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चंबल घाटी का नाम तो सुना ही होगा, डाकुओं के सफाए के बाद अब वन्य जीवों का हो रहा शिकार

इटावा। एक जमाने में दस्यु गिरोह की पनाहगार के कारण कुख्यात चंबल घाटी तेंदुआ समेत अन्य वन्य जीवों के लिये मुफीद शरणस्थली के तौर पर जानी जाती थी लेकिन डाकुओं के सफाये के बाद रिहायशी क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने के बीच तेंदुआ समेत अन्य जीव हादसों का शिकार होकर अपनी जान गंवाते रहे हैं।

चंबल सेचुंरी के वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के तहत चकरनगर इलाके के खिरीटी गांव के समीप एक प्राथमिक स्कूल मे एक तेंदुये का शव पाया गया। प्राथमिक स्कूल के निर्माणाधीन बाथरूम मे गुरूवार को मिला शव दो से तीन दिन पुराना आंका जा रहा है। इसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है।

श्रीवास्तव कि तेंदुए की मौत की जांच कराई जायेगी,इसमें जो भी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। शव को पोस्टमार्टम के लिए बरेली भेजा गया है जहाँ से रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों को स्पष्ट किया जायेगा हालांकि अनुमान है कि स्कूल के भीतर फंस जाने से भूख के कारण तेंदुये की मौत हो गयी।

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यह पहला मौका नही है जब किसी भी तेंदुए की मौत हुई है इससे पहले भी चंबल मे एक के बाद एक करके तेंदुओ की मौते लगातार पर्यावरणविदों और इलाकाई लोगो को भी परेशान करती रही है। इसी साल दो फरवरी को इटावा जिले के भरेह थाना क्षेत्र में गढाकास्दा गांव के पास मुख्य सड़क पर तेंदुए का शव मिलने से हडकंप मच गया था ।

उस वक्त चंबल सेंचुरी के रेंजर हरीशंकर शुक्ला ने बताया था कि जिस तेंदुए का शव मिला,उसके गले में कान के पास गहरा घाव बना हुआ था । मौत के कारणो का पता लगाने के लिए तेंदुए के शव को पोस्टमार्टम के लिए बरेली स्थिति आईबीआरआई केंद्र भेजा गया जहाॅ से आई पोस्टमार्टम रिर्पोट मे ऐसा कहा गया कि किसी वाहन की टक्कर से उसकी मौत हुई।

तीन मार्च 2017 को वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम वाले दिन सहसो इलाके के विंडवा खुर्द गांव दो तेंदुए और एक साभांर की मौत किसानों केे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए 11000 बिजली लाइन से तार खींच कर खेतों की फेंसिंग की जद में आने से हो गई थी।

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मध्य प्रदेश इलाके से तेंदुओं के कई जोडे पानी की तलाश में उत्तर प्रदेश के इस इलाके में प्रवेश कर जाते हैं लेकिन उनको इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि यहां के किसान अपने फायदे के लिए खेतों में बिजली के तारों में करंट भी प्रभावित करेंगे जिससे दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों की मौत हो जाएगी ।

पर्यावरणीय संस्था सोसाइटी फाॅर कंजर्वेशन आफ नेचर के सचिव संजीव चौहान का दावा है कि चंबल के इस इलाके में इससे पहले भी काफी लंबे समय से तेंदुओं की आवाजाही की खबरें सामने आती रही है । जो रिपोर्ट सामने आ रही है उसके मुताबिक यहां कम से कम एक दर्जन ऐसे जोडे हैं जिनको गांव वालों ने देखकर वन अधिकारियों और वन्य जीव संस्था के अफसरों को रिपोर्ट किया हुआ है ।

23 सिंतबर 2017 को सहसो के ग्राम पिपरौली की गढिया मे एक तेदुआ किसानो द्वारा फसल की सुरक्षा के लिए खीचे गये तारो में फंस गया था। तारो मे फंसे हुए तेंदुए को ट्रैंक्यूलाइजर के जरिये बेहोश कर पकड़ा गया था। उसको सुरक्षित रखने के लिए लोहे के पिंजडे मे रखने के बाद इटावा सफारी पार्क लाया गया लेकिन 28 सितंबर को उसकी मौत हाइपो बेलोनिया नामकी बीमारी के चलते हो गई ।

मौत के शिकार बने मादा तेंदुआ के फेफडेे व हृदय, लीवर ने काम करना बंद कर दिया था । खेत में रस्सी से कस जाने के कारण उसके आंतरिक अंगों पर काफी प्रभाव पडा था और खून का संचालन असमान्य हो गया था । उसकी दिक्कत बढती गई और उसने दम तोड दिया।

कुछ जानकार मानते है कि चंबल मे कुख्यात डाकुओ का आंतक हुआ करता था, उस समय वन्यजीवो और जलचरो को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नही हुआ करता था लेकिन जैसे जैसे डाकुओ का सफाया हुआ वैसे वैसे वन्यजीवो और जलचरो को नुकसान शुरू हो गया है।

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