देशभर में दीपावली का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म के इस सबसे बड़े त्योहार को लेकर सभी के मन का काफी उत्साह रहता है। 5 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) का विशेष महत्व है। गोवर्धन पूजा हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होती है।
गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) का पौराणिक महत्व
हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) का संबंध भगवान गोवर्धन यानी गिरिराज जी की पूजा का विधान है। इस दिन गोवर्धन पूजा के साथ में भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा देश में कुछ स्थानों पर अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गोवर्धन को 56 भोग लगाए जाते हैं। इसके अलावा मथुरा-वृंदावन में कई श्रद्धालु इस दौरान गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए भी पहुंचते हैं। पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा के त्योहार का बहुत बड़ा महत्व है। इन दिन भगवान श्री कृष्ण, गोवर्धन पर्वत के साथ-साथ गौ माता की भी पूजा की जानी चाहिए।
गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) का शुभ मुहूर्त
तिथि शुरू: 21 अक्टूबर, शाम 5:54 बजे
तिथि खत्म: 22 अक्टूबर, रात 8:16 बजे
पूजा के शुभ मुहूर्त (22 अक्टूबर 2025):
सुबह 6:26 बजे से 8:42 बजे तक
दोपहर 3:29 बजे से शाम 5:44 बजे तक
ऐसे करें गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। यदि आपके घर में पशुधन हैं तो गाय के गोबर से पशुधन यानी गाय, बछड़े आदि की भी आकृति बनाएं। इसके बाद पंचामृत के साथ इसकी पूजा करना चाहिए। भगवान कृष्ण की प्रतिमा को दूध से स्नान करने के बाद पूजन करें। अन्नकूट का भोग लगाएं।









