• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

कोविड-19 महामारी के बीच अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है एक बड़ी चुनौती

Desk by Desk
26/07/2020
in Main Slider, ख़ास खबर, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय
0
अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 महामारी और उससे निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में आ गई है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। पहले महामारी पर काबू पाने के लिए लॉकडाउन को सख्ती से लागू किया गया, फिर अर्थव्यवस्था के पहिये को घुमाने के लिए उसे शिथिल करना शुरू किया गया। लॉकडाउन में तमाम छूट के बाद भी पहले जैसी स्थिति नहीं बनती दिख रही है। एक आकलन के अनुसार अभी साठ प्रतिशत अर्थव्यवस्था ही पटरी पर आ सकी है। एक तो होटल, मॉल, रेस्त्रां, मेट्रो, स्कूल आदि बंद पड़े हैं और दूसरे, महामारी के भय से लोग घरों से कम निकल रहे हैं।

आवाजाही आर्थिक गतिविधियों को बल प्रदान करती है, लेकिन महामारी के भय से बहुत से लोग तकनीकी उपायों के जरिये घर से ही काम कर रहे हैं। इसी तरह तमाम कारोबारी यात्रा करने के बजाय वीडियो कांफ्रेंसिंग से काम चला रहे हैं। इसी कारण रेलवे ट्रेनों को पूरी क्षमता से चलाने की आवश्यकता नहीं महसूस कर रहा है। चूंकि हवाई यात्रा में छूट के बावजूद कारोबारी यात्राएं करने से बच रहे हैं इसलिए एयरलाइंस घाटे में चल रही हैं। घाटे से बचने के लिए वे अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने में लगी हैं। पिछले दिनों ही इंडिगो एयरलाइंस ने अपने दस प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी ।

बेगूसराय : स्कॉर्पियो और ट्रक की भीषण टक्कर, चार की मौके पर ही मौत, एक घायल

हालांकि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई तरह के जतन कर रही है, लेकिन महामारी का प्रकोप न थमने के कारण उसकी कोशिश कारगर नहीं साबित हो रही है। माना जा रहा है कि भारत में इस महामारी का प्रकोप अभी और तेजी पकड़ेगा। हालांकि भारत में महामारी की चपेट में आने वालों की मृत्युदर कम है, लेकिन जहां दिल्ली जैसे शहरों में उसका असर कम हो रहा है वहीं देश के अन्य इलाकों में वह बढ़ता दिख रहा है। चिंता की बात यह है कि इनमें ग्रामीण इलाके भी हैं।

राज्यों ने शुरुआत में कोरोना के संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए कहीं कम संख्या टेस्ट करके समस्या को बढ़ाने का ही काम किया है। यह ठीक है कि उन्हें गलती का अहसास हो गया, लेकिन इस पर गौर करने की जरूरत है कि बडे़ शहरों में तो सरकारी स्वास्थ्य ढांचा तो जैसे-तैसे इस महामारी का मुकाबला कर पा रहा है, लेकिन छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों का स्वास्थ्य ढांचा अपर्याप्त साबित हो रहा है। यही कारण है कि लोगों में भय व्याप्त हो रहा है।

जहां लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है वहीं राज्य सरकारों को अपने स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने पर काम करना होगा। कमजोर स्वास्थ्य ढांचे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति का कोई मतलब नहीं, क्योंकि उससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि महामारी के प्रसार के लिए कमजोर स्वास्थ्य ढांचे के साथ ही लोगों की लापरवाही भी जिम्मेदार है।

कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के खतरे के बाद भी लोग शारीरिक दूरी को लेकर सजग नहीं हैं। तमाम लोग तो मास्क का भी इस्तेमाल सही तरह नहीं कर रहे हैं। स्पष्ट है कि यह लापरवाही भारी पड़ रही है। बेहतर हो कि राजनीतिक दल महामारी को लेकर सस्ती राजनीति करने के बजाय आम लोगों को इसके लिए प्रेरित करें कि वे पर्याप्त सावधानी बरतें। राजनीतिक दलों को इसकी भी चिंता करनी चाहिए कि अर्थव्यवस्था पटरी पर कैसे आए?

यह तय है कि कोविड-19 महामारी ने अर्थव्यवस्था को जो गहरा नुकसान पहुंचाया है उसकी भरपाई लंबे समय तक नहीं हो पाएगी। महामारी के अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक अन्य चुनौती अतिक्रमणकारी चीन का रवैया भी है।

महामारी के बीच चीनी सेना ने लद्दाख की गलवन घाटी में जो हरकत की उसके बाद भारत के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह आर्थिक-व्यापारिक मामलों में उससे दूरी बनाए। देश के छोटे-बड़े कारोबारी संगठन चीन को सबक सिखाने के लिए उसके साथ व्यापार करने से तौबा कर रहे हैं। चीन के प्रतिकार का यही सबसे अच्छा तरीका है। यह अच्छा है कि तमाम छोटे कारोबारी चीन से जो कच्चा माल मंगाते थे उसे वे खुद तैयार करने पर जोर दे रहे हैं। यह जज्बा कायम रहना चाहिए।

कारगिल दिवस की 21वीं वर्षगांठ : अमित शाह-राजनाथ ने किया वीर शहीदों को सलाम

खुद भारत सरकार भी चीनी कंपनियों पर लगाम लगा रही है। चीनी निवेश को नियंत्रित करने, उसके 59 एप्स पर पाबंदी लगाने के बाद भारत ने हाल में चीन की सरकारी कंपनियों से खरीद पर रोक लगाने का फैसला किया। भारत की तरह दुनिया के अन्य देश भी चीन से आर्थिक दूरी बना रहे हैं। इसका कारण यह है कि वे चीन को कोरोना वायरस के प्रसार के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। इन देशों को चीन का विस्तारवादी रवैया और साथ ही उसकी मनमानी आर्थिक-व्यापारिक नीतियां भी रास नहीं आ रही हैं।

अमेरिका, यूरोप, जापान आदि की तमाम कंपनियां चीन से अपना कारोबार समेट रही हैं। यह भारत के लिए एक अच्छा अवसर है, लेकिन अभी इसे सही तरह नहीं भुनाया जा पा रहा है। अभी तक चीन छोड़ने का इरादा जताने वाली इक्का-दुक्का कंपनियों ने ही भारत की ओर रुख किया है। ऐसे में यह जरूरी है कि भारत सरकार इन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों में और तेजी लाए। कहीं ऐसा न हो कि ये बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से निकल कर वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड आदि जाना पसंद करें।

चीन छोड़ने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने के साथ ही भारत को घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहित करने पर भी नए सिरे से ध्यान देना होगा। इसकी भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के मुकाबले भारत ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जो आर्थिक पैकेज घोषित किया उसे नाकाफी माना जा रहा है। इस पैकेज का वैसा असर नहीं पड़ा जैसी उम्मीद थी। इसी कारण जमीनी हकीकत बदल नहीं रही। कारोबारी समुदाय में यह जो आशा जगी थी कि इस पैकेज के साथ श्रम सुधारों के साथ अन्य लंबित सुधार भी आगे बढ़ेंगे, वह पूरी नहीं हुई।

बेंगलुरु : 3 हज़ार से ज्यादा कोरोना मरीज गायब, प्रशासन की उड़ी नींद

बेहतर मानसून ने इसकी संभावना अवश्य बढ़ाई है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी, पर शहरी अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने में समय लगेगा। शायद इसी कारण केंद्र सरकार कारोबार जगत के लिए नए सिरे से राहत देने के उपायों पर विचार कर रही है। उम्मीद है कि ये उपाय कारोबार जगत की उम्मीदों के अनुरूप होंगे और उनसे अर्थव्यवस्था को जल्द पटरी पर लाने में मदद मिलेगी।

Tags: 'covid 19' epidemicapnibaatChallenge before governmentCoronaviruslockdownModi governmentto bring economy back on trackअर्थव्यवस्था
Previous Post

दौड़ प्रतियोगिता में दिव्यांग बच्ची ने दिखाया अपनी प्रतिभा का हूनर

Next Post

गलवन घाटी में हॉट स्प्रिंग से पीछे हटी चीन की सेना, कमांडर स्तर की बैठक के आसार

Desk

Desk

Related Posts

cm dhami
राजनीति

नीति घाटी को धामी की बड़ी सौगात, बॉर्डर टूरिज्म और होम स्टे विकास को मिलेगा बढ़ावा

01/06/2026
CM Yogi
उत्तर प्रदेश

योगी सरकार चलाएगी राष्ट्रचेतना का महाभियान, देश के अमर नायकों की कथा का होगा मंचन

01/06/2026
CM Vishnudev Sai
Main Slider

वर्षों तक विकास से वंचित रहे क्षेत्र में अब विकास की नई गाथा लिखी जा रही है : मुख्यमंत्री साय

01/06/2026
Meritorious students are the future builders of the country: Keshav Maurya
उत्तर प्रदेश

मेधावी छात्र ही देश के भविष्य निर्माता: केशव प्रसाद मौर्य

01/06/2026
AK Sharma
उत्तर प्रदेश

ए.के. शर्मा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास, पीएम सूर्यघर पर मिला उत्कृष्टता पुरस्कार

01/06/2026
Next Post

गलवन घाटी में हॉट स्प्रिंग से पीछे हटी चीन की सेना, कमांडर स्तर की बैठक के आसार

यह भी पढ़ें

बिग बॉस में आया ज़बरदस्त ट्विस्ट, फिजिकल होने पर शो से बाहर हुई ये एक्ट्रेस

10/11/2021

उपभोक्ता रात को चैन से सोए, इसकी पूरी तैयारियां दिन में करें : श्रीकांत

10/07/2021
Masala Puri

ब्रेकफास्ट में लें इस टेस्टी डिश स्वाद, नोट करें मजेदार रेसिपी

07/08/2025
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version