• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

चांद के बाद अब सूरज की बारी, आज आदित्य-एल1 को लॉन्च करेगा ISRO

Writer D by Writer D
02/09/2023
in Main Slider, Tech/Gadgets, राष्ट्रीय
0
Aditya-L1

Aditya-L1

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

श्रीहरिकोटा। चंद्रमा पर सफलतापूर्वक अपना यान उतारने के बाद भारत सूर्य की खोज के लिए शनिवार को अपना पहला मिशन  Aditya-L1 रवाना करेगा। इसके लिए काउंटडाउन जारी है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड दो से Aditya-L1 का शनिवार सुबह 11:50 बजे प्रक्षेपण किया जाएगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने Aditya-L1 को सूर्य की कक्षा तक भेजने के लिए अपने बाहुबली रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी)-सी 57 पर ही भरोसा किया है। इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि मिशन को कक्षा तक पहुंचने में 125 दिन लगेंगे।

ऐसे पूरा होगा सफर

Aditya-L1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा। प्रोपल्शन प्रणाली के जरिये अंतरिक्ष यान को लग्रांज पॉइंट एल1 की ओर भेजा जाएगा। एल1 पाॅइंट की तरफ बढ़ने के साथ ही यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकल जाएगा। एल1 पॉइंट पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है। एल1 पॉइंट अंतरिक्ष में एक ऐसी जगह है, जहां सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का असर नहीं होता है। इसके चलते वस्तुएं यहां रह सकती हैं। इसे पार्किंग पॉइंट भी कहा जाता है।

सूर्य-पृथ्वी के बीच पांच लग्रांजियन पॉइंट

सूर्य और पृथ्वी के बीच पांच लग्रांजियन पॉइंट हैं। एल1 पॉइंट प्रभामंडल कक्षा में है जहां से सूर्य पर ग्रहण का असर नहीं होता। इस पॉइंट से सौर गतिविधियां लगातार देखने का लाभ मिलेगा। यहां से सूर्य, अपनी आकाशगंगा और अन्य तारों का व्यापक अध्ययन संभव है। पीएसएलवी के लिए ‘एक्सएल’ का इस्तेमाल हुआ है, जो ज्यादा शक्तिशाली होना दर्शाता है। 2008 में चंद्रयान-1 व 2013 में मंगल ऑर्बिटर मिशन के लिए भी ऐसा रॉकेट इस्तेमाल हुआ था।

मिशन का उद्देश्य

इसरो के अनुसार, Aditya-L1 का मुख्य उद्देश्य कोरोनल मास इजेक्शन (सूर्य के कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का बड़े पैमाने पर निष्कासन) की उत्पति, गतिशीलता और प्रसार को समझने और कोरोना के अत्यधिक तापमान के रहस्य का समाधान करना है। 190 किलो का विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) पांच वर्षों तक सूर्य की तस्वीरें भेजेगा।

Tags: Aditya-L1aditya-l1 missionISRO
Previous Post

खेत से संदिग्ध स्थितियों में किसान का शव बरामद

Next Post

आटा चक्की में उतरा करंट, एक ही परिवार चार लोगों की मौत

Writer D

Writer D

Related Posts

Main Slider

UPITS में दूसरे दिन 4,700 बी2बी बैठकें, 412 समझौते

26/09/2026
Main Slider

सीएम धामी ने उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 और GEP की तकनीकी रिपोर्ट का किया विमोचन

26/09/2026
Main Slider

भारी बारिश से प्रभावितों को तत्काल मिले राहत, सीएम योगी ने दिए सख्त निर्देश

26/09/2026
Main Slider

आज एक बड़ी बिजनेस अपॉर्चुनिटी बन सकता है वेस्ट मैनेजमेंट: ए.के. शर्मा

26/09/2026
Rahul Gandhi-Akhilesh Yadav
Main Slider

अखिलेश यादव की रायबरेली से राहुल गांधी को सीधी चुनौती

26/09/2026
Next Post
Electrocution

आटा चक्की में उतरा करंट, एक ही परिवार चार लोगों की मौत

यह भी पढ़ें

CM Dhami

सीएम धामी ने टनल में फंसे श्रमिक के परिजनों से की मुलाकात, बंधाया ढाढस

26/11/2023

कोरोना वायरस: देश में 90 फ़ीसदी लोग कोरोना से हुए ठीक

24/10/2020

………जो बीत गया, वो रीत गया

12/04/2022
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version