सरकारी कर्मचारियों के लोन-एडवांस पर सख्ती, हरियाणा में 24 जानकारियां अनिवार्य
चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को अब ऋण या अग्रिम राशि के लिए अपने विभाग को 24 तरह की जानकारियां देनी पड़ेंगी। वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए वित्त विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। किसी कर्मचारी द्वारा…

चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को अब ऋण या अग्रिम राशि के लिए अपने विभाग को 24 तरह की जानकारियां देनी पड़ेंगी। वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए वित्त विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। किसी कर्मचारी द्वारा अधूरी जानकारी देने के बावजूद ऋण या अग्रिम राशि जारी हुई तो स्वीकृति देने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
वित्त विभाग के पास बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची हैं कि कई सरकारी विभागों द्वारा कर्मचारियों को विभागीय ऋण/एडवांस स्वीकृत करते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्वीकृति आदेश में जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) के स्तर पर कर्मचारियों के ऋण का रिकार्ड बनाए रखने में परेशानी हो रही है।
इसे गंभीरता से लेते हुए वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, उपायुक्तों, एसडीएम और जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों के लोन/एडवांस के स्वीकृति आदेश में निर्धारित 24 प्रकार की जानकारियां अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएं।
देनी होगी ये जानकारी
प्रत्येक ऋण/एडवांस की स्वीकृति के आदेश में कर्मचारी का नाम, पिता/पति का नाम, पदनाम, पे लेवल/यूनिक कोड, जीपीएफ नंबर अथवा यूएएन नंबर तथा स्थायी पता दर्ज करना होगा। इसके अलावा कर्मचारी का मोबाइल नंबर, नियुक्ति की तारीख, सेवानिवृत्ति की तारीख और बेसिक-पे के बारे में भी बताना होगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कर्मचारी को किस प्रकार का एडवांस दिया जा रहा है, जैसे हाउस बिल्डिंग एडवांस (एचबीए), वाहन, साइकिल, कंप्यूटर अथवा मैरिज एडवांस। यदि संबंधित एडवांस किस्तों में दिया जा रहा है तो अब तक कितनी किस्तें जारी की गई हैं और वर्तमान में कौन सी किस्त स्वीकृत की जा रही है, इसका उल्लेख भी करना होगा।
ब्याज दर वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार
इसके साथ ही एडवांस का उद्देश्य, कुल स्वीकृत राशि, ब्याज दर, मूलधन की वसूली की अवधि, मासिक मूलधन वसूली की राशि, ब्याज वसूली की अवधि और मासिक ब्याज की किस्त का विवरण भी स्वीकृति आदेश में देना अनिवार्य होगा। स्वीकृति की वैधता की तारीख, बजट हेड और जिस ट्रेजरी से राशि आहरित की जानी है, उसका विवरण भी अनिवार्य किया गया है।
ब्याज दर वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार होगी। वित्त विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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