लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के चलते जिले के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में नए टीचरों की तैनाती में धांधली की जा रही है। सरकार ने जो मानक तय किए थे, शिक्षकों की तैयारी उस हिसाब से नहीं की जा रही है। खेल यह किया जा रहा है कि जिन विद्यालयों में जरूरत नहीं है वहां भी शिक्षकों को तैनात किया जा रहा है। वहीं, कुछ ऐसे स्कूल हैं जहां टीचरों की सख्त जरूरत है, वहां किसी को तैनात नहीं किए गए हैं। काफी समय बाद जिले के परिषदीय विद्यालयों को 141 शिक्षक मिले थे। इनमें से 137 को विद्यालयों में तैनाती दे दी गई। बचे चार शिक्षकों के प्रमाणपत्र जमा किए गए मूल प्रमाणपत्र से मेल नहीं खा रहे थे।
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शासन की ओर से जारी नियम, मानक अनुसार छात्रों और शिक्षकों की संख्या के आधार पर तैनाती के लिए स्कूलों की सूची बनाई जाती है। इसमें पहले उन विद्यालय को रखा जाता है जहां एक भी शिक्षक नहीं है। इनमें तैनात शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की गिनती नहीं की जाती है। इसके बाद सूची में एकल विद्यालयों को रखा जाता है, जहां एक शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहे हों। फिर दो, तीन और इससे ज्यादा शिक्षकों वाले विद्यालयों की बारी आती है। विद्यालयों के शिक्षकों के अनुसार तैनाती में इसलिए गड़बड़ी की जाती है, ताकि बाद में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया में वसूली की जा सके। जहां पहले से ज्यादा शिक्षक हैं, उनमें गए नए शिक्षकों को बाद में समायोजन की प्रक्रिया में डाल दिया जाता है।








