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रामभक्तों का अपमान विरासत का अपमान: योगी आदित्यनाथ

Writer D by Writer D
06/02/2026
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजनीति, राष्ट्रीय
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cm yogi

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लखनऊ/हरिद्वार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय था, जब विरासत को कोसा जाता था, अपमानित किया जाता था, लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं, उनका अपमान किया जाता था। लेकिन, यह रामभक्तों का नहीं, भारत की विरासत का अपमान होता था, भारत के आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान होता था। इसका परिणाम यह निकला कि उत्तर प्रदेश अराजकता का अड्डा बन गया, लूट का अड्डा बन गया और दंगों की आग में झुलसने लगा। गुंडागर्दी भी चरम पर, ना बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हमारी सरकार में विरासत का सम्मान हुआ तो बेटी सुरक्षित हो गई और व्यापारी भी। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।

सीएम योगी (CM Yogi) शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद है, न गुंडागर्दी है। न कर्फ्यू है, न दंगा है – यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो गए हैं। कर्फ्यू दंगाइयों पर लग गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि नीति स्पष्ट थी, नीयत साफ थी। कोई सोचता था कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा? लेकिन, आज भव्य राम मंदिर बन गया।

आश्रम से मिला एमबीए का वास्तविक ज्ञान

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के आप उत्तर प्रदेश कैसे चला रहे हैं, तो मेरा उत्तर होता है कि आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। प्रशासन कैसे चलाना है, प्रबंधन कैसे करना है, भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति से सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों व जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा तो भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें, आश्रम व गुरुकुल परंपरा में हैं। जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प व प्रशासन जैसे विषयों का केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।

माघ मेले में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान

सीएम योगी (CM Yogi) ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यहां पहले केवल अव्यवस्था देखने को मिलती थी, लेकिन आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बने हैं। भारत राष्ट्र यहीं से शक्ति प्राप्त करता है, और जब हमने इन आस्था केंद्रों को सम्मान के साथ आगे बढ़ाया, संरक्षित करने का काम किया, परिणाम भी सामने आया है। लंबे समय तक बीमारू रहा उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि मेरा जन्म इसी देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व सर संघचालक बालासाहब देवरस, दोनों की उपस्थिति रही। यह स्पष्ट करता था कि राष्ट्राध्यक्ष के प्रति हमारा सम्मान सदैव रहेगा, लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं होगा। जब देश विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत माता मंदिर के भव्य निर्माण और उसके लोकार्पण के माध्यम से पूरे देश के सामने आध्यात्मिक नेतृत्व का चिरस्थायी स्मारक समर्पित किया।

न जाति का भेद और न धर्म का अंतर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार हैं। जब हम लोग बचपन में हरिद्वार आते थे, तो सबके मन में यह भाव रहता था कि हरि की पैड़ी में स्नान करना है और भारत माता मंदिर के दर्शन भी करने हैं। यहां न जाति भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, पूरे भारत का स्वरूप प्रतिबिंबित किया गया। यह उस समय की सबसे ऊंची (हाई-राइज) इमारत भी थी। मेरा सौभाग्य है कि देश के भीतर पिछले 11 वर्षों में हमने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी और बदरीनाथ से हरिद्वार तक, विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए बढ़ रही है। यह नए भारत निर्माण की वही गाथा है, जिसका सैकड़ों वर्षों से वर्तमान पीढ़ी को इंतजार था। यह पीढ़ी यह सोच रही थी कि क्या हमारी भावनाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हो पा रहा है या नहीं। एक प्रकार की असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। उस असमंजस से उबरने का कार्य पिछले 11 वर्षों में हमने स्पष्ट देखा है।

भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि जब हम भारत की बात करते हैं, तो भारत केवल एक भौगोलिक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। यह किसी सत्ता की उपज नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निकली शाश्वत चेतना का केंद्र बिंदु है। भारत का उच्चतम न्यायालय भी इस मंत्र को अंगीकार करता है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। धर्म और विजय का यह शाश्वत स्वरूप हमें यह आभास कराता है कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास साक्षी है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो वर्तमान को सुधार पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित रख पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आने से पहले भारत कोई अविकसित या उपेक्षित भूभाग नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विकसित सभ्यता और समृद्ध संस्कृति था। यह राष्ट्र हमारे ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि 2000 वर्ष पहले, जिसे हम भारत का स्वर्ण युग कहते हैं, उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। इसी प्रकार आज से करीब 400 वर्ष पहले भी विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी। यह सामर्थ्य इन्हीं ऋषि-मुनियों की तपस्या के बल पर, अन्नदाता किसानों की सृजनशीलता के बल पर और कारीगरों के परिश्रम के बल पर था। जैसे ही हमने इन मूल्यों से मुंह मोड़ा, पतन की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन, आज फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि भारत गांव आधारित राष्ट्र था। गांव आत्मनिर्भर इकाइयां थे। यहां कृषि थी, पशुपालन था, हस्तशिल्प था, चाहे वस्त्र निर्माण हो या धातु का कार्य, सब कुछ गांवों के भीतर ही होता था। यहां बाहरी सत्ता का हस्तक्षेप नहीं था, न ही किसी अनुदान पर निर्भरता थी। स्वरोजगार भारत की मूल शक्ति था। हमारा किसान उत्पादक था, कारीगर उद्यमी था, और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु। यह पूरा ढांचा ग्राम स्वराज आधारित शासन का एक सशक्त मॉडल था। भारतीय नारी की अर्थव्यवस्था में समान सहभागिता थी। उसे कभी पराधीन नहीं बनाया गया, बल्कि वह समाज और अर्थव्यवस्था की सक्रिय शक्ति रही है। लेकिन आक्रांताओं के साथ-साथ लाभ आधारित अर्थतंत्र ने स्थानीय उत्पादन व्यवस्था को नष्ट किया। स्वरोजगार की जगह टैक्स आधारित व्यवस्था ने ले ली। इस व्यवस्था में कारीगर को गुलाम बना दिया गया और किसान को करदाता बना दिया गया। जैसे ही हम आश्रम पद्धति से विमुख हुए और गुरुकुलों की परंपरा से मुंह मोड़ा, वैसे ही कारीगर गुलामी की स्थिति में पहुंच गया और किसान पर निर्भरता का बोझ बढ़ता चला गया, यहां तक कि वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। हमें याद रखना होगा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा क्या है, जब एक गांव टूटता है, तो उसे केवल एक घटना नहीं माना जाना चाहिए। एक गांव का टूटना, उस राष्ट्र की नींव को हिला देता है।

समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी मौजूद थे।

संत बोले, उत्तर प्रदेश के शेर हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi)

हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) को ‘उत्तर प्रदेश का शेर’ बताते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सबके प्रिय हैं और सबके हितकारी हैं। इनको संभाल कर रखना है। जब से योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली, तब से यूपी में रामराज्य जैसा माहौल दिखाई देता है। आज उत्तर प्रदेश में कहीं भय, अराजकता और उन्माद नहीं दिखाई देता। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि जब पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे नेता नेतृत्व कर रहे हैं, तो हमें कोई संदेह नहीं कि भारत को फिर उसी वैभव के साथ देखेंगे, जैसा हर्षवर्धन के कार्यकाल में, विक्रमादित्य के काल में देखने को मिला था।

Tags: cm yogiharidwar newsup newsUttarakhand News
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