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स्वतंत्रता खो रही पत्रकारिता

Writer D by Writer D
03/05/2023
in शिक्षा
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World Press Freedom Day

World Press Freedom Day

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पत्रकारिता (Journalism) लोकतंत्र में जनहित के प्रहरी के रूप में कार्य करता है। यह एक लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और लोगों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं की सूचना देने का काम करता है। पत्रकारिता को लोकतांत्रिक देशों में विधानमंडल, कार्यकारी और न्यायपालिका के साथ “चौथा स्तंभ” माना जाता है। पाठकों को प्रभावित करने में इसकी अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जो भूमिका निभाई थी, वह राजनीतिक रूप से उन लाखों भारतीयों को शिक्षित कर रही थी, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में शामिल हुए थे।

पत्रकारिता (Journalism) एक पेशा है जो सेवा तो करता ही है। यह दूसरों से प्रश्न का विशेषाधिकार भी प्राप्त करता है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक, निष्पक्ष: और सभ्य तरीके और भाषा में जनहित के मामलों पर समाचारों, विचारों, टिप्पणियों और सूचनाओं के साथ लोगों की सेवा करना है। प्रेस लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है। यह सार्वजनिक राय को शुद्ध करता है और इसे आकार देता है। संसदीय लोकतंत्र मीडिया की चौकस निगाहों के नीचे ही पनप सकता है। मीडिया न केवल रिपोर्ट करता है बल्कि राज्य और जनता के बीच एक सेतु का काम करता है।

निजी टीवी चैनलों के आगमन के साथ, मीडिया ने जीवन के हर क्षेत्र में मानव जीवन और समाज की बागडोर संभाली है। मीडिया आज चौथे एस्टेट के रूप में संतुष्ट नहीं है, इसने समाज और शासन में सबसे महत्वपूर्ण महत्व ग्रहण किया है। मुखबिर की भूमिका निभाते हुए, मीडिया एक प्रेरक और एक नेता का रूप भी लेता है। मीडिया का ऐसा प्रभाव है कि यह किसी व्यक्ति, संस्था या किसी विचार को बना या बिगाड़ सकता है। इसलिए सभी व्यापक और सर्व-शक्तिशाली आज समाज पर इसका प्रभाव है। इतनी शक्ति और शक्ति के साथ, मीडिया अपने विशेषाधिकारों, कर्तव्यों और दायित्वों की दृष्टि नहीं खो सकता है।

International Press Freedom Day: कलम की मजबूत धार, स्वस्थ लोकतंत्र का आधार

आज पेड न्यूज, मीडिया ट्रायल, गैर-मुद्दों को वास्तविक समाचार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि वास्तविक मुद्दों को दरकिनार किया जा रहा है, वास्तविक और समाज हित के समाचार को नजरअंदाज किया जा रहा है और मुनाफे और राजनीतिक पक्ष के लिए तथ्य विरूपण, फर्जी समाचार, पीत पत्रकारिता की जा रही है पेड न्यूज़ के मामलों में वृद्धि के पीछे भारत में अधिकतर मीडिया समूह कॉरपोरेट के बड़े घरानों वाले हैं जो मात्रा लाभ के लिये इस क्षेत्र में है और लाभ के लिए ही कार्य करते हैं। पत्रकारों की कम सैलरी तथा जल्दी मशहूर होने की चाहत भी पीत पत्रकारिता के पीछे एक कारण है।

आँकड़े ये राज भी खोलते है कि अधिकतर राजनीतिक दलों के कुल बजट का लगभग 40 प्रतिशत मीडिया संबंधी खर्चों में जाया होता है। चुनावों में प्रयुक्त होने वाला धन बल, शराब तथा पेड न्यूज़ की अधिकता आज बेहद गंभीर चिंता का विषय है। भारतीय प्रेस परिषद के अनुसार, ऐसी खबरें जो प्रिंट या इलेक्ट्रॅानिक मीडिया में नकद या अन्य लाभ के बदले में प्रसारित किये जा रहे हों पेड न्यूज़ कहलाते हैं। मगर सांठ-गाँठ कि गुच्छी को खोलकर ये साबित करना अत्यंत कठिन कार्य है कि किसी चैनल पर दिखाई गई विशेष खबर या समाचारपत्र में छपी न्यूज़, पेड न्यूज़ ही है।

वस्तुनिष्ठ पत्रकारिता की अनुपस्थिति एक ऐसे समाज में सत्य की झूठी प्रस्तुति को जन्म देती है जो लोगों की धारणा और विचारों को प्रभावित करती है। जैसा कि कैंब्रिज एनालिटिका मामले में देखा गया था, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पक्षपातपूर्ण समाचार कवरेज ने अमेरिकी चुनावों को प्रभावित किया। सनसनीखेजवाद और उच्च टीआरपी दरों का पीछा करने के लिए जैसा कि भारत में 26/11 के आतंकवादी हमलों के कवरेज में देखा गया था, ने राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को जोखिम में डाल दिया था। सनसनीखेज चालित रिपोर्टिंग ने न्यायालय के दिशानिर्देशों के बावजूद बलात्कार पीड़ितों और बचे लोगों की पहचान से समझौता किया।

पेड न्यूज और फर्जी खबरें जनता की धारणा में हेरफेर कर सकती हैं और समाज के भीतर विभिन्न समुदाय के बीच नफरत, हिंसा, और असहमति पैदा कर सकती हैं। सोशल मीडिया, तकनीकी परिवर्तनों के आगमन के साथ, मीडिया की पहुंच गहराई से बढ़ी है। जनमत को प्रभावित करने में इसकी पहुंच और भूमिका ने पत्रकारिता नैतिकता के प्रवर्तन के लिए अपनी निष्पक्षता, गैर-पक्षपातपूर्ण कॉल को सुनिश्चित करने के लिए इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि मीडिया अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रभावी ढंग से और कुशलता से निभाने के लिए, मीडिया को अपनी स्वतंत्रता और संपादकीय स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए एक अच्छी तरह से परिभाषित आचार संहिता के भीतर काम करना चाहिए। चूंकि गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता प्रतिबंध को आमंत्रित करती है, मीडिया को अपनी स्वतंत्रता को लूटना, पेशेवर आचरण और नैतिक अभ्यास मीडिया की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि मीडिया में निवेशित जनता का विश्वास कायम है।

बदलते दौर में मीडिया संबंधित शिक्षण संस्थानों में ‘नैतिकता’ को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। एक ‘स्वतंत्र जाँच दल’ का गठन किया जाना चाहिये जो पत्रकारिता के निष्पक्ष प्रसारण एवं संवेदनशील सूचनाओं के प्रसारण संबंधी कार्यों पर निगरानी रखे। नियमित अंतराल पर समाजविदों तथा मीडियाकर्मियों की बैठक होनी चाहिये जिससे सब मिलकर सामाजिक समस्याओं से संबंधित समाधान खोज सकें एवं रणनीति बना सकें। मीडिया को राजनीतिक दबाव से मुक्त किया जाना चाहिये साथ ही ‘पत्रकारिता से संबंधित आचार-संहिता’ का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिये।

वर्तमान दौर में खेमों में बंटी पत्रकारिता समाज को गलत दिशा में ले जा रहे है, चौथा खम्भा गिर चुका है। कुछ लोग पत्रकारिता/साहित्य में है क्यूंकि उनको इसकी अपनी स्वार्थ सीधी के लिए जरूरत है। जबकि कुछ लोग इसलिए है कि पत्रकारिता और साहित्य को उनकी जरूरत है, तभी आज समाज बचा हुआ है। ऐसे बहुत से है जो सच और संतुलित लिखने की बजाय सालों से घिस रहे है बस; उनको अपनी प्राथमिक इच्छा के साथ तो न्याय करना चाहिए। बाकी देखा जायेगा, आने वाली पत्रकार पीढ़ी को संतुलित फैसला करके आगे बढ़ना होगा तभी ते स्तम्भ मजबूती से खड़ा होकर तीन अन्यों की बराबरी कर सकता है।

मीडिया ने एक-तरफ जहाँ लोगों की जागरूकता का सशक्त माध्यम है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को देश की समस्याओं से रूबरू भी करवाती है। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने के कारण उससे अपेक्षा रहती है की वह देशहित में अपना सकारात्मक योगदान दे। आज बदलते समय में मीडिया की भूमिका के साथ-साथ उसके रिपोर्टिंग करने का तरीका भी बदल चुका है । समय को देखते हुए मीडिया को अपने स्वार्थपूर्ति के गीत गाने की बजाय तटस्थ वाचडॉग की भूमिका निभानी चाहिये।

Tags: journalismpress freedom dayWorld Press Freedom DayWorld Press Freedom Day 2023
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