• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

जलवायु परिवर्तन उत्तर प्रदेश के अक्षय ऊर्जा क्षमता को कर सकता है प्रभावित: एक अध्ययन

Writer D by Writer D
18/08/2022
in शिक्षा
0
Climate Change

Climate Change

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

लखनऊ। पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के शोधकर्ताओं का नवीनतम अध्ययन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के मामले के साथ-साथ हमारे दैनिक जीवन के कई अन्य क्षेत्रों और पहलुओं के समक्ष एक दिलचस्प सवाल प्रस्तुत करता है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change)  अगले पांच दशकों में भारत की सौर और पवन ऊर्जा क्षमता को नियत रूप से प्रभावित करेगा।

यह नवीनतम अध्ययन हाल ही में पीयर-रिव्यू जर्नल करंट साइंस में प्रकाशित हुआ है जिसका शीर्षक है, ‘जलवायु मॉडल के जरिए भारत में भविष्य के पवन और सौर क्षमता का विश्लेषण’। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान आईआईटीएम, पुणे और सेंटर फॉर प्रोटोटाइप क्लाइमेट मॉडलिंग, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात के शोधकर्ता टीएस अनंध, दीपा गोपालकृष्णन और पार्थसारथी मुखोपाध्याय इस शोध अध्ययन के लेखक हैं।

मुखोपाध्याय ने कहा, “सौर ऊर्जा क्षमता के प्रक्षेपण का प्रमुख प्रभाव उत्तर मध्य भारत में गंगा के मैदानी इलाकों में दिखाई देता है। इस क्षेत्र में भविष्य के सभी मौसमों में सौर क्षमता में तेज गिरावट का अनुमान है और ऐसे में इस चुनौती से निपटने की बेहतर तैयारी करने की ज़रूरत महत्वपूर्ण हो जाती है।” उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में मानसून के दौरान अधिक बादल छाए रहने की उम्मीद है।

शोधकर्ताओं ने भारतीय उपमहाद्वीप में भविष्य (अगले 40 वर्षों) के लिए अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के पवन और सौर उर्जा क्षमता अनुमानों का विश्लेषण इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) द्वारा तैयार किए गए विभिन्न अत्याधुनिक जलवायु मॉडल के जरिए किया। नवीनतम अध्ययन के शोधकर्ताओं ने यह भी बताया अधिकांश जलवायु मॉडल में गंगा के मैदानी इलाकों में पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कमी का अनुमान लगाया गया है। मुखोपाध्याय ने कहा, “मानसून के महीनों, जब गंगा के मैदान के ऊपरी इलाकों (दिल्ली और उत्तर प्रदेश) में हवा की गति में वृद्धि दर्ज की गई, को छोड़कर अधिकांश मौसमों में यह कमी देखी गई है।”

ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कमी का अनुमान उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए इस कारण ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि यह अभी अपने घोषित अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में काफी पीछे है। यूपी की 2017 की सौर ऊर्जा नीति, जो इस साल समाप्त हो रही है, का लक्ष्य देश की 8% बिजली सौर ऊर्जा से उत्पन्न करने की है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, 2022 तक सौर ऊर्जा से 10,700 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना है, जिसमें से 4300 मेगावाट का उत्पादन रूफटॉप सोलर पॉवर के जरिए किया जाएगा। मगर वास्तविकता यह है कि जून 2022 तक सौर ऊर्जा से कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2,244।56 मेगावाट तक ही पहुँच पाई है।

हालाँकि उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन कुछ अन्य राज्यों से बेहतर है। 2 अगस्त, 2022 को राज्य सभा में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा प्रस्तुत ताज़ा आंकड़ों बताते हैं कि अप्रैल 2021 से मई 2022 के बीच चार राज्यों – दिल्ली, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश – द्वारा क्रमशः 268।5 मिलियन यूनिट (एमयू), 195।36 एमयू, 21।94 एमयू और 3,564।4 एमयू सौर ऊर्जा का उत्पादन हुआ। इन चार राज्यों में सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तर प्रदेश और सबसे कम झारखण्ड में हुआ।

खिलाड़ी की सफलता से क्षेत्रवासियों, राज्यवासियों और देश की भावनाएं जुड़ती: सीएम धामी

वहीं संसद में भी इस अध्ययन की चर्चा हुई और इस अध्ययन के चिंताजनक आकलन से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री (विद्युत, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा) आरके सिंह ने कहा कि सरकार पवन और सौर ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय विभिन्न क्षेत्रों में “नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम” के तहत अनुसंधान और विकास को वित्त पोषित कर रहा है, जिनमें सोलर सेल्स की दक्षता बढ़ाना, संसाधन आकलन, सटीक पूर्वानुमान तकनीक, पवन चक्कियों के हब की ऊंचाई बढ़ाना और बड़े रोटर ब्लेड बनाना शामिल है। साथ ही उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए “उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम” से संबंधित उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन कार्यक्रम को लागू करने की योजना है।

Tags: Climate changeEducation Newsenvoirnment changeRenewable Energy
Previous Post

खिलाड़ी की सफलता से क्षेत्रवासियों, राज्यवासियों और देश की भावनाएं जुड़ती: सीएम धामी

Next Post

G-20 समूह की बैठकों की व्यवस्थाएँ बेहतर हों: सीएम शिवराज

Writer D

Writer D

Related Posts

Result
Main Slider

UGC NET जून 2026 रिजल्ट आउट, तीन विषयों के स्कोरकार्ड यहां डाउनलोड करें

18/09/2026
उत्तर प्रदेश

योगी सरकार में शिक्षक बनने का सुनहरा मौका, यूपी में 15,012 पदों पर भर्ती शुरू

16/09/2026
Project Praveen
उत्तर प्रदेश

योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से 5,123 छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

12/09/2026
Yogi government is taking digital education to every home
Main Slider

डिजिटल शिक्षा को घर-घर पहुंचा रही योगी सरकार, पीएम ई-विद्या पर एक मंच में मिलेंगे पढ़ाई के जरूरी संसाधन

10/09/2026
Main Slider

विशेष शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता साफ, 3 नवंबर को होगी परीक्षा

09/09/2026
Next Post
CM Shivraj

G-20 समूह की बैठकों की व्यवस्थाएँ बेहतर हों: सीएम शिवराज

यह भी पढ़ें

Pistol Factory

अवैध शस्त्र फैक्ट्री का भंडाफोड़, एक अभियुक्त गिरफ्तार

31/05/2022
mayawati-akash anand

अब आकाश आनंद नहीं रहे मायावती के उत्तराधिकारी, नेशनल कोओर्डिनेटर पद से भी हटाए गए

07/05/2024
Hatalika Teej-Ganesh Chaturthi

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक दिन, पहले किसकी करें पूजा? जानें सही क्रम

07/08/2026
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version