हिंदू धर्म के मुताबिक शनिवार को कर्म फल दाता शनि देव की पूजा करनी चाहिए. शनि देव की उपासना करने से शनैश्चर देव प्रसन्न होते हैं. आज शनिवार को शनिदेव की आराधना करने के लिए सुबह उठकर, घर के मंदिर पर गंगा जल छिड़क कर शनिदेव को ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करना चाहिए. आप आज के दिन शनि देव के 108 मंत्रों का जाप भी करें.
शनि देव के 108 नाम
घन
सौम्य
शरण्य
सर्वाभीष्टप्रदायिन्
सुरवन्द्य
शनैश्चर
सुरलोकविहारिण्
सुखासनोपविष्ट
सुंदर
शांत
घनरूप
घनाभरणधारिण्
घनसारविलेप
खद्योत
मन्द
वरेण्य
सर्वेश
मन्दचेष्ट
महनीयगुणात्मन्
मर्त्यपावनपद
महेश
छायापुत्र
शर्व
शततूणीरधारिण्
चरस्थिरस्वभाव
अचञ्चल
नीलवर्ण
नित्य
नीलाञ्जननिभ
नीलाम्बरविभूशण
निश्चल
वेद्य
विधिरूप
विरोधाधारभूमी
भेदास्पदस्वभाव
वज्रदेह
वैराग्यद
वीर
वीतरोगभय
विपत्परम्परेश
विश्ववन्द्य
गृध्नवाह
गूढ
कूर्माङ्ग
कुरूपिण्
कुत्सित
गुणाढ्य
गोचर
आयुष्यकारण
आपदुद्धर्त्र
विष्णुभक्त
वशिन्
अविद्यामूलनाश
विद्याविद्यास्वरूपिण्
विविधागमवेदिन्
विधिस्तुत्य
वन्द्य
विरूपाक्ष
वरिष्ठ
गरिष्ठ
वज्राङ्कुशधर
वरदाभयहस्त
वामन
ज्येष्ठापत्नीसमेत
श्रेष्ठ
मितभाषिण्
कष्टौघनाशकर्त्र
पुष्टिद
स्तुत्य
स्तोत्रगम्य
भक्तिवश्य
अशेषजनवन्द्य
विशेषफलदायिन्
भानु
भानुपुत्र
भव्य
पावन
धनुर्मण्डलसंस्था
धनदा
धनुष्मत्
तनुप्रकाशदेह
तामस
वशीकृतजनेश
पशूनां पति
खेचर
घननीलाम्बर
काठिन्यमानस
आर्यगणस्तुत्य
नीलच्छत्र
नित्य
निर्गुण
गुणात्मन्
निन्द्य
वन्दनीय
धीर
दिव्यदेह
दीनार्तिहरण
क्रूर
क्रूरचेष्ट
दैन्यनाशकराय
आर्यजनगण्य
कामक्रोधकर
कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारण
परिपोषितभक्त
परभीतिहर
भक्तसंघमनोऽभीष्टफलद
निरामय
शनि
शनि देव के मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
शनि महामंत्र
ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
शनि देव की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।