• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

जानें मौली बांधने का महत्व

Writer D by Writer D
04/04/2022
in धर्म, फैशन/शैली
0
मौली बांधने की प्रथा

मौली बांधने की प्रथा

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

हिंदू सनातन धर्म में हर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य, देवों की आराधना, और सभी शुभ कार्यों में कलावे (molly) का उपयोग किया जाता है। पूजा के बाद उसे हाथ की कलाई पर बांधा जाता है। हाथ पर लाल-पीले रंग का धागा यानि मौली बांधने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह परंपरी कब से शुरु हुई। हाथ में रक्षा सूत्र या मौली बांधने का धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी है।

मौली’ (molly) का शाब्दिक अर्थ होता है ‘सबसे ऊपर’ इसलिए मौली का तात्पर्य सिर से भी माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ के सिर पर चन्द्रमा विराजमान हैं, इसीलिए उन्हें चंद्रमौली भी कहते हैं। मौली को कच्चे धागे से बनाया जाता है। इसमें तीन रंगो का उपयोग किया जाता है।

लाल,पीला और हरा ये तीनों रंग बहुत ही शुभ माने गए हैं। इन तीन रंगो का मतलब त्रिदेव भी निकाला जाता है। कहते हैं कि कलावा बांधने से त्रिदेव, ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा दृष्टि बनी रहती है। लोग अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए भी मौली बांधते हैं। किसी काम की शुरुआत के संकल्प के लिए भी मौली बांधी जाती है

सेहत की दृष्टी से देखा जाए तो शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है। इसलिए कलाई में मौली या रक्षासूत्र बांधने से कई बीमारियों में लाभ मिलता है। रक्तचाप, दिल से जुड़ी बिमारियों, मधुमेह और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना अच्छा रहता है।

कब से शुरु हुई मौली बांधने की परंपरा

वेदों में भी बताया गया है कि जब इंद्र वृत्रासुर से युद्ध के लिए जा रहे थे, तब इंद्राणी ने उनकी रक्षा के लिए दाहिनी भुजा पर रक्षासूत्र बांधा था। जिसके बाद वृत्रासुर को मारकर इंद्र विजयी हो गए। कहते हैं कि तभी से यह परंपरा शुरु हुई। मान्यता है कि कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने से जीवन में आने वाले संकटो से आपकी रक्षा होती है।

Tags: AstrologyAstrology tipsimportance of kalawakalawaMollyraksha sutraकलावा बांधने के फायदेकलावा मंत्रधागामौली बांधने की प्रथा
Previous Post

माचिस फैक्ट्री में लगी भीषण आग, शहर का बड़ा हिस्सा तबाही से बचा

Next Post

पेट्रोल के दामों ने पकड़ी रफ्तार, डीजल में भी आई तेजी

Writer D

Writer D

Related Posts

Aloe Vera
फैशन/शैली

बालों की सभी समस्याओं का रामबाण इलाज है ये जादुई ऑयल

22/08/2026
Budh Dev
Main Slider

बुध गोचर से चमकेगा इन 6 राशियों का भाग्य, करियर से कारोबार तक मिलेगा फायदा

22/08/2026
Raksha Bandhan
Main Slider

रक्षाबंधन पर राखी में कितनी गांठ लगाएं? जानें 3 गांठ का धार्मिक महत्व

22/08/2026
Home decoration
फैशन/शैली

घर को देना चाहते हैं फेस्टिव लुक, इन 5 टिप्स की मदद से सजाए अपना आशियाना

22/08/2026
Green Tea
Main Slider

रक्षाबंधन पर भाई का मुंह मीठा करने के लिए बनाएं काजू हलवा

22/08/2026
Next Post
petrol

पेट्रोल के दामों ने पकड़ी रफ्तार, डीजल में भी आई तेजी

यह भी पढ़ें

CM Dhami

सीएम पुष्कर सिंह धामी में आपदा में सहयोग वाले कर्मियों को सम्मानित किया

04/10/2025
cm yogi

छठ पर्व कि तैयारियों को लेकर सीएम योग ने की बैठक, दिए ये निर्देश

29/10/2022
Multani Mitti

मुल्तानी मिट्टी में मिलाएं ये एक चीज, पाएं बेदाग चेहरा

09/02/2025
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version