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ओमप्रकाश राजभर को दोबारा गठबंधन में लाने के लिए BJP ने शुरू की कवायद

Writer D by Writer D
11/06/2021
in Main Slider, अंतर्राष्ट्रीय, उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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OP Rajbhar

OP Rajbhar

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी रण में उतरने से पहले बीजेपी अपने सियासी समीकरण को मजबूत करने में जुट गई है। इस कड़ी में मौजूदा सहयोगी को समझाने और साथ छोड़कर चले पुराने सहयोगी को दोबारा से लाने की कवायद बीजेपी जुट गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद से मुलाकात की है। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओपी राजभर के लिए गठबंधन में वापसी के दरवाजे खोल दिए गए हैं।

बीजेपी ने ओमप्रकाश राजभर के साथ एक बार फिर गठबंधन में वापसी की कवायद शुरू कर दी है। पूर्वांचल के एक बड़े बीजेपी नेता के जरिए ओमप्रकाश राजभर से संपर्क किया जा रहा है। पूर्वांचल के यह नेता दिल्ली दरबार से बेहद करीब बताए जाते हैं. इतना ही नहीं ओम प्रकाश राजभर के साथ भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। सूत्रों की मानें तो राजभर के साथ उनके दो दौर की बातचीत भी हो गई है। इस दौरान रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने के साथ-साथ उन्हें योगी कैबिनेट में दोबारा से एंट्री का भरोसा दिलाया गया है।

2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी अपने समीकरण और गठबंधन कोपूरी तरीके से दुरुस्त करना चाहती है। इसी क्रम में बीजेपी ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के साथ संपर्क किया है। सूत्रों की मानें तो ओमप्रकाश राजभर ने साफ कह दिया है कि बीजेपी आज सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू कर दे तो पार्टी उनके साथ खड़ी हो जाएगी।

2019 में बीजेपी से अलग हो गए थे

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव के मतदान खत्म होने के अगले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। राजभर सत्ता में आने के एक साल के बाद से ही ओबीसी समुदाय के मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ तल्ख बयान दिए थे और लगातार बीजेपी के खिलाफ हमले बोल रहे थे, जिसके चलते उनकी कैबिनेट से छुट्टी कर दी गई।

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हालांकि, बीजेपी आलाकमान अब नए सिरे से यूपी में गठबंधन को साधने और बुनने में जुट गया है। पंचायत चुनाव में पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर की पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वाराणसी में राजभर की पार्टी को जीत मिली है। ऐसे में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व राजभर की गठबंधन में वापसी के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। इतना ही नहीं राजभर जिस रोहणी कमीशन की रिपोर्ट को लागू कराने को लेकर मोर्चा खोले हुए थे, उसे लेकर भी बीजेपी संजीदा हो गए है।

माना जा रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने की दिशा में कदम उठा सकती है। रोहिणी कमीशन को 31 जुलाई 2021 तक रिपोर्ट तैयार करने का टाइम बढ़ाया गया है। संसद में भी इस रिपोर्ट को लागू करने की मांग उठ चुकी है। यह रिपोर्ट के लागू होती ही ओबीसी आरक्षण का फॉर्मूला चार हिस्सों में बंट सकता है, जिसका बड़ा फायदा तमाम उन ओबीसी जातियों को मिलेगा, जिन्हें आरक्षण का फायदा अभी तक नहीं मिल सका है।

पूर्वांचल में राजभर अहम फैक्टर

पूर्वांचल के कई जिलों में राजभर समुदाय का वोट राजनीतिक समीकरण बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है। यूपी में राजभर समुदाय की आबादी करीब 3 फीसदी है, लेकिन पूर्वांचल के जिलों में राजभर मतदाताओं की संख्या 12 से 22 फीसदी है। राजभर समुदाय घाघरा नदी के दोनों ओर की सियासत को प्रभावित करता है। गाजीपुर, चंदौली, मऊ, बलिया, देवरिया, आजमगढ़, लालगंज, अंबेडकरनगर, मछलीशहर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और भदोही में इनकी अच्छी खासी आबादी है, जो सूबे की करीब चार दर्जन विधानसभा सीटों पर असर रखते हैं।

ओमप्रकाश राजभर से दूरी के बाद यूपी की सत्ता पर काबिज बीजेपी ने राजभर वोटों को साधने के लिए अनिल राजभर को मोर्चे पर लगाया है। उन्हें राजभर के नेता के तौर पर बीजेपी लगातार प्रोजेक्ट कर रही है, जिसके लिए ओम प्रकाश को गृह जिला बलिया का प्रभारी भी पार्टी ने बना रखा है। इसके बावजूद पंचायत चुनाव में जिस तरह से पूर्वांचल में राजभर समुदाय ने ओम प्रकाश के पक्ष में लामबंद रहे। इतना ही नहीं गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, बलिया और आजमगढ़ में कई सीटें मिली हैं, जिसके चलते दोबारा से बीजेपी में लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

Tags: bjpomprakash rajbharup vidhansabha election
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