• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

कैसे किया जाता है अन्नप्राशन संस्कार, जानें इसका महत्व

Writer D by Writer D
27/02/2026
in धर्म, फैशन/शैली
0
Annaprashan

Annaprashan

15
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

हिंदू धर्म में मनुष्य के पैदा होने से मरण तक 16 संस्कार किए जाते हैं। इन सभी का व्यक्ति के जीवन में विशेष महत्व होता है। हालांकि, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये सभी संस्कार केवल नाम के रह गए हैं। ऐसे में जागरण आध्यात्म की यह कोशिश है कि हम आपको हिंदू धर्म के सभी संस्कारों के बारे में विस्तार से बता पाएं। इन्हीं 16 संस्कारों में से 7वां संस्कार है अन्नप्राशन (Annaprashan)। आइए ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र से जानते हैं इस संस्कार के बारे में। अन्नप्राशन (Annaprashan) वह संस्कार है जब शिशु को पारंपरिक विधियों के साथ पहली बार अनाज खिलाया जाता है। इससे पहले तक शिशु केवल अपनी माता के दूध पर ही निर्भर रहता है। यह संस्कार बेहद महत्वपूर्ण है।

अन्नप्राशन (Annaprashan) संस्कार का महत्व:

अन्नप्राशन (Annaprashan) संस्कृत के शब्द से बना है जिसका अर्थ अनाज का सेवन करने की शुरुआत है। इस दिन शिशु के माता-पिता पूरे विधि-विधान के साथ बच्चे को अन्न खिलाते हैं। कहा गया है अन्नाशनान्यातृगर्भे मलाशालि शद्धयति जिसका अर्थ होता है माता के माता के गर्भ में रहते हुए जातक में मलिन भोजन के जो दोष आ जाते हैं उनका नाश हो जाता है।

जब बालक 6-7 महीने का हो जाता है और पाचनशक्ति प्रबल होने लगती है तब यह संस्कार किया जाता है। शास्त्रों में अन्न को ही जीवन का प्राण बताया गया है। ऐसे में शिशु के लिए इस संस्कार का अधिक महत्व होता है। शिशु को ऐसा अन्न दिया जाना चाहिए जो उसे पचाने में आसानी हो साथ ही भोजन पौष्टिक भी हो।

शुभ मुहूर्त में देवताओं का पूजन करने के पश्चात् माता-पिता समेत घर के बाकी सदस्य सोने या चाँदी की शलाका या चम्मच से निम्नलिखित मन्त्र के जाप से बालक को हविष्यान्न (खीर) आदि चटाते हैं। ये मंत्र शिवौ ते स्तां व्रीहियवावबलासावदोमधौ । एतौ यक्ष्मं वि वाधेते एतौ मुञ्चतो अंहसः॥ है। अर्थात् हे ‘बालक! जौ और चावल तुम्हारे लिये बलदायक तथा पुष्टिकारक हों। क्योंकि ये दोनों वस्तुएं यक्ष्मा-नाशक हैं तथा देवान्न होने से पापनाशक हैं।’

Tags: 16 Sanskar of Hindu DharamAnnaprashana SanskarAnnaprashana SignificanceHow to do AnnaprashanaLifestyle and RelationshipSpiritualityअन्नप्राशन संस्कार
Previous Post

इस दिशा में लगाएं विष्णु प्रिय अपराजिता, घर में आएगी सम्पन्नता

Next Post

भूलकर भी बिस्तर के नीचे न रखें ये सामान, घिर जाएंगे इन परेशानियों से

Writer D

Writer D

Related Posts

Paneer Tikka Roll
Main Slider

घर पर आसानी से बनाये लाजवाब ‘पनीर टिक्का रोल’, झटपट नोट करें इसकी रेसिपी

28/08/2026
Facial
फैशन/शैली

घर पर ही करें फेशियल, मिलेगा पार्लर जैसा निखार

28/08/2026
Rakhi
Main Slider

रक्षाबंधन के बाद राखी कब उतारनी चाहिए? जानिए नियम और परंपरा

28/08/2026
Raksha Bandhan
Main Slider

रक्षाबंधन पर करें ये उपाय, धन से भर जाएगा भाई का घर

28/08/2026
Pets
फैशन/शैली

ऐसे करें अपने पालतू की देखभाल, लापरवाही पड़ सकती है भारी

28/08/2026
Next Post
Broom

भूलकर भी बिस्तर के नीचे न रखें ये सामान, घिर जाएंगे इन परेशानियों से

यह भी पढ़ें

पीएम मोदी PM Modi

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के लिए 1584 करोड़ रुपये की मंजूरी

09/12/2020

थाना मोहाना पर आयोजित हुआ योगाभ्यास

21/06/2025
rangdari

रंगदारी ने देने पर दबंगों ने युवक पर चाकू से किया जानलेवा हमला, लूटपाट का आरोप

09/12/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version