नई दिल्ली। 200 साल पहले जर्मन वैज्ञानिक कार्ल वुंडरलीज ने शरीर के मानक तापमान को 98.6 डिग्री तय किया था, तब से अगर तापमान इससे ऊपर जाता है तो हम समझते हैं कि व्यक्ति को बुखार है, लेकिन समय के साथ शरीर का तापमान अपना पैटर्न बदल रहा है। डॉक्टर से लेकर आम लोग तक थर्मामीटर के सहारे तापमान मापते हैं और इससे ऊपर के तापमान को तबीयत खराब मानते हैं। 2017 से ब्रिटेन में 35 हजार लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि इनका तापमान मानक से कम औसत 97.9 डिग्री था जबकि अमेरिका के लोगों का औसत तापमान 97.5 डिग्री फारेनहाइड था।
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गुरवेन बताते हैं कि पिछले दो दशक से भी कम समय में शरीर क तापमान में हम उतनी ही गिरावट देख रहे हैं जितनी अमेरिका में पिछले दो सौ साल में देखने को मिली है। अध्ययन में तापमान को मापने के लिए कई कारकों पर ध्यान रखा गया। अगर किसी इंफेक्शन की वजह से तापमान में गिरावट नहीं आ रही थी या बढ़ रही थी, तो ऐसे मामले अध्ययन से हटा दिए गए। गुरवेन ने बताया कि अमेरिका में शरीर के सामान्य तापमान में गिरावट गृह युद्ध के समय से दर्ज की गई थी, लेकिन सिर्फ एक मामले से हम यह नहीं कह सकते कि इसका प्रमुख कारण क्या है।








