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आरके श्रीवास्तव ने UPSC में सफलता पाने वाले अमन आकाश को बताया रियल हीरो

RK Srivastava, aman akash

बिहार के चर्चित शिक्षकों में शुमार आरके श्रीवास्तव (RK Srivastava ) ने UPSC में सफलता पाने वाले अमन आकाश (Aman Akash) को बताया रियल हीरो, उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा है और रोहतास के अमन आकाश के बचपन की यादों का जिक्र किए हैं। उन्होंने बताया है कि बिक्रमगंज के रहने वाले वैसे सभी लोगों को पहले से ही मालूम था कि अमन का ड्रीम यूपीएससी क्रैक करना है, क्योंकि वह बचपन से ही यूपीएससी में सफलता पाकर देश की सेवा करने का जिक्र करते रहता था।

आखिर आरके श्रीवास्तव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा आप भी पढ़ें:

जब किसी विद्यार्थी को बचपन में आप को पढ़ाने का दायित्व कभी मिला हो और सबसे बड़ी बात है कि वह आपके मोहल्ले का रहने वाला छोटे भाई समान हो, और जब पता चले कि वह UPSC में 360 वां रैंक लाया है तो काफी गर्व होता है और ऐसे विद्यार्थी से सीखने को मिलता है की धैर्य रखकर मेहनत करने पर सफलता एक दिन जरूर मिलता है। आज उनके पिताजी कमलेश चौधरी तो इस दुनिया में नहीं है लेकिन वह आज जहां भी होंगे तो काफी प्रसन्न होंगे और  उनको अपने बेटे पर काफी गर्व होगा। अमन आपने तो बिक्रमगंज रोहतास के अलावा उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत है जो छोटे जगह से होकर भी बड़े सपने देखते हैं। आप रियल हीरो हो, आपकी मां को मेरा प्रणाम जो आप जैसे होनहार और संस्कारी बच्चे की सफलता में उनका अहम रोल रहा, बिक्रमगंज के आपके प्रारंभिक शिक्षा का स्कूल गांधी शिक्षा निकेतन के सभी गुरुओं को भी मेरा सलाम। आज भी हमें याद है कि बचपन से ही आपका एक ही लक्ष्य था UPSC, भले आपने NDA भी क्वालीफाई किया, फिर उसे छोड़कर आप बैंक में मैनेजर बन गए लेकिन अंत में आपने अपना लक्ष्य पा ही लिया। ऐसे रियल हीरो को सलाम है।

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इस पोस्ट के माध्यम से आरके श्रीवास्तव (RK Srivastava ) ने अमन की सफलता में उनके पेरेंट्स का भी जिक्र किया है, अमन के पिताजी तो अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन वह जहां भी होंगे अपने बेटे पर उनको नाज होगा।

आज आरके श्रीवास्तव (RK Srivastava ) ने अमन के माता जी को उसकी सफलता पर उन्हें ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं दिए, आपको बताते चले की रोहतास जिले के अमन आकाश ने यूपीएससी में 360वां रैंक प्राप्त किया है। अपने 6ठे प्रयास में यह सफलता पाई है। लगातार प्रयास और धैर्य से अमन ने यह सफलता पाई है। अमन ने बताया कि पहले चार प्रयास में उनका ऑपश्नल विषय गणित था, परंतु अंतिम दो प्रयास में उन्होंने समाज विज्ञान सोशियोलॉजी को अपना ऑपश्नल बनाया और सफलता पाई है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बिक्रमगंज के गांधी शिक्षा निकेतन स्कूल से हुई थी। अमन ने 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा सैनिक स्कूल से पास की है। स्नातक दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। वो फिलहाल एमपी में एसबीआई बैंक मैनेजर पद पर कार्यरत हैं। उनका लक्ष्य सदा से यूपीएससी रहा था और छठवें प्रयास में उन्होंने सफलता प्राप्त की है। अमन कहते हैं कि यूपीएसी परीक्षा के लिए कंसिस्टेंसी एवं धैर्य जरूरी है। पांच बार असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने सफलता प्राप्त की।

कौन है आरके श्रीवास्तव (RK Srivastava ) जिसने अमन आकाश को बताया रियल हीरो: वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके बिहार के आर के श्रीवास्तव,

1 रुपए से कैसे चलता है इनका परिवार?

बहुत से लोगों में मन में सवाल आता होगा कि ​​​​​​शिक्षक श्रीवास्तव का परिवार और जीवनयापन उस 1 रुपए में कैसे चलता है।

जब मीडिया ने उनसे बातचीत की और इस बारे में जाना तो शिक्षक ने बताया कि पॉपुलरिटी मिलने के बाद देश के अलग-अलग संस्थाएं गेस्ट फैकेल्टी के रूप में अपने संस्था में पढ़ाने के लिए बुलाते हैं और उनसे अच्छे खासे हमें इनकम हो जाते हैं, और उसी इनकम से वे गरीब बच्चों को 1 रुपए में पढ़ाने के साथ देश भर के सम्मानित संस्थाओं में भी गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ाते हैं। उसी से उन्हें पैसे मिलते हैं।

उन्होंने बताया कि वो देहरादून में मेधा क्लास, इंडियन पब्लिक स्कूल, गया के मगध सुपर 30, आरके सिन्हा के अवसर ट्रस्ट और हरियाणा के कौटिल्य कैंपस में भी पढ़ाते हैं।

एक रुपया गुरु दक्षिणा लेकर इंजीनियर बनाते हैं आरके श्रीवास्तव

 

हमने सोचा भी नहीं था कि एकदिन गांव की दहलीज से निकलकर कोई देश-दुनिया के लिए खुद एक संदेश बन जाएगा। लेकिन ऐसा अक्सर देखा जाता है कि जो अभाव में रहते हैं वही दुनिया के मानचित्र पर अपनी विद्वता के बूते कृति खींचने में कामयाब साबित होते हैं। ऐसे ही एक आम लड़के या यों कहें एक मध्यम वर्गीय परिवार से गणितज्ञ बनने का सफर तय किया जो आगे चलकर एक इतिहास पुरुष बन जाएंगे ये किसे पता था। पर, ऐसा ही हुआ युवा गणितज्ञ आर के श्रीवास्तव के साथ। कल तक जो गांव की पगडंडियों तक सिमटे हुए थे वो एकदिन दुनिया के मानचित्र पर छा जाएंगे ये किसी को पता नहीं था।

हम बात कर रहे हैं बिहार के रोहतास जिले के बिक्रमगंज के रहने वाले आर के श्रीवास्तव की, जो खुद मुफलिसी में जिंदगी को गुजारते हुए गरीब और असहाय स्टूडेंट्स को 1 रूपया गुरु दक्षिणा लेकर इंजीनियर बना रहे हैं। आर के श्रीवास्तव अबतक 540 स्टूडेंट्स को बना चुके है इंजीनियर और यह कारवां निरंतर जारी है।

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जिंदगी के कई पहलुओं को बहुत करीब से आरके श्रीवास्तव को देखने का मौका मिला है। इन्होंने अपने जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। मगर किसी भी परिस्थिति से हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर चलते हुए एक दिन अपने मुकाम को पाने में कामयाब हुए। राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके  दरअसल इनके घर की माली हालत बहुत बूरी थी। बाल्यावस्था में ही इनके पिता का निधन हो गया। बड़े भाई ने घर की जिम्मेदारी संभाल ली, तब आरके बहुत छोटे थे। घर कि स्थिति में थोड़ी सुधार होने लगी। मगर आरके ने अपनी पढ़ाई के आगे कभी हार नहीं मानी। जिस क्लास में पढ़ते थे उसी क्लास के लड़कों को मैथेमैटिक्स पढ़ाने लगे। जब आमदनी होने लगी तो परिवार चलाने में सपोर्टिव साबित हुई।

मगर क्या बताउं होनी को कुछ और ही मंजूर था। जब घर की जिम्मेदारी पटरी पर लौटने लगी तो आरके श्रीवास्तव के बड़े भाई का असमय निधन हो गया। घर पर विपत्ति का पहाड़ टूट गया। सारी उम्मीदों पर पल में पानी फिर गया। बिखरते परिवार पर जब नजर पड़ी आरके की तो उन्होंने हिम्मत बांधते हुए घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर आगे निकल पड़े। इस बूरे दौर में उनकी पढ़ाई ही इनके लिए वरदान साबित हुई। यहां से आरके श्रीवास्तव उभरकर निकले मैथेमैटिक्स गुरु के रुप में।…

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