ग्रैंड चैलेंज, स्टार्टअप वीक, नवाचार संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा मिल सके। सरकार का उद्देश्य स्टार्टअप संस्कृति को गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाकर अधिक से अधिक युवाओं को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ना है।

मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश स्टार्टअप में बहुत आगे है। 17 हजार स्टार्टअप यूपी में रजिस्टर्ड हैं। इनको आगे बढ़ाने और इन्क्यूबेटर्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना की जाएगी। इससे स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा।

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी-

लखनऊ। कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित होने वाला यह मिशन आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में स्टार्टअप और नवाचार गतिविधियों की नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगा। मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देना, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा इन्क्यूबेटर, नवाचार केंद्र, डीप-टेक इकोसिस्टम, मेंटरशिप और एक्सेलेरेशन कार्यक्रमों को मजबूत करना है। मिशन के तहत निवेशकों, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी संचालन, निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

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