मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami) का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के भक्त उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मां दुर्गा शक्ति और साहस का प्रतीक हैं, इसलिए उनकी पूजा करने से भक्तों को जीवन में शक्ति और साहस मिलता है। यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। इस व्रत को रखने घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और सभी प्रकार की परेशानियां दूर होती हैं। मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
कब है मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami)?
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 अप्रैल को रात 8 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगी। वहीं, इस अष्टमी तिथि की समाप्ति 5 अप्रैल को शाम 7 बजकर 26 मिनट पर हो जाएगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि मानी जाती है। इसलिए चैत्र माह की मासिक दुर्गाष्टमी 5 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी।
मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami) की पूजा विधि
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। उसके बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ करें और वहां गंगाजल का छिड़काव करें। फिर पूजा की चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर रखें और देवी का गंगाजल से अभिषेक करें। मां दुर्गा को लाल चुनरी, लाल रंग के फूल, अक्षत और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। देवी को फल और मिठाई का भोग लगाएं। आखिर में, दुर्गा चालीसा का पाठ करें और मां दुर्गा की आरती से पूजा संपन्न करें। व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन फलाहार का सेवन करें।
मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami) का महत्व
मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami) हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन मां दुर्गा को समर्पित होता है और इसमें भक्तजन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। मां दुर्गा शक्ति और साहस की देवी हैं। मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami) का व्रत रखने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत रखने और मां दुर्गा की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार पर देवी की कृपा बनी रहती है। मासिक दुर्गाष्टमी व्रत करने से व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जाओं, शत्रुओं और अनिष्ट शक्तियों से सुरक्षित रहता है। यह व्रत आत्मबल और मानसिक शांति प्रदान करता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है। इसे करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।