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हरेला केवल पर्व नहीं, प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन है: मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने गुरुवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने…

24GhanteOnline
July 16, 2026
3 min read
हरेला केवल पर्व नहीं, प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन है: मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने गुरुवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता से जुड़ा जनआंदोलन है, जो उत्तराखंड की पहचान को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला उत्तराखंड की लोक परंपराओं का ऐसा महापर्व है, जो समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व में सहभागी बन रहा है, जो उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और “विविधता में एकता” की भावना का जीवंत उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पहचान देने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके गीतों ने उत्तराखंड की संस्कृति, लोकजीवन, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में उत्तराखंड का हरेला पर्व प्रकृति संरक्षण का वैश्विक संदेश देता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने इस वर्ष हरेला के अवसर पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है और सरकार विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माता के सम्मान में एक पौधा लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में इस अभियान के तहत दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से अब तक लगभग 1.15 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक कलाकारों, शिल्पकारों, बुनकरों, हस्तशिल्प विशेषज्ञों और पारंपरिक व्यंजनों से जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहन देने का भी प्रभावी माध्यम है। स्थानीय उत्पादों की खरीद से जहां हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलती है, वहीं उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी होता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने परिवार के साथ लोक संवर्धन पर्व में सहभागी बनने और उत्तराखंड की लोक कला, संस्कृति तथा परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, लोक कलाकार, शिल्पकार, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा और आमजन उपस्थित रहे।

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