लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि इंडाे चाइना स्टैंड आफ के दौरान भारतीय सेना ने करिश्मायी काम किया है, जिससे न सिर्फ पूरे देश का हौंसला बढ़ा है। बल्कि देश का मस्तक ऊंचा हुआ है।
श्री सिंह ने यहां 435 करोड़ की लागत से बनने वाले न्यू कमांड हास्पिटल का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। इस मौके पर थल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे।
आज लखनऊ में मध्य कमान के नए सेना अस्पताल के भूमि पूजन समारोह में सम्मिलित हुआ। लगभग ९०० बेड क्षमता वाला यह अस्पताल एक ‘सुपर स्पेशियलिटी’ अस्पताल होगा। इसके बन जाने से सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारजनों को बेहतर इलाज की सुविधा लखनऊ में ही मिल सकेगी। pic.twitter.com/NJktprNDkj
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 16, 2021
उन्होंने कहा कि बीता साल बाधाओं का साल था, जबकि नया साल समाधान का साल साबित होगा। पिछला साल निराशा से भरा था। जबकि यह साल उत्साह का संचार करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की यात्रा पर निकल पड़ा है। नया कमांड अस्पताल उस यात्रा की एक कड़ी है। करीब 17 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाला यह अस्पताल 788 बिस्तरों का होगा जिसमें 100 इमरजेंसी बेड अलग से होंगे। छह हजार जवान और उनके परिवारों के अलावा सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को अस्पताल से फायदा मिलेगा। न्यू कमांड हॉस्पिटल में नर्सिंग और डेंटल के चिकित्सक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। यह अस्पताल तीन से चार साल में बनकर तैयार हो जायेगा।
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लखनऊ के सांसद ने कहा कि पिछले 20 सालों से न्यू कमांड अस्पताल की जरूरत समझी जाने लगी थी, लेकिन किसी न किसी वजह से इसका निर्माण कार्य टलता जा रहा था। कभी प्रोसीजर डिले तो कभी बजट की दिक्कतें सामने आ रही थी, लेकिन अब सभी बाधाएं दूर कर ली गई हैं। पर्यावरण के लिहाज से यहां लगे वृक्षों को काटने की बजाय रिलोकेट किया जा रहा है।
उन्होने कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन का काम आज देश भर में शुरू हो गया है। देश के वैज्ञानिकों ने दो स्वदेशी वैक्सीन बना ली है ,जबकि चार वैक्सीन और आने वाली है। इससे न सिर्फ देश में वैक्सीनेशन में मदद मिलेगी, बल्कि अन्य देशों में वैक्सीन का निर्यात बढ़ाया जा सकेगा। भारत की परंपरा रही है कि हम न सिर्फ अपना ध्यान रखते है बल्कि पूरे विश्व को भी परिवार मानकर उसकी मदद को तैयार रहते हैं। वसुधैव कुटुंबकम की सोच हमारे ऋषि मुनियों की दी है, जिसका निर्वहन हम आज भी कर रहे हैं।
