24 घण्टे ऑनलाइन

गर्मी में रामलाल के श्रृंगार में हुआ बदलाव, भोग में भी किया गया परिवर्तन

अयोध्या के राम मंदिर में रामलला (Ramlala) का श्रृंगार गर्मी के मौसम के अनुसार बदल गया है। रेशमी वस्त्र, हल्के चांदी के आभूषण और मौसमी फल-भोग अब उन्हें अर्पित किए जा रहे हैं। यह परिवर्तन वैदिक परंपरा का पालन करते हुए,…

24GhanteOnline
April 18, 2025
3 min read

अयोध्या के राम मंदिर में रामलला (Ramlala) का श्रृंगार गर्मी के मौसम के अनुसार बदल गया है। रेशमी वस्त्र, हल्के चांदी के आभूषण और मौसमी फल-भोग अब उन्हें अर्पित किए जा रहे हैं। यह परिवर्तन वैदिक परंपरा का पालन करते हुए, भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए किया गया है। भक्तों के लिए यह एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव है जो प्रभु की कृपा और प्रकृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है।

रामनवमी पर्व पर मंदिर प्रशासन ने भगवान के श्रृंगार और भोग में कई बदलाव किए थे। अब रामलला (Ramlala) को गर्मी के मद्देनजर रेशमी वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं, जो हल्के मुलायम और मौसम के अनुरूप हैं। साथ ही भगवान को भारी स्वर्ण आभूषणों की जगह अब हल्के चांदी व रत्नजड़ित अलंकरण पहनाए जा रहे हैं। यह बदलाव केवल श्रृंगार तक सीमित नहीं बल्कि भगवान के मुकुट, कुंडल, कंठहार और अंगवस्त्र सभी ग्रीष्म ऋतु के अनुसार बदले जा रहे हैं।

वैदिक परंपरा के अनुरूप किया परिवर्तन


मंदिर के पुजारियों और श्रृंगार समिति के अनुसार, यह परिवर्तन विशुद्ध वैदिक परंपरा के अनुरूप है, जिसमें भगवान की सेवा प्रकृति और ऋतु के अनुरूप की जाती है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि गर्मियों में भगवान को पूर्ण शीतलता मिले। इसके लिए विशेष खादी और रेशम के वस्त्रों का चयन किया गया है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। फूलों की मालाओं में अब गुलाब, बेला और चंपा जैसे शीतल प्रभाव वाले फूलों का उपयोग हो रहा है।

भगवान (Ramlala) के भोग में भी हुआ बदलाव


गर्मी के मौसम को देखते हुए भगवान (Ramlala) के भोग में भी परिवर्तन किया गया है। ठंडक प्रदान करने वाले मौसमी फलों, खीर, रबड़ी, मिश्री-पानी और गुलकंद आदि को शामिल किया जा रहा है, ताकि भगवान की सेवा हर प्रकार से शुद्ध और सौम्य हो। रामलला का यह ग्रीष्म श्रृंगार भक्तों के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। दर्शन को आने वाले श्रद्धालु इस नवीन रूप में भगवान को देखकर भावविभोर हो रहे हैं।

भक्त हो रहे भाव विभोर


भक्तों को हर सुबह जब रेशमी पीले वस्त्रों में सजे रामलला (Ramlala) के दर्शन होते हैं, तो लगता है जैसे प्रभु स्वयं धरा पर अवतरित हो गए हों। इस श्रृंगार के माध्यम से सिर्फ भगवान की सेवा नहीं, बल्कि भक्तों की भावनाओं का भी सम्मान किया जा रहा है। यह पहल न केवल भक्ति की परंपरा को मजबूत करती है, बल्कि यह भी बताती है कि रामलला सिर्फ मंदिर में नहीं, हर ऋतु और हर भाव में जीवित हैं।

इस खबर को लाइक और शेयर करें

Comments (0)

0/2000 characters

Facebook टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए Facebook में लॉगिन करें

टिप्पणियां अक्षम हैं। व्यवस्थापक से संपर्क करें।

सम्बंधित ख़बरें

अयोध्या के दीपोत्सव से जुड़ेगा पूरा विश्व, डिजिटल माध्यम से जलेंगे एक लाख दीप

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का दीपोत्सव भारतीय संस्कृति और आस्था के वैश्विक उत्सव के रूप में अपनी पहचान को और व्यापक बना रहा है। दीपोत्सव-2026 के दसवें संस्करण में योगी सरकार ने पावन सरयू नदी…

दीपोत्सव का दशक: दक्षता एवं प्रबंधन का बेमिसाल संगम

- हरि शंकर मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या में मनाए जाने वाले दीपोत्सव के दशक का दृश्यचित्र मन में देखें। सरयू के तट पर संध्या का सिंदूरी रंग गहराएगा और घाट-दर-घाट लाखों बातियां एक साथ झिलमिलाएंगी और तब अयोध्या एक जीवंत…

UP Rise 2026: युवाओं को 'जॉब सीकर' से 'जॉब क्रिएटर' बना रही योगी सरकार

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर यूपी' विजन को धरातल पर उतारने और युवाओं को उद्यमिता के प्रति प्रेरित करने के लिए बुधवार को राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में 'यूपी राइज 2026'…

योगी सरकार के दीपोत्सव में बनेगा नया रिकॉर्ड, रामनगरी में जलेंगे 30 लाख दीप

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव-2026 को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में इस बार 30 लाख से अधिक दीप सजाने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन को सफल…