सनातन धर्म में अमावस्या और पूर्णिमा की तिथि बहुत विशेष और पावन मानी जाती है। ये दोनों ही तिथियां हर माह में पड़ती हैं। माह के कृष्ण पक्ष में अमावस्या पड़ती है और शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा। हर माह की अमावस्या का महत्व बहुत अधिक होता है। अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित की गई है। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान करने की पंरपरा है।
ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या (Jyeshtha Amavasya) कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान के साथ-साथ पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध भी किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। हालांकि, इस साल लोगों के मन में ज्येष्ठ अमावस्या (Jyeshtha Amavasya) की तारीख को लेकर ये कंफ्यूजन है कि ये 15 मई को मनाई जाएगी या 16 को। ऐसे में आइए जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या की सही तारीख। साथ ही जानते हैं स्नान-दान का समय।
ज्येष्ठ अमावस्या (Jyeshtha Amavasya) कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट शुरू होगी।
ये तिथि 16 व 17 मई की मध्यरात्रि 01 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी।








