पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानूनी गलियारे से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) गुरुवार को एक अलग अवतार में नजर आईं। ममता बनर्जी वकील का चोगा पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं, जहाँ उन्होंने चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) के मामले में मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल के सामने दलीलें पेश कीं। कानून की डिग्री धारक ममता बनर्जी से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले की न्यायिक कार्यवाही के विभिन्न तकनीकी पहलुओं और निष्पक्षता पर सवाल उठाएंगी। यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने अदालत में पैरवी की है; इससे पहले वे ‘एसआईआर’ (SIR) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी बतौर वकील दलीलें पेश कर चुकी हैं।
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की इस कानूनी सक्रियता के पीछे राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है। चुनाव परिणामों के बाद 9 मई को सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। इस सत्ता परिवर्तन के बीच ममता बनर्जी ने चुनावी शुचिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और उनका दावा है कि बीजेपी ने करीब 100 सीटें “लूट” ली हैं।
ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का वकील के रूप में कोर्ट पहुंचना उनकी राजनीतिक लड़ाई को कानूनी मंच पर ले जाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से अपनी वकालत की डिग्री हासिल की थी और अब वे इसी कानूनी अनुभव का इस्तेमाल चुनाव बाद की हिंसा और धांधली के आरोपों को चुनौती देने के लिए कर रही हैं। जिस याचिका पर वे दलीलें रख रही हैं, वह टीएमसी नेता कल्याण बंदोपाध्याय के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय द्वारा दायर की गई है।
फिलहाल, हाई कोर्ट की इन दलीलों और ममता बनर्जी के कड़े रुख ने राज्य की सियासत और कानूनी हलकों में हलचल पैदा कर दी है।









