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भारत की पुरातात्विक संपदा का कोई देश नहीं कर सकता मुकाबला : प्रहलाद पटेल

Writer D by Writer D
12/06/2021
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को कहा कि पूरे विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसकी पुरातात्विक संपदा इतनी समृद्ध है कि दुनिया का कोई भी देश हमसे प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में पुरातत्व के महत्वपूर्ण स्थल हैं।

केन्द्रीय मंत्री उप्र के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ नीलकण्ठ तिवारी के साथ आज राजधानी लखनऊ में भारतीय पुरातत्व विभाग, संस्कृति विभाग एवं पर्यटन विभाग के अन्तर्गत पर्यटन विकास के सभी केन्द्र पोषित कार्यों की समीक्षा बैठक कर रहे थे।

पर्यटन निदेशालय के सभागार में आयोजित बैठक में केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि सरकार द्वारा यूनेस्को को विश्व धरोहर स्थल सूची में रखने के लिए नौ नामांकन भेजे गए थे, जिसमें से छह को यूनेस्को द्वारा अपनी विश्व धरोहर स्थल की सम्भावित सूची में सम्मिलित किया गया है, जिनमें से वाराणसी के घाट भी शामिल हैं। यह गर्व की बात है।

प्रहलाद पटेल ने कहा कि देश की जो पुरातात्विक संपदा चोरी होकर बाहर गई थी, उनमें से 53 वापस अपने देश आई हैं, जिसमें से 40 से ज्यादा 2014 के बाद आई हैं। यह कहीं न कहीं संस्कृति को बचाने, सहेजने और सुरक्षित रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।

नवंबर से पूर्व केन्द्र सहायतित योजनाएं पूर्ण करने के निर्देश

बैठक में केन्द्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि पर्यटन विभाग द्वारा जो भी केन्द्र सहायतित योजनाएं चल रही हैं, उन्हें नवंबर माह से पूर्व पूर्ण कर लें। उन्होंने कहा कि कार्य मानक के अनुरूप एवं गुणवत्तापरक होना चाहिए।

बैठक में पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार से वित्त पोषण हेतु उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा नवीन योजनाओं का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। नवीन योजनाओं का विवरण उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों के महत्व को दृष्टिगत रखते हुए किया गया।

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इन योजनाओं से लाखों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकेंगे, जिससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर का उन्नयन हो सकेगा। इसके साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को विश्व स्तरीय पर्यटक सुविधायें प्राप्त हो सकेंगी और उनका पर्यटन-अनुभव बेहतर हो सकेगा।

नवीन योजनाओं में प्रमुखतः स्वदेश दर्शन स्कीम के स्पिरीचुअल सर्किट में गंगा सर्किट के रूप में एक नए सर्किट को भी सम्मिलित किए जाने हेतु प्रस्तावित किया गया। गंगा सर्किट का विकास कार्य कराना आवश्यक है, क्योंकि मां गंगा नदी के तट पर अनेकानेक पवित्र तीर्थ स्थल स्थित है, जोकि पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

वर्तमान में गंगा नदी के तट पर पड़ने वाले ऐसे समस्त महत्वपूर्ण एवं पवित्र स्थलों को चिन्हित करते हुए गंगा सर्किट के रूप में एक नए पर्यटन परिपथ का विकास किया जाना प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत  100 करोड़ रुपये है। इन प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर लाखों की संख्या में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं का आवागमन वर्ष-पर्यन्त होता रहता है।

गंगा सर्किट के विकास से न केवल इन प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का सुनियोजित ढंग से विकास हो सकेगा, बल्कि इस क्षेत्र में जल मार्ग के माध्यम से नौका विहार, वाटर स्पोर्ट्स एवं वाटर ट्रान्सपोर्टेशन का भी लाभ प्राप्त होगा।

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उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या पर्यटन के दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। पर्यटन विभाग द्वारा अयोध्या का समेकित विकास किया जा रहा है, जिससे वहां पधारने वाले पर्यटकों व श्रृद्धालुओं को हर सम्भव सुविधा प्राप्त हो सके। स्वदेश दर्शन स्कीम के अन्तर्गत अयोध्या में नवीन योजना प्रस्तावित की गई है, जिसमें सरयू नदी के नौ किमी घाटों का निर्माण, पर्यटकों हेतु मूलभूत सुविधाओं का विकास आदि कार्य प्रमुख है। इस परियोजना से अयोध्या में आने वाले तीर्थ यात्रियों की यात्रा सुगम्य हो सकेगी। इस योजना हेतु अनुमानित लागत 298.84 करोड़ रुपये है।

ये हैं केन्द्र सहायतित प्रमुख परियोजनाएं

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार से वित्त पोषण हेतु नवीन योजनाओं में स्वदेश दर्शन स्कीम में बुद्धिस्ट सर्किट के अन्तर्गत कौशाम्बी एवं संकिसा का पर्यटन विकास, स्पिरीचुअल सर्किट के अन्तर्गत गंगा सर्किट, नैमिषारण्य, मिश्रिख का पर्यटन विकास, हेरिटेज सर्किट के अन्तर्गत क्रान्ति पथ (सन् 1857),  हस्तिनापुर (द्रौपदेश्वर, पाण्डेश्वर महादेव, द्रौपदी घाट), ईको-टूरिज्म सर्किट के अन्तर्गत मीरजापुर, चुनार, सीतामढ़ी, सोनभद्र (आंकाक्षी जनपद) तथा बुन्दलेखण्ड सर्किट का पर्यटन विकास कराया जाना प्रस्तावित है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 497.99 करोड़ रुपये है।

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के स्वदेश दर्शन स्कीम के अन्तर्गत कुल आठ परिपथ की योजनाएं संचालित की जा रही है, जिसमें रामायण सर्किट-1 (श्रृंगवेरपुर एवं चित्रकूट), रामायण सर्किट-2 (अयोध्या), बुद्धिस्ट सर्किट (कुशीनगर, कपिलवस्तु एवं श्रावस्ती), स्पिरीचुअल सर्किट-1 (34 स्थलों का पर्यटन विकास), स्पिरीचुअल सर्किट-2 (44 स्थलों का पर्यटन विकास), हेरिटेज सर्किट (07 स्थलों का पर्यटन विकास), स्पिरीचुअल सर्किट-3 (18 स्थलों का पर्यटन विकास), स्पिरीचुअल सर्किट-4 (03 स्थलों का पर्यटन विकास) कार्य सम्मिलित है।

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के प्रासाद स्कीम के अन्तर्गत वाराणसी एवं मथुरा की कुल छह योजनाएं स्वीकृत करायी गई, जिसमें से वर्तमान में वाराणसी फेज-1, टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेन्टर-वृन्दावन तथा मथुरा के चार कुण्डों का पर्यटन विकास कार्य पूर्ण कर लिए गए है तथा शेष तीन कार्य यथा- गोवर्धन का पर्यटन विकास, वाराणसी फेज-2 एवं क्रूज बोट का कार्य प्रगति पर है।

केन्द्रीय पर्यटन मंत्री द्वारा प्रसाद एवं स्वदेश दर्शन स्कीम के अन्तर्गत नवीन योजनाओं के प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर अनुमोदन प्रदान किए जाने हेतु आश्वासन दिया गया। उन्होंने भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को श्रावस्ती स्थित संरक्षित धरोहरों से संबंधित रिपोर्ट सात दिन के अन्दर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। साथ ही उत्तर प्रदेश के सभी संरक्षित स्थलों के आस-पास तत्कालिक रूप से कराये जाने वाले जनोपयोगी कार्यो की सूची मांगी गई।

बैठक में मुकेश कुमार मेश्राम (प्रमुख सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन एवं संस्कृति विभाग), शिवपाल सिंह (विशेष सचिव पर्यटन) तथा अविनाश चन्द्र मिश्र (संयुक्त निदेशक पर्यटन) एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उप्र में पर्यटन के विकास के लिए केन्द्र देगा पूरा सहयोसमीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, इसमें से कई योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, शेष नवंबर तक पूर्ण कर ली जाएंगी।

इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन के विकास के लिए जो भी प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जाएंगे उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के पूर्व भारत सरकार द्वारा 75 सप्ताह तक के कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी सप्ताह में एक कार्यक्रम शहीदों के सम्मान के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव का आंदोलन निश्चित रूप से अपने मुकाम तक पहुंचेगा।

Tags: prahlad patelup news
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