• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

कोरोना संकट के चलते कर्ज पुनर्गठन कराना हुआ मुश्किल

Desk by Desk
03/11/2020
in Categorized
0
economy

अर्थव्यवस्था

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नई दिल्ली| कोरोना संकट के चलते छह माह तक किस्त चुकाने की छूट (लोन मोरेटोरियम) के बाद छोटे और व्यक्तिगत कर्जदाताओं को कर्ज पुनर्गठन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बहुत सारे लोग इस बात की शिकायत करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं।

उनका कहना है कि वह अपनी पात्रता बैंक को समझाने में असमर्थ है जिससे उनका कर्ज पुनर्गठन नहीं हो पा रहा है। ऐसा कर्ज पुनर्गठन को लेकर सभी बैंकों के अलग-अलग नियम होने से हुआ है। बैंक अपनी मर्जी के अनुसार फैसला कर रहे हैं। वहीं, लोन मोरेटोरियम में आरबीआई द्वारा एक नियम बनाने से किसी को मसस्या नहीं हुई थी।

व्यक्तिगत कर्जदारों का कहना है कि बैंक पात्रता नियमों की अपनी व्याख्या के आधार पर ऋण पुनर्गठन के अनुरोधों को अस्वीकार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंकों में लोन पुनर्गठन ठुकराने के मामले कई गुना अधिक है।

रिजर्व बैंक ने नौ नवंबर से बाजार का बढ़ाया समय

गौरतलब है कि कोरोना संकट के कारण छह महीने के लोन मोरेटोरियम (किस्त चुकाने की छूट) के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय रूप से कमजोर कर्जदाताओं को दो साल के लिए कर्ज पुनर्गठन कराने की सुविधा दी थी। हालांकि, इसके लिए आरबीआई ने कोई तय नियम नहीं बनाया और वह बैंकों को स्वविवेक पर फैसला करने को कहा था।

बैंक के ग्राहकों को लोन पुनर्गठन की शर्तों और शुल्क की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बैंक लोन पुनर्गठनके लिए प्रोसेसिंग फीस 1000 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं बैंक बकाया लोन पर ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी कर रहे हैं।

बैंकिंग विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना संकट के बीच बैंकों द्वारा लोन पुनर्गठन के लिए प्रोसेसिंग फीस और उच्च ब्याज वसूलना बिल्कुल गलत है। बैंक इस आपदा में कमाई के अवसर तलाश रहे हैं। इससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति खराब होगी। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को इस मामले में फौरन हस्तक्षेप करना चाहिए और आम लोगों को दी जानी चाहिए।

Tags: corona crisiseconomyLoan MoratoriumModi governmentproduction of companiesRBIअर्थव्यवस्थाआरबीआईकंपनियों का उत्पादनकोरोना संकटमोदी सरकारलोन मोरेटोरियम
Previous Post

प्लेऑफ में जगह पक्की करने के लिए मुंबई से भिड़ेगा हैदराबाद

Next Post

RCB के खिलाफ दिल्ली कैपिटल्स की बैटिंग पर KKR के फैन्स ने उठाए सवाल

Desk

Desk

Related Posts

forehead
Categorized

माथे के कालेपन को ये नुस्खे कर देंगे गायब

28/06/2026
Vishnu Paudel
Categorized

नेपाल के पूर्व वित्त मंत्री विष्णु पौडेल अदालत में पेश, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बढ़ सकती है रिमांड

23/06/2026
CM Yogi
Categorized

दिल्ली अग्निकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया गहरा शोक

03/06/2026
Sawan
Categorized

कब शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना? जानिए सावन सोमवार और पूजा का महत्व

02/06/2026
Peanut
Categorized

मूंगफली से बनाएं ये टेस्टी डिश, कभी भी उठाए इसका लुत्फ

21/05/2026
Next Post
delhi capitals vs. bangalore

RCB के खिलाफ दिल्ली कैपिटल्स की बैटिंग पर KKR के फैन्स ने उठाए सवाल

यह भी पढ़ें

अमौसी एयरपोर्ट पर पकड़ा गया 24 लाख का सोना, यात्री गिरफ्तार

04/04/2022
kisan clashes with police

नई दिल्ली : ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों और पुलिस में झड़प, चली लाठियां

26/01/2021

कपिल सिब्बल ने पार्टी पर उठाया सवाल, जल्द बुलाई जाए CWC की बैठक

29/09/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version