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कितने दिन के बाद बदलना चाहिए कलावा, जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Writer D by Writer D
03/05/2026
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
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kalava

kalava

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हिंदू धर्म में कलावा (मौली) (Kalava) का विशेष महत्व होता है। इसे कलाई पर बांधना शुभता, सुरक्षा और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ, यज्ञ या किसी भी मांगलिक कार्य के दौरान पंडित द्वारा कलावा बांधा जाता है। कलावा लाल, पीले या केसरिया रंग का धागा होता है, जिसे विशेष मंत्रों के साथ कलाई पर बांधा जाता है। इसे रक्षा सूत्र भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से बचाता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर कलावा को 21 दिन बाद ही क्यों बदलना चाहिए? इसके पीछे गहरी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

संकल्प की अवधि और ऊर्जा का कनेक्शन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब हम कलावा (Kalava) बांधते हैं, तो वह एक विशेष संकल्प या पूजा की ऊर्जा से जुड़ा होता है। शास्त्रों के जानकारों का मानना है कि किसी भी धागे में मंत्रों और सकारात्मक ऊर्जा को संजोए रखने की एक निश्चित क्षमता होती है। 21 दिन की अवधि को एक मंडल के रूप में देखा जाता है, जिसके बाद उस धागे की आध्यात्मिक ऊर्जा धीरे-धीरे कम होने लगती है।

ग्रहों की स्थिति और नकारात्मकता

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कलाई पर बंधा कलावा शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करता है। लेकिन यदि 21 दिन के बाद कलावा पुराना होकर गंदा या फीका पड़ जाए, तो यह सकारात्मक ऊर्जा के बजाय नकारात्मकता को आकर्षित करने लगता है। इसलिए, शुभता बनाए रखने के लिए इसे बदलकर नया कलावा धारण करना श्रेष्ठ माना गया है।

कलावा (Kalava) बदलने का सही तरीका और दिन

अगर आप 21 दिन बाद या कलावा पुराना होने पर उसे बदल रहे हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें।

शुभ दिन: कलावा बदलने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे उपयुक्त माना जाता है।

पुराने कलावे का क्या करें? पुराने या टूटे हुए कलावे को कभी भी कचरे में न फेंकें। इसे किसी पीपल के पेड़ की जड़ में रख दें या किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें।

Tags: Kalava
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