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देश का पहला जुरासिक पार्क बनकर तैयार, इस शहर में मिलेगी डायनासोर की कुंडली

Writer D by Writer D
22/08/2022
in Main Slider, उत्तराखंड, राष्ट्रीय
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Jurassic Park

Jurassic Park

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हल्द्वानी। देश का पहला जुरासिक पार्क (Jurassic Park) वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में बन कर तैयार हो गया है। वहीं, वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर मदन सिंह बिष्ट का कहना है कि केंद्र में कोई भी आकर डायनासोर पार्क के बारे में जानकारी और अन्य वनस्पतियों के बारे में भी जान सकता है।

वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में डायनासोर पार्क बनाया गया है। बॉटनी वैज्ञानिकों की मदद से इस जुरासिक पार्क (Jurassic Park) की स्थापना की गई है, जिसमें डायनासोर की प्रजातियों और उनके खानपान के जानकारी दी जाएगी।

डायनासोर काल की वनस्पतियां अब वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी द्वारा बनाए गए जुरासिक पार्क में खिलखिला रही हैं। वहीं, इस वजह से बड़ी संख्या में यहां छात्र भी पहुंच रहे हैं और उनको यहां लगे बोर्ड के जरिये इनके बारे में पूरी जानकारी भी मिल रही है। असल में तो डायनासोर को इंसानों ने नहीं देखा लेकिन इस पार्क के जरिए लोगों को पता चल सकेगा कि आखिर डायनासोर क्या खाते थे?

 वन अनुसंधान केंद्र द्वारा लगाए गए बोर्ड के मुताबिक, डायनासोर में शाकाहारी व मांसाहारी दोनो प्रजाति मिलती थी. शाकाहारी प्रजाति के ब्राचियोसोरस 26 मीटर यानी 85 लंबे और 62 टन वजन के थे, जो कि जिंको बाइलोबा प्रजाति के वनस्पतियों को भोजन के तौर पर लेते थे. वहीं, शाकाहारी स्पिनोसारस प्रजाति का सिर्फ सिर छह फीट लंबा था. मांसाहारी डायनासोरों में यह सबसे विशालकाय थे. माना जाता है कि यह बड़ी मछलियों को भोजन के तौर पर खाते थे.

करीब 24 करोड़ 80 लाख साल पहले डायनासोर की उत्पत्ति हुई और 6.50 करोड़ साल पहले डायनासोर का पृथ्वी से खात्मा हो गया। डायनासोर का खात्मा कैसे हुआ, इसको लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से डायनासोर के कई कंकाल मिले, जिनसे वैज्ञानिकों उनकी मौजूदगी का पता चला। जुरासिक काल में वनों के अंदर किस तरह के वनस्पति होते थे और डायनासोर कौन सी वनस्पति खाते थे ? उसको लेकर हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र ने रिसर्च करते हुए भारत के पहले जुरासिक पार्क की स्थापना की है।

वन अनुसंधान केंद्र द्वारा लगाए गए बोर्ड के मुताबिक, डायनासोर में शाकाहारी व मांसाहारी दोनो प्रजाति मिलती थी। शाकाहारी प्रजाति के ब्राचियोसोरस 26 मीटर यानी 85 लंबे और 62 टन वजन के थे, जो कि जिंको बाइलोबा प्रजाति के वनस्पतियों को भोजन के तौर पर लेते थे। वहीं, शाकाहारी स्पिनोसारस प्रजाति का सिर्फ सिर छह फीट लंबा था। मांसाहारी डायनासोरों में यह सबसे विशालकाय थे। माना जाता है कि यह बड़ी मछलियों को भोजन के तौर पर खाते थे।

 डायनासोर काल की वनस्पतियां अब वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी द्वारा बनाए गए जुरासिक पार्क में खिलखिला रही हैं. वहीं, इस वजह से बड़ी संख्या में यहां छात्र भी पहुंच रहे हैं और उनको यहां लगे बोर्ड के जरिये इनके बारे में पूरी जानकारी भी मिल रही है. असल में तो डायनासोर को इंसानों ने नहीं देखा लेकिन इस पार्क के जरिए लोगों को पता चल सकेगा कि आखिर डायनासोर क्या खाते थे?

जुरासिक काल (Jurassic Park) की ऐसी ही सात तरह की वनस्पतियों को वन अनुसंधान केंद्र ने रिसर्च के बाद जुरासिक पार्क में संरक्षित किया है। इसमें लिवरवॉटस, मॉस, गिंको, फर्न, साइकस, पाइन और आॢकड की प्रजाति शामिल है। फर्न और गिंको शुरुआती जुरासिक काल के प्रमुख पौधे लगाए हैं।

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वहीं, हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर मदन सिंह बिष्ट का कहना है कि वन अनुसंधान केंद्र में कोई भी आकर डायनासोर पार्क के बारे में जानकारी और अन्य वनस्पतियों के बारे में भी जान सकता है। उनका कहना है कि 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए वन अनुसंधान केंद्र की ओर से 10 रुपये का और 18 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों के लिए 25 रुपये का चार्ज लगता है। वन अनुसंधान केंद्र में पूरा एजुकेशन का हब तैयार किया गया है, जिसका मकसद लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देना है।

Tags: haldwani newsJurassic ParkUttarakhand News
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