• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

गीता की परम्परा ही भारतीय परम्परा रही: मोहन भागवत

Writer D by Writer D
29/11/2022
in उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
0
Mohan Bhagwat

Mohan Bhagwat

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

प्रयागराज। संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा कि भगवान आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित श्रीमद्ज्योतिष्पीठ के माध्यम से गुरू-परम्परा को ढाई हजार वर्षों से निरन्तर बनाये रखने का प्रयास हो रहा है। जिसके लिए जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती महाराज अथक परिश्रम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘ब्रह्म सत्यम् जगत मिथ्या’ का सूत्र जानते हुए भी व्यक्ति लौकिक जगत में जीता है। वास्तव में गीता जीवन के भटकाव को रोकती है। गीता की परम्परा ही भारतीय परम्परा है, यह पहले ही भी रही है, आज भी रही है और आगे भी रहेगी।

उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डाॅ मोहन भागवत ने मंगलवार की सायं श्रीमद् ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के संरक्षण में जगद्गुरू शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर ब्रह्मलीन स्वामी शांतानन्द सरस्वती सभाकक्ष में आयोजित आराधना महोत्सव में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नाम भले ही अलग-अलग हो जाए। ऐसे लोगों ने जो काम किया है हमें सदैव उसका परिशीलन करने का प्रयास करना चाहिए।

आराधना महोत्सव के माध्यम से शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मलीन ब्रह्मानन्द सरस्वती की 150वीं जयन्ती तथा ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी शांतानन्द महाराज की 100वीं जयन्ती के उपलक्ष में आज का यह भव्य आयोजन करने वालों के प्रति हम कृतज्ञ हैं। आचार्यों का स्मरण, पूजन और उनके बताये मार्गों पर चलना हमारी भारतीय सामाजिक जीवन की देन है, जो इन्हीं महापुरुषों ने निर्मित किया है। धर्म सबको साथ लेकर चलता है, दुनिया का सम्पूर्ण सत्य इन्हीं महापुरुषों, सन्तों के पास है। शंकराचार्य ने जो काम किया उससे हमें राष्ट्रीय जीवन की दिशा में सबक लेना चाहिए।

अपने आशीर्वाद में जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीमद्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी शांतानन्द सरस्वती की स्मृति में यह आराधना महोत्सव प्रत्येक वर्ष होता है। जगद्गुरू शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती महाराज ने उत्तर भारत के शंकराचार्य परम्परा को पुनस्र्थापित कर संस्था का विकास किया। 150वीं जयन्ती का उद्घाटन आज डाॅ मोहन भागवत कर रहे हैं।

परमहंस स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी टीकरमाफी ने कहा कि लगभग 165 वर्षों तक ज्योतिष्ठपीठ की पूजा-पद्धति बाधित रही। जिसे जगद्गुरू स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती ने वर्ष 1941 में पुनः प्रारम्भ किया और स्वामी शांतानन्द, विष्णुदेवानंद के बाद अब यह परम्परा शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में विश्वव्यापी स्वरूप ले रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का आज के कार्यक्रम में सम्मिलित होना शुभदायक है। इस पीठ का आशीर्वाद लेने वालों का भविष्य हमेशा उज्जवल रहता है।

अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें अधिकारी: सीएम योगी

कार्यक्रम के प्रारम्भ में मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कथाव्यास स्वामी आचार्य जितेन्द्र नाथ महाराज श्रीनाथ पीठाधीश्वर, श्रीक्षेत्रसुजी अंजन गाँव, अमरावती विदर्भ, महाराष्ट्र एवं श्रीमद्भागवतमहापुराण को माल्यार्पण कर पूजा आरती किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पूर्व राज्यपाल पं. केशरी नाथ त्रिपाठी, ब्रह्मचारी गिरीश, कुलाधिपति महर्षि योगी वैदिक विश्वविद्यालय, दण्डीस्वामी विनोदानंद महाराज, दण्डीस्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, पं. शीलधर शास्त्री, पं. अंशू त्रिपाठी, ब्रह्मचारी आत्मानंद, आचार्य अभिषेक, आचार्य विपिन, दण्डीस्वामी शंकराश्रम, दिलीप चैरसिया आदि उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों को काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी एवं श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर, अयोध्या का नमूना पीठोद्धारक शंकराचार्य का सिक्का और स्मृति चिन्ह, ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी शान्तानंद का स्मृति-चिन्ह एवं आराधना महोत्सव के उपलक्ष में प्रकाशित ग्रन्थ शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती द्वारा भेंट किये गये।

कथाव्यास आचार्य जितेन्द्र ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में ”कृष्णम् वंदे जगद्गुरूम्“ं का संदेश प्रमुखता से दिया गया। उन्होंने बताया कि विश्व की किसी भी डिक्शनरी में विज्ञान शब्द का कोई पर्याय नहीं है। हमारे शास्त्रों में विज्ञान शब्द हजारों वर्षों से स्थापित है। दैवीय शक्तियों के स्वरूप में कोई अन्तर नहीं है, इसलिए भगवान आदिशंकराचार्य की स्थापित पीठों के शंकराचार्य का महत्व आदिभगवान शंकराचार्य की तरह ही है। श्रीमद्भागवतपुराण स्वयं में साक्षात् परमब्रह्म है।

Tags: Mohan BhagwatPrayagraj News
Previous Post

तीन मंजिला मकान में आग लगने से चार की मौत, सीएम योगी ने जताया शोक

Next Post

12 घंटे बाद दिल्ली एम्स का सर्वर हुआ बहाल

Writer D

Writer D

Related Posts

Khushi
उत्तर प्रदेश

सीएम योगी के संकल्प से खुशहाल हुई ‘खुशी’ की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का पक्का इंतजाम

03/07/2026
CM Yogi
उत्तर प्रदेश

प्रदेश में विकसित होगा एकीकृत ट्रॉमा नेटवर्क, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

03/07/2026
20% tariff rebate on solar hours implemented to promote EV charging
उत्तर प्रदेश

प्रदेश में ईवी चार्जिंग को बढ़ावा देने के लिए सोलर आवर्स में 20% टैरिफ छूट लागू

03/07/2026
Mahakumbh-2025 received National e-Governance Award for Innovation
उत्तर प्रदेश

महाकुंभ-2025 को नवाचार हेतु मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार

03/07/2026
Keshav Maurya
उत्तर प्रदेश

2027 तक प्रत्येक युवा हो प्रशिक्षित, रोजगारयुक्त तथा महिलाएं हों आर्थिक रूप से सशक्त : केशव प्रसाद मौर्य

03/07/2026
Next Post
AIIMS

12 घंटे बाद दिल्ली एम्स का सर्वर हुआ बहाल

यह भी पढ़ें

Road Accident

बारातियों से भरी पिकअप अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई, 12 घायल

10/12/2020
पीएम मोदी pm modi

बिहार चुनाव : मोदी ने जनता से की वोट देने की अपील, कहा- मास्क अवश्य पहने

07/11/2020
arrested

सरेराह आंखों में र्मिची डालकर लूटने वाले गिरोह के छह बदमाश गिरफ्तार

08/02/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version