• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

स्मृतिशेष : भारत रत्न से अलंकृत लोकनेता प्रणव मुखर्जी की ख़ास बातें

Desk by Desk
31/08/2020
in Main Slider, ख़ास खबर, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय
0
प्रणब मुखर्जी का निधन

प्रणब मुखर्जी का निधन

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नयी दिल्ली। भारत रत्न से अलंकृत मूर्धन्य विद्वान पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का लंबी बीमारी के बाद सोमवार शाम को निधन हो गया।

पूर्व राष्ट्रपति के पुत्र एवं पूर्व सांसद अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। वह 84 वर्ष के थे। उनके परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं। उनकी पत्नी शुभा मुखर्जी का पहले ही निधन हो चुका है।

केन्द्र सरकार ने श्री मुखर्जी के सम्मान में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान कोई भी सरकारी समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा और राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा।

तो ऐसा रहा प्रणब मुखर्जी का क्लर्क से राष्ट्रपति बनाने तक का सफर

पूर्व राष्ट्रपति 21 दिनों से सेना के रिसर्च एंड रेफेरल अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें 10 अगस्त को मस्तिष्क में खून के थक्के जमने की जांच के दौरान कोरोना संक्रमित पाया गया था। खून के थक्कों को हटाने के लिए उनकी आपातकालीन जीवनरक्षक सर्जरी की गई थी। सर्जरी के बावजूद उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और उन्हें गहरी नीमबेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर रखा गया था।

श्री मुखर्जी के निधन का समाचार मिलते ही देश में शोक की लहर दौड़ गयी। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत विभिन्न राजनेताओं ने श्री मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए देश के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।

यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रजा कोरोना पॉजिटिव, खुद ट्वीट कर दी जानकारी

श्री मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले के किरनाहर के निकट मिराती गांव के श्री कामदा किंकर मुखर्जी और श्रीमती राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहां एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता 1920 से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय होने के साथ पश्चिम बंगाल विधान परिषद में 1952 से 1964 तक सदस्य और वीरभूमि जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके थे। उनके पिता एक सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन की खिलाफत के परिणामस्वरूप 10 वर्षों से अधिक जेल की सजा भी काटी थी।

श्री मुखर्जी ने वीरभूमि के सूरी विद्यासागर कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर और कानून की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने डी लिट की मानद उपाधि भी हासिल की। उन्होंने पहले एक कॉलेज प्राध्यापक के रूप में और बाद में एक पत्रकार के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। वह बांग्ला प्रकाशन संस्थान देशेर डाक (मातृभूमि की पुकार) में भी काम कर चुके हैं। प्रणव मुखर्जी बंगीय साहित्य परिषद के ट्रस्टी एवं अखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे।

अखिलेश का भाजपा पर हमला, कहा – दम्भ त्यागकर नौजवानों की मांग सुने, ये जनतंत्र है, मनतंत्र नहीं

श्री मुखर्जी का संसदीय कैरियर करीब पांच दशक तक चला, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वह 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उपमंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल हुए।

श्री मुखर्जी 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। वर्ष 1984 में यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उनका विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया। उनका कार्यकाल भारत के अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ऋण की 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की आखिरी किस्त नहीं अदा कर पाने के लिए उल्लेखनीय रहा।

वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे। उन्हें इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। कुछ समय के लिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया। उस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया, लेकिन 1989 में राजीव गांधी के साथ समझौता होने के बाद उन्होंने अपने दल का कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया। उनका राजनीतिक कैरियर उस समय पुनर्जीवित हो उठा, जब पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने पहले उन्हें योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में और बाद में एक केन्द्रीय मंत्री के तौर पर नियुक्त करने का फैसला किया। उन्होंने श्री राव के मंत्रिमंडल में 1995 से 1996 तक पहली बार विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया।

वर्ष 1985 के बाद से वह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल राज्य इकाई के भी अध्यक्ष रहे। वर्ष 2004 में, जब कांग्रेस ने गठबन्धन सरकार के अगुआ के रूप में सरकार बनायी, तो कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सिर्फ एक राज्यसभा सांसद थे। इसलिए जंगीपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले प्रणव मुखर्जी को लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया। उन्हें रक्षा, वित्त, विदेश मंत्रालय, राजस्व, नौवहन, परिवहन, संचार, आर्थिक मामले, वाणिज्य और उद्योग, समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री होने का गौरव भी हासिल हुआ।

वह कांग्रेस संसदीय दल और कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं, जिसमें देश के सभी कांग्रेस सांसद और विधायक शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त वे लोकसभा में सदन के नेता, बंगाल प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद में केन्द्रीय वित्त मंत्री भी रहे।

लोकसभा चुनावों से पहले जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी बाई-पास सर्जरी कराई, प्रणव दा विदेश मंत्रालय में केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति के अध्यक्ष और वित्त मंत्रालय में केन्द्रीय मंत्री का अतिरिक्त प्रभार लेकर मंत्रिमंडल के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में करीब पांच दशक के लंबे राजनीतिक करियर के बाद वह भारत के तेरहवें राष्ट्रपति रहे।

वर्ष 2012 में तत्कालीन केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री मुखर्जी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया था। सीधे मुकाबले में उन्होंने अपने प्रतिपक्षी प्रत्याशी पी.ए. संगमा को हराया था। उन्होंने 25 जुलाई 2012 को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। पांच साल इस पद पर रहने के बाद वह 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे।

प्रणब मुखर्जी ने किताब ‘द कोलिएशन ईयर्स: 1996-2012’ नामक एक किताब भी लिखी है। सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 26 जनवरी 2019 को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

Tags: 24ghante online.comDeath of Pranab MukherjeeNational newspolitical journey of Pranab Mukherjeepolitical newsSome things related to Pranab Mukherjeespecial things related to the life of Pranab Mukherjeetribute to Pranab Mukherjeeप्रणब मुखर्जी का निधनप्रणब मुखर्जी का राजनीतिक सफरप्रणब मुखर्जी के जीवन से जुड़ी खास बातेंप्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलिप्रणब मुखर्जी से जुड़ी कुछ बातें
Previous Post

एक करोड़ के जेवरात लूट का खुलासा, 11 शातिर गिरफ्तार

Next Post

राम मंदिर निर्माण पूरा होने से पूर्व इन सात प्रमुख स्थलों पर लगेगी आदमकद मूर्तियां

Desk

Desk

Related Posts

Dark Neck
फैशन/शैली

काली गर्दन दूसरों के आगे करती है शर्मिंदा, तो ऐसे पाएं छुटकारा

30/05/2026
Nausena Shaurya Vatika
उत्तर प्रदेश

नौसेना शौर्य वाटिका का लोकार्पण 30 मई को, मुख्यमंत्री योगी व रक्षा मंत्री करेंगे लोकार्पण

29/05/2026
CM Yogi honored the beneficiaries of various schemes.
उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित

29/05/2026
CM Dhami and Nitin Nabin performed Ganga Aarti
राजनीति

ऋषिकेश में गंगा तट पर आध्यात्म और संस्कृति का संगम, सीएम धामी व नितिन नबीन ने की गंगा आरती

29/05/2026
Electricity
उत्तर प्रदेश

भीषण गर्मी व खराब मौसम में भी निर्बाध आपूर्ति में जुटा बिजली विभाग

29/05/2026
Next Post
राम मंदिर निर्माण

राम मंदिर निर्माण पूरा होने से पूर्व इन सात प्रमुख स्थलों पर लगेगी आदमकद मूर्तियां

यह भी पढ़ें

Former Union Minister's wife murdered

पूर्व केंद्रीय मंत्री की पत्नी की घर में घुसकर हत्या, एक संदिग्‍ध हिरासत में

07/07/2021

जानें किसने रखा था सबसे पहले हरियाली तीज का व्रत

20/07/2020
mole

जिन महिलाओं के यहां होता है तिल, पति के लिए बेहद भाग्यशाली मानी जाती

30/07/2025
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version