• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

जानें क्यों रखते हैं निर्जला एकादशी का व्रत, क्या है इसका महत्व

Writer D by Writer D
30/05/2023
in फैशन/शैली, धर्म
0
Devuthani Ekadashi

Devuthani Ekadashi

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

बारह महीनों में 24 और अधिक मास की दो इस तरह कुल 26 एकादशी होती हैं। शास्त्रों में निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi)  व्रत का काफी महत्व बताया गया है। निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी का संबंध महाभारत काल के भीम से भी माना गया है। इस बार निर्जला एकादशी व्रत 30 मई को रखा जाएगा।

इस एकादशी (Nirjala Ekadashi) के व्रत को विधिपूर्वक करने से सभी एकादशियों के व्रत का फल मिलता है। शास्त्रों में उल्लेखों के अनुसार मान्यता है कि पांडव पुत्र भीम के लिए कोई भी व्रत करना कठिन था, क्योंकि उनकी उदराग्नि कुछ ज्यादा प्रज्वलित थी और भूखे रहना उनके लिए संभव न था। मन से वे भी एकादशी व्रत करना चाहते थे।

इस संबंध में भीम ने वेद व्यास व भीष्म पितामह से मार्गदर्शन लिया। दोनों ने ही भीम को आश्वस्त किया कि यदि वे वर्ष में सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत ही कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों (यदि अधिक मास हो तो 26) का फल मिलेगा। इसके पश्चात भीम ने सदैव निर्जला एकादशी का व्रत किया। पद्मपुराण में निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi)  व्रत द्वारा मनोरथ सिद्ध होने की बात कही गई है।

उपवास (Nirjala Ekadashi का महत्व

निर्जला का अर्थ ही होता है बगैर जल के। निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) व्रत पंचतत्व के एक प्रमुख तत्व जल की महत्ता को निर्धारित करता है। इस व्रत में जल कलश का विधिवत पूजन किया जाता है। निर्जला व्रत में व्रती जल के बिना समय बिताता है। जल उपलब्ध होते हुए भी उसे ग्रहण न करने का संकल्प लेने और समयावधि के पश्चात जल ग्रहण करने से जल की उपयोगिता पता चलती है। व्रत करने वाला जल तत्व की महत्ता समझने लगता है।

निर्जला एकादशी व्रत (Nirjala Ekadashi) पौराणिक युगीन ऋषि-मुनियों द्वारा पंचतत्व के एक प्रमुख तत्व जल की महत्ता को निर्धारित करता है। पंचत्वों की साधना को योग दर्शन में गंभीरता से बताया गया है। अतः साधक जब पांचों तत्वों को अपने अनुकूल कर लेता है तो उसे न तो शारीरिक कष्ट होते हैं और न ही मानसिक पीड़ा।

Tags: Nirjala EkadashiNirjala Ekadashi importancenirjala ekadashi kathaNirjala Ekadashi mantranirjala ekadashi niyamNirjala Ekadashi2023
Previous Post

मंगलवार को भूलकर भी ना करे ये काम, बर्बाद हो जाएगी हस्ती खेलती जिंदगी

Next Post

वैष्णो देवी दर्शन के लिए जा रही बस खाई में गिरी, 10 की मौत

Writer D

Writer D

Related Posts

makhana-murmura
खाना-खजाना

स्नैक्स में शामिल करें मखाना और मुरमुरा, स्वाद के साथ सेहत भी

18/04/2026
Lahsun Chutney
खाना-खजाना

यह चटपटी चटनी बढ़ाएंगी खाने का जायका

18/04/2026
फैशन/शैली

हनीमून पर जाने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है ये स्थान, कपल्स की पहली पसंद

17/04/2026
puja ghar
धर्म

घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि, तो मंदिर में जरूर रखें ये चीजें

17/04/2026
Gold
Main Slider

पुराने जेवर भी चमक जाएंगे, इन उपायों से करें साफ

17/04/2026
Next Post
Bus Falls

वैष्णो देवी दर्शन के लिए जा रही बस खाई में गिरी, 10 की मौत

यह भी पढ़ें

पश्चिम बंगाल

सपा सरकार में चाचा-भतीजा के बीच बंटती थी नौकरियां : सीएम योगी

13/03/2021
यूपी पंचायत चुनाव up panchayat election

यूपी पंचायत चुनाव : आरक्षण सूची का इंतजार खत्म, कुछ देर में होगी जारी

02/03/2021

गन्ना विकास विभाग नित नये कीर्तिमान रच रहा है : संजय आर. भूसरेड्डी

13/05/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version