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कैबिनेट की मंजूरी: गोरखपुर नगर निगम 80 करोड़ और मुरादाबाद नगर निगम 50 करोड़ का जारी करेंगे म्युनिसिपल बॉण्ड

Yogi Cabinet

Gorakhpur-Moradabad Municipal Yogi Cabinet: Corporation will issue municipal bonds

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक (Yogi Cabinet: Meeting) में नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।

वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। शहरी अवसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता को देखते हुए नगर निकायों में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, मार्केट ओरिएंटेशन तथा क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारत सरकार भी अपनी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले निकायों को प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है।

वित्तमंत्री ने बताया कि म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से बाजार से धन जुटाने पर भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत 100 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपये तथा 200 करोड़ रुपये तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किए जाने का प्रावधान है। म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन करेंगे।

उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के अंतर्गत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और इसे राज्य स्तरीय सुधारों में भी शामिल किया गया है। इसी क्रम में नगर निगम गोरखपुर द्वारा 80 करोड़ रुपये तथा नगर निगम मुरादाबाद द्वारा 50 करोड़ रुपये तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने के प्रस्ताव हैं। दोनों नगर निगमों ने नगर निगम सदन से अनुमोदन प्राप्त करते हुए संबंधित परियोजनाओं का चयन भी कर लिया है। इससे इन दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी तथा नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और सुदृढ़ होगी।

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