हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। हर किसी को होली के पर्व का इंतजार रहता है। इस अवसर पर पूरे देश में रंग बिखरे नजर आते हैं, लेकिन ब्रज क्षेत्र में होली की विशेष रौनक देखने को मिलती है। इस पर्व की शुरुआत मथुरा और वृंदावन में वंसत पंचमी के साथ ही हो जाती है। होली से पहले बरसाना और नंदगांव में लड्डू मार (Laddu Mar Holi) और लठमार होली खेली जाती है।
लड्डू मार होली (Laddu Mar Holi) के दौरान भक्तों पर लड्डुओं की वर्षा की जाती है, लेकिन क्या आपका पता है कि आखिर कैसे हुई लड्डू मार होली की शुरुआत हुई। अगर नहीं पता है, तो आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
बरसाना में कब है लड्डू मार होली (Laddu Mar Holi)?
इस बार बरसाना के श्रीराधा रानी के मंदिर में 25 फरवरी को लड्डू मार होली का पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 26 फरवरी को लठ्मार होली खेली जाएगी। इस दिन ब्रज की रौनक बेहद खास होती है।
इस तरह शुरू हुई लड्डू मार होली (Laddu Mar Holi)
पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में श्रीराधा रानी के पिता वृषभानु जी ने कृष्ण जी के गांव नंदगांव में होली खेलने का निमंत्रण भेजा। भगवान श्रीकृष्ण ने उनके निमंत्रण स्वीकार कर लिया। इसके बाद भगवान ने एक पंडा को बरसाना भेजा। जब गोपियों को इस बात का पता चला कि भगवान श्रीकृष्ण बरसाने में होली खेलने आ रहें हैं, तो गोपियां आनंद से झूम उठीं।
खुशी के इस मौके पर राधा जी की सखियों ने पंडा जी पर गुलाल डाला। इतना ही नहीं जब राधा जी के पिता जी ने पंडा को लड्डू खाने के लिए दिए तो आनंद में गोपियों ने पंडा जी पर लड्डू फेंकना शुरू कर दिया। पंडा ने भी गोपियों पर लड्डू फेकें। मान्यता है कि तभी से ही लड्डू मार होली की शुरुआत ब्रज में हो गई।









