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नरेंद्र नारायण यादव बने बिहार विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर, विधायकों को दिलाएंगे शपथ

Narendra Narayan Yadav

Narendra Narayan Yadav

जेडीयू के वरिष्ठ नेता नरेंद्र नारायण यादव (Narendra Narayan Yadav) को बिहार विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। सोमवार को बिहार के आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। प्रोटेम स्पीकर नियुक्त होने के बाद जेडीयू विधायक विधानमंडल के सत्र में विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इसके पहले नंदकिशोर यादव बिहार विधानसभा के अध्यक्ष थे, लेकिन इस बार ना तो बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया और ना ही वो चुनाव लड़े।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में नरेंद्र नारायण यादव (Narendra Narayan Yadav) ने मधेपुरा की आलमनगर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट से वो लगातार 8वीं बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने वीआईपी के नवीन कुमार को 55 हजार 465 वोटों से शिकस्त दी थी। यादव को 1 लाख 38 हजार 401 वोट मिले थे।

नीतीश कुमार के करीबी हैं नरेंद्र नारायण (Narendra Narayan Yadav) 

नरेंद्र नारायण यादव (Narendra Narayan Yadav) की गिनती जेडीयू के सबसे वरिष्ठ नेताओं में होती है।नरेंद्र यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं और वो मंत्री भी रह चुके हैं।सीएम नीतीश की पिछली सरकार में वो डिप्टी स्पीकर का पद संभाल चुके हैं। साल 1995 से वो विधायक हैं। पहले जनता दल से विधायक चुने गए फिर बाद में जेडीयू से विधायक बने। नरेंद्र नारायण राज्य में चुने गए सभी विधायकों को शपथ दिलाएंगे।

क्या होती है प्रोटेम स्पीकर की भूमिका

लोकसभा या विधानसभा के नए कार्यकाल की शुरुआत में प्रोटेम स्पीकर एक अस्थायी अध्यक्ष होता है, जिसे केवल शुरुआती कार्यवाही को संचालित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। उसका मुख्य काम नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना और नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को संचालित करना होता है। प्रोटेम स्पीकर तब तक पद पर रहते हैं जब तक कि विधानसभा का नियमित अध्यक्ष निर्वाचित नहीं हो जाता। स्थायी अध्यक्ष नियुक्त होने तक प्रोटेम स्पीकर की भूमिका अहम मानी जाती है।

शपथ ग्रहण के बाद प्रोटेम स्पीकर ही नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया को संचालित करता है। जैसे ही स्थायी स्पीकर चुन लिया जाता है, प्रोटेम स्पीकर की भूमिका समाप्त हो जाती है। भले ही यह पद अस्थायी हो लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसकी जिम्मेदारियां बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, क्योंकि इसी के जरिए सदन की शुरुआत सुचारू तरीके से आगे बढ़ती है।

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