फर्रुखाबाद। छह बार विधायक रह चुके सपा के वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यमंत्री नरेंद्र सिंह यादव ने पार्टी से टिकट कटने के बाद सपा से इस्तीफा दे दिया है। नरेंद्र सिंह यादव ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफे का पत्र 25 जनवरी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेज दिया था। जिसमें उन्होंने लिखा कि पार्टी सिद्धांतों और आदर्शों से भटक चुकी है। पत्र में उन्होंने पिछले कुछ वर्षाें से पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और सुनवाई न होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी की प्रथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की बात लिखी है।
बता दें, पूर्व राज्यमंत्री नरेंद्र सिंह यादव सपा के बड़े नेताओं में शुमार हैं। वह मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1985, 1991, 1996, 2002, 2007 और अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र से 2012 में विधायक बने। नरेंद्र सिंह का पार्टी के ही अलीगंज के मूल निवासी एक नेता से राजनीतिक मतभेद है। जिला पंचायत चुनाव में दोनों नेताओं की अहम ऐसी टकराई कि नरेंद्र सिंह के पुत्र सचिन यादव को सपा से बगावत करनी पड़ी।
अपनी सूझबूझ के चलते अलीगंज वाले नेता को चारों खाने चित करके भाजपा की मदद से सचिन ने बहन मोनिका यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया। इस घटनाक्रम में नरेंद्र सिंह भी पार्टी को दरकिनार कर पुत्री के साथ रहे। हालांकि पार्टी ने सचिन यादव को बाहर का रास्ता दिखा दिया था, मगर पूर्व मंत्री पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सकी। उनके विरोधी गुट ने कई बार पार्टी से निष्कासन कराने के प्रयास भी किए।
नरेंद्र सिंह ने इन सबकी बिना परवाह किए अपना कद बरकरार रखा। कई बार अखिलेश यादव के साथ मंच पर आगे की कुर्सी हासिल की। विधानसभा चुनाव के वक्त भी विरोधी गुट सक्रिय हो गया और लंबे प्रयास के बाद नरेंद्र सिंह की टिकट कटवा दी। सपा ने अमृतपुर से डॉ. जितेंद्र सिंह यादव को मैदान में उतारा है। इसी विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2012 के चुनाव में नरेंद्र सिंह यादव ने विजय हासिल की थी। तब डॉ. जितेंद्र सिंह यादव दूसरे स्थान पर रहे थे। उस समय डॉ. जितेंद्र ने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से चुनाव लड़ा था।
UP Chunav 2022: सपा ने एक और लिस्ट जारी की, 8 उम्मीदवार घोषित
सपा से टिकट कटने के बाद नरेंद्र सिंह ने अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बुलाकर विचार विमर्श किया। इसके बाद अमृतपुर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। नरेंद्र सिंह ने फोन पर बताया कि कायमगंज के कार्यकर्ताओं से बात करके वहां से पुत्रवधू को भी चुनाव मैदान में उतारेंगे। हमारे लिए कार्यकर्ता सर्वोपरि हैं।
वहीं यह भी चर्चा में है कि कायमगंज सीट से पुत्रवधू को भी चुनाव लड़ाने का विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह जो कुछ हैं कार्यकर्तार्ओं की देन है। लिहाजा हर कार्यकर्ता का सम्मान करना प्राथमिकता है।