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चार सौ साल बाद हिंदू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना हुई : सीएम योगी

Writer D by Writer D
13/12/2021
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, वाराणसी
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इतिहास का निर्माण करने वाले ही इतिहास पुरुष होते हैं। ऐसे इतिहास पुरुष सदियों में जन्म लेते हैं। काशी इन दिनों इतिहास के ऐसे ही एक अभूतपूर्व सृजन की साक्षी है। जो एक हजार साल के इतिहास में नहीं हो पाया था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दिखाया। उन्होंने चार सौ साल से मुक्ति की प्रतीक्षा में टकटकी लगाए हुए हिंदू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना की है। काशी विश्वनाथ धाम इसी दृढ़ संकल्प शक्ति की मिसाल है। मुग़ल शासकों की क्रूरता और विध्वंस के शिकार बाबा विश्वनाथ का वैभव काशी विश्वनाथ धाम के रूप में लौटा है।

आक्रांताओं के अन्याय का प्रतिकार

एक हजार साल से काशी विश्वनाथ मंदिर विदेशी आक्रांताओं की क्रूरता और विध्वंस का साक्षी रहा है। आज उस अन्याय का प्रतिकार हुआ है। यह समय का एक बड़ा चक्र है। किसने सोचा था कि चार सौ साल पहले जो काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर औरंगजेब की क्रूरता का शिकार होकर छिन्न-भिन्न हो गया था, ढाई सौ साल पहले इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस मंदिर के पुनरुद्धार के महान संकल्प की नींव रखी थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी नींव पर लाखों करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का स्वर्ण महल खड़ा कर को देंगे। कहते हैं कि महानता एक विचार है। एक विचार ही इतिहास की सृष्टि करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने काशी के कोतवाल काल भैरव के दरबार में लगाई हाजिरी

आज जिस भव्य काशी विश्वनाथ धाम की सृष्टि हुई है, वह प्रधानमंत्री मोदी के मस्तिष्क में पनपा ऐसा ही एक विचार था, जिसने इतिहास का कायापलट कर दिया। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर का पुरातन वैभव इस आधुनिक नव निर्माण के आलोक में और भी प्रकाशमान व गौरवशाली हो उठा है। महात्मा गांधी के जन्म के 150 साल के मौके पर उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने काशी विश्वनाथ धाम योजना का स्वप्न देखा। मंदिर के आसपास के शिवालयों और मंदिरों का जीर्णोद्धार, बाबा विश्वनाथ को गंगा से जोड़ने और दुनिया के इस प्राचीनतम शहर के आनंद कानन स्वरूप को पुन: स्थापित करने का संकल्प लिया। यही संकल्प आज अपनी पूरी दिव्यता और भव्यता के साथ पूरा हो रहा है।

पांच लाख वर्ग फीट का हो गया दायरा

काशी विश्वनाथ धाम के ज़रिए इस महान तीर्थ को उसकी ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक आभा के साथ मोक्षदायिनी गंगा से जोड़ने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। ये मोदी जी की ही दृष्टि है कि काशी विश्वनाथ मंदिर का जो परिसर 5 हजार वर्ग फुट में भी नहीं था, अब उसका दायरा काशी विश्वनाथ विस्तारीकरण और सुंदरीकरण परियोजना के तहत बढ़कर 5 लाख 27 हजार 730 वर्ग फुट हो गया है। बाबा विश्वनाथ धाम के इस अद्भुत नवनिर्माण में उन मंदिरों की मणिमाला की जगमग भी शामिल है जो निजी भवनों के भीतर से निकले हैं। इनकी न सिर्फ पुनर्स्थापना की गई है बल्कि इनके इतिहास और महत्व को भक्तों तक पहुंचाने के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर भी तैयार किया गया है।

चुनौतियों का पहाड़

काशी विश्वनाथ के मुक्ति अभियान में चुनौतियों का पहाड़ था। बाबा का मंदिर दमघोंटू माहौल में था। मंदिर के आस-पास के भवनों एवं सम्पत्तियों के मालिकों की पहचान कर उन्हें इस महायज्ञ में सहभागी बनने के लिए तैयार करना था। साथ ही तय समय सीमा में धाम का निर्माण एक बड़ी चुनौती थी। महान तीर्थ आर्किटेक्टों ने जो सर्वे किया उसमें वांछित भू-भाग की आभा के लिए मंदिर के आस-पास की तीन सौ से संपत्तियों की जरूरत थी । 320 मकान बाजार भाव से ज्यादा मूल्य पर खरीदे क्योंकि काशी विश्वनाथ धाम का उद्देश्य भौगोलिक क्षेत्र में विशिष्टताओं को समेकित करते हुए वास्तुशिल्प को साकार रूप देना था। इसी दृष्टि से पौराणिक, धार्मिक, अध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य संबंधी सौन्दर्य बोध विकसित कर इस अद्भुत योजना के भीतर आने वाले प्राचीन मंदिरों का जगमग जीणोद्धार कराया गया।

सात विशेष पत्थरों का इस्तेमाल

धाम में मकराना, चुनार के लाल बलुआ पत्थर सहित सात विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इस परिसर के भीतर प्रमुख आकर्षणों में 2100 वर्ग फुट में स्थित मुख्य मंदिर परिसर 29,000 वर्ग फुट का विस्तारीकरण एवं उसके साथ-साथ भोगशाला, यात्री सम्पत्तियों के सुविधा केन्द्र, आध्यात्मिक पुस्तकालय, मुमुक्षु भवन, महायज्ञ में वैदिक केंद्र, मल्टीपरपज हॉल, सिटी म्यूजियम, वाराणसी गैलरी भी अपनी पूरी भव्यता के साथ है।

शिव धाम में वाराणसी का समग्र इतिहास

पीएम नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रॉजेक्ट के पीछे की सोच अभूतपूर्व है। इसे देखने आने वाले श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ के साथ-साथ शिव की नगरी वाराणसी का समग्र इतिहास भी जानने को मिलेगा। इस महत उद्देश्य की खातिर धाम की दीवारों पर उपनिषद, वेद-पुराण में वर्णित जानकारियां, चित्र, श्लोक आदि का हिंदी में अनुवाद कर दीवारों पर अंकित कराने का महाअभियान चलाया जा रहा है। शिव के त्रिशूल पर टिकी इस नगरी के इतिहास को जानना, ज्ञान के अमृतपान सरीखा है। ये परिकल्पना भी पीएम की दृष्टि से अछूती नही रही। काशी में ही वेद व्यास ने चारों वेदों का सबसे पहले उपदेश दिया था। काशी में 56 विनायक हैं।

काशी में मोक्ष प्रदान करने वाली सातों नगरी हैं। द्वादश आदित्य काशी में विराजमान हैं। काशी में पांचों तीर्थ हैं। इन सब का विवरण यहां सुलभ होगा। काशी विश्वनाथ धाम के पीछे प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का एक बीज है, जो अब आस्था के वटवृक्ष में तब्दील हो चुका है।

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