• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

चाचा शरीफ का साइकिल मैकेनिक से पद्म श्री तक का सफर

Writer D by Writer D
09/11/2021
in Main Slider, नई दिल्ली, राष्ट्रीय
0
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार को लेकर सालों से सुर्खियों में रहने वाले अयोध्या के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद शरीफ को सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म श्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस बारे में राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट किया, राष्ट्रपति कोविंद ने मुहम्मद शरीफ को सामाजिक कार्य के लिए पद्मश्री प्रदान किया। वह एक साइकिल मैकेनिक होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सभी धर्मों की लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार पूरी गरिमा के साथ करते हैं। देश में नागरिक सम्मान के पद्मश्री पुरस्कार चौथा सर्वोच्च सम्मान है।

पद्म पुरस्कारों की घोषणा हरेक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं: पद्म भूषण (असाधारण और विशिष्ट सेवाओं के लिए), पद्म भूषण (उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा) और पद्म श्री (प्रतिष्ठित सेवा)।

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद शरीफ की कहानी इंसानियत को झकझोर देने वाली है। उनका जीवन और उनकी सेवाएं एक मिसाल बन गई हैं। ऐसे में निराश होने वाले अक्सर हार मान लेते हैं। परिस्थितियां और समय बर्बाद होता है जब आप किसी प्रियजन को खो देते हैं, तो आप जीवन में विश्वास खो देते हैं। हम कभी कड़वे तो कभी उदास हो जाते हैं लेकिन फिर कुछ लोग मोहम्मद शरीफ भी बन जाते हैं।

मोहम्मद शरीफ  ने अपने जीवन में हजारों लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया है। इस सेवा ने मोहम्मद शरीफ को खास बना दिया है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने हजारों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है। यहां तक कि खुद मोहम्मद शरीफ (और पड़ोस के लोगों के लिए शरीफ चाचा) को भी याद नहीं कि वास्तविक संख्या क्या है। यदि मृतक मुस्लिम होता है, तो जनाते की नमाज पढ़ाई जाती है और उसे दफनाया जाता है हिंदू का अंतिम संस्कार हिंदू धर्म के विधि-विधान के तहत कराया जाता है।  चाचा शरीफ के मुताबिक वह इन लावारिस शवों को दफनाने या जलाने के लिए किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं लेते हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के अयोध्या के रहने वाले शरीफ के चाचा ने अपने 27 वर्षीय बेटे रियाज को एक हादसे में खो दिया था। चाचा शरीफ की कमजोर आंखों में अब उनके बेटे रियाज के लिए एक धुंधली तस्वीर है – उनका बेटा जो एक मेडिकल एजेंट की नौकरी के लिए शहर से बाहर गया था। कभी वापस नहीं आया। एक महीने बाद रियाज के लापता होने की खबर आई और फिर महीनों बाद उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली।

एक पिता के लिए बेटे को खोने का दर्द दुनिया के किसी भी दर्द से ज्यादा दर्दनाक होता है। इसके बाद मोहम्मद शरीफ जीवन से हताश हो गए थे। फिर एक दिन उन्होंने पुलिस को एक लावारिस शव को नदी में फेंकते देखा। तब महसूस किया कि अगर उसके बेटे का शव नहीं मिला तो उसे भी इसी तरह किसी नदी में फेंक दिया जाता। तब मोहम्मद शरीफ ने कसम खाई कि इस तरह से किसी के बेटे या बेटी के लाश को अपवित्र नहीं होने देंगे। सभी का उनकी आस्था के अनुसार अंतिम संस्कार कराएंगे। इसके बाद उन्होंने पुलिस से इस बारे में बात की। अनुरोध किया कि वह खुद इन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करेंगे।

यदि रेलवे ट्रैक पर कोई शव मिलता है या सड़क दुर्घटना में किसी की मौत हो जाती है और तीन दिनों तक कोई उसे खोजने या दावा करने नहीं आता है, तो वे अंतिम संस्कार करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इस हादसे को बीस साल बीत चुके हैं। अब तक उन्होंने हजारों लाशों का अंतिम संस्कार किया। पहले तो उनके परिवार और रिश्तेदार इसका विरोध किया। कुछ लोग उन्हें पागल कहने लगे, लेकिन मोहम्मद शरीफ अपनी इच्छा पर चट्टान की तरह फंस गए हैं।

एक समय वह बहुत बीमार थे, लेकिन अखबारों में छपी खबर के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर मदद मिली। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार ने बाद में उनकी मानवीय सेवाओं को मान्यता दी और पद्म श्री से सम्मानित करने की घोषणा की।

बेशक मोहम्मद शरीफ के लिए उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह था जब देश के राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। आज वे व्हीलचेयर पर हैं, लेकिन उनका हौसला अभी भी बुलंद है। नई पीढ़ी के लिए वह प्रेरणा स्रोत हैं।

Tags: ayodhya newsdelhi newsNational newsPadma Shri awardsharif chacha
Previous Post

डिप्टी CM केशव मौर्य ने जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु अधिकारियों को दिए निर्देश

Next Post

अखिलेश के इत्र से सपा के पापों की दुर्गंध नहीं जाएगी : स्वतंत्र देव

Writer D

Writer D

Related Posts

Main Slider

महाराज जी का जीवन आध्यात्मिक चेतना, समाजसेवा और लोककल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक: CM धामी

21/09/2026
CM Dhami
Main Slider

जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर सीएम धामी का सख्त एक्शन, छह इंजीनियर निलंबित

21/09/2026
Main Slider

जनसमस्याओं का त्वरित और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री धामी

21/09/2026
उत्तराखंड

धामी ने मातृशक्ति के स्थानीय उत्पादों की सराहना की, ‘हाउस ऑफ हिमालया’ का किया जिक्र

21/09/2026
Main Slider

यूपी को फिर बांटने की कोशिश कर रहे समाजवादी: नितिन नवीन

21/09/2026
Next Post
Swatantradev

अखिलेश के इत्र से सपा के पापों की दुर्गंध नहीं जाएगी : स्वतंत्र देव

यह भी पढ़ें

cm yogi

शिक्षित-अनपढ़ सबके रोम-रोम में बसा है हनुमान चालीसा: सीएम योगी

13/01/2023

हमारा संकल्प है कि उत्तर प्रदेश में कोई बेघर नहीं होगा : सीएम योगी

19/04/2022
car accident

तेज रफ्तार वाहन ने कार को मारी टक्कर,कार चालक की मौत

28/01/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version