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शिमला में सरदार पटेल पर वैश्विक मंथन, उपराष्ट्रपति करेंगे शुभारंभ

शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में 10 से 12 जुलाई तक सरदार पटेल की दृष्टि एकीकरण, एकात्मता और संघवाद विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसका उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे।…

24GhanteOnline
July 7, 2026
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शिमला में सरदार पटेल पर वैश्विक मंथन, उपराष्ट्रपति करेंगे शुभारंभ

 शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में 10 से 12 जुलाई तक सरदार पटेल की दृष्टि एकीकरण, एकात्मता और संघवाद विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसका उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे। उपराष्ट्रपति ‘वंदे मातरम्: एक यात्रा’ प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने अद्वितीय नेतृत्व, दूरदर्शिता और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के बल पर 560 से अधिक देशी रियासतों का शांतिपूर्ण एकीकरण कर आधुनिक लोकतांत्रिक भारत की आधारशिला रखी थी।

यह संगोष्ठी उनकी संवैधानिक दृष्टि, प्रशासनिक दर्शन, सहकारी संघवाद की अवधारणा तथा समकालीन राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता का अकादमिक विश्लेषण करने का प्रयास करेगी।

संगोष्ठी में सरदार पटेल को केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि समकालीन सार्वजनिक नीति और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत जीवंत वैचारिक परंपरा के रूप में समझने का प्रयास किया जाएगा। इसमें सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण के दर्शन, देशी रियासतों के विलय, केंद्र-राज्य संबंधों, समकालीन भारतीय संघवाद, प्रशासनिक तंत्र, नौकरशाही, राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीतिक नेतृत्व, क्षेत्रीय असमानताओं, संवैधानिक विकास तथा विविधता में एकता को सुदृढ़ करने में उनके विचारों की निरंतर प्रासंगिकता जैसे विषयों पर चर्चा होगी। संघवाद एवं राष्ट्र निर्माण के वैश्विक अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन भी इस विमर्श का हिस्सा होगा।

रियासतों के एकीकरण पर विशेष सत्र

संगोष्ठी के अन्य प्रमुख आकर्षणों में हैदराबाद, कश्मीर, पंजाब की पहाड़ी रियासतों और ओडिशा की रियासतों के एकीकरण पर विशेष सत्र, भारतीय सिविल सेवा के निर्माण में सरदार पटेल की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं प्रशासनिक सुधार, महात्मा गांधी एवं श्री अरविंद के साथ उनके वैचारिक संबंध, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण, राजकोषीय संघवाद, संवैधानिक विकास, अभिलेखीय विरासत, राष्ट्र निर्माण तथा समकालीन संघीय लोकतंत्रों के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर गहन विमर्श शामिल हैं।

प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वान भाग लेंगे

इन सत्रों में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, सिक्किम विश्वविद्यालय, हीडलबर्ग विश्वविद्यालय, शानी स्टेट यूनिवर्सिटी (अमेरिका), सोफिया विश्वविद्यालय तथा देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के विद्वान भाग लेंगे। इनमें ‘वंदे मातरम्: एक यात्रा’ पर आधारित काफी टेबल बुक शीर्षक संगोष्ठी कार्यवाही और डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को समर्पित बहुभाषी कविता संग्रह शामिल हैं।

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