हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि देव (Shani Dev) को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है। शनि देव न्याय प्रिय माने जाते हैं। वो व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार फल देते हैं। साथ ही कर्म के अनुसार ही व्यक्ति शनि देव से दंड पाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को बहुत महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। उन्हें सबसे क्रूर ग्रह भी कहा जाता है, लेकिन शनि देव अगर प्रसन्न हो जाएं तो वो रंक को राजा बना देते हैं।
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए लोग उनकी पूजा करते हैं। तरह तरह के उपाय करते हैं। वहीं शनि अगर क्रोधित हो जाएं तो व्यक्ति का सब कुछ कुछ छीन लेते हैं। व्यक्ति को धन हानि होती है। आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। साढ़ेसाती (Shani Sadesati) के समय तो शनि देव व्यक्ति को और अधिक गहराई से परखने लगते हैं। इस समय अगर व्यक्ति गलती करता है, तो उसके लिए परिणाम बहुत भयावय हो सकते हैं। ऐसे में साढ़ेसाती के दौरान किन गलतियों को करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं।
काम में लापरवाही नहीं करें
शनि की साढ़ेसाती (Shani Sadesati) के समय आत्मविश्लेषण करना चाहिए। इस दौरान अपने कर्मों में शुद्धता रखनी चाहिए। इस समय व्यक्ति अगर आलस्य करता है। काम टालता है। काम में लापरवाही दिखाता है, तो शनि देव उसको दंडित कर सकते हैं। साढ़ेसाती के दौरान हर एक छोटा सा कर्म भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए काम में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
दान करें
साढ़ेसाती (Shani Sadesati) के समय शनि देव की प्रिय वस्तुओं का दान करना चाहिए। अगर व्यक्ति ऐसा नहीं करता तो शनि देव उसको अपने आशीर्वाद से वंचित कर सकते हैं। शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोहा, काले वस्त्र और सरसों का तेल का दान अवश्य करना चाहिए।
नशा और मांसाहार से दूर रहें
शनि देव को संयम और सात्विकता प्रिय है। ऐसे साढ़ेसाती के दौरान शराब, मांसाहार और हर तरह के नशे से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
किसी से झूठ-फरेब न करें
शनि देव को सच और ईमानदारी के रास्ते पर चलने वाले लोग पसंद आते हैं। ऐसे में साढ़ेसाती के समय खास तौर ईमानदारी की राह पर चलना चाहिए। जो लो झूठ-फरेब करते हैं वो शनि की नजर में अपराधी होते हैं। शनि उन्हें उनके अपराध का दंड भी देते हैं।