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सस्ती कार भी क्यों पड़ जाती है महंगी? एक्सेसरीज़ खोलती हैं पूरा राज़!

Desk by Desk
12/12/2025
in Tech/Gadgets
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क्यों 7 लाख की गाड़ी आपको 10 लाख में मिलती है, एक्सेसरीज का है सारा खेल
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क्या आपने ये कभी गौर किया है कि शोरूम में 7 लाख की दिखने वाली कार (Car) घर आते-आते 10 लाख की कैसे हो जाती है? असल खेल एक्सेसरीज़ का है. चमकदार अलॉय व्हील्स, रिवर्स कैमरा, पार्किंग सेंसर, इंटीरियर किट से लेकर क्रोम गार्निश तक. कार जितनी प्रीमियम दिखती है, उतनी ही जेब ढीली कर देती है. दिल कहता है वाह!, लेकिन बिल देखकर दिमाग कहता है क्या इतना सब? यही एक्स्ट्रा चीजें आपकी कार (Car) की कीमत में 2-3 लाख रुपये तक जोड़ देती हैं. आइए आपको वो असली मैजिक ट्रिक के बारे में बतातें है जिससे कार की कीमत कब 7 लाख रुपए से 10 लाख रुपए तक चली जाती है.

एक्सेसरीज पैक: असली वजह कीमत बढ़ने की

कई बार ग्राहक सोचता है कि कार (Car) की एक्स-शोरुम कीमत ही अंतिम कीमत होगी, लेकिन डीलरशिप पर पहुंचने पर उसे बताया जाता है कि ये बेस वेरिएंट है, इसमें कुछ नहीं मिलता, आपको ये एक्सेसरी पैक लेना ही होगा. लेकिन इन एक्सेसरी पैक की कीमत में अंतर 20 हजार रुपए से लेकर 1.50 लाख रुपए तक पहुंच जाती है. कई हाई- डिमांड मॉडल में तो ये लागत 2 से 3 लाख रुपए तक बढ़ जाती है.

फीचर्स का चमकदार जाल!

कौन-सी एक्सेसरीज बढ़ाती हैं कीमत?

1. अलॉय व्हील्स (₹25,000₹60,000)

कई कारों (Car) के बेस वेरिएंट में स्टील व्हील मिलते हैं. डीलर अलॉय व्हील्स को जरूरी अपग्रेड बताकर पैक में शामिल कर देते हैं. ग्राहक को मजबूरन ये लेना पड़ता है क्योंकि इससे कार दिखने में प्रीमियम लगती है.

2. रिवर्स कैमरा और सेंसर (₹8,000₹25,000)

डीलर अक्सर कहते हैं- सर, ये सुरक्षा के लिए जरूरी है, सब लेते हैं. जबकि ये आपको आफ्टर मार्केट में आधी कीमत पर मिल सकता है.

3. टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम (₹15,000₹45,000)

बेस वेरिएंट में कई बार साधारण म्यूजिक सिस्टम मिलता है. डीलर बड़ा स्क्रीन लगाने का दबाव बनाते हैं, जिससे बिल तुरंत बढ़ जाता है. 7 लाख की कार में 3 लाख की एक्सेसरीज़—गणित समझिए

4. क्रोम पैक (₹5,000₹12,000)

डोर हैंडल, विंडो लाइन या ग्रिल पर क्रोम स्ट्रिप्स जोड़कर दिखाया जाता है कि कार लक्जरी हो गई है.

5. सीट कवर और फ्लोर मैट (₹4,000₹20,000)

सीट कवर विशेष रूप से महंगे बेचे जाते हैं, जबकि बाहर ये आधी कीमत में उपलब्ध होते हैं.

6. बॉडी किट (₹12,000₹40,000)

स्पॉइलर, स्कफ प्लेट, साइड बॉडी मोल्डिंग— डिजाइन के नाम पर पैसे जोड़ दिए जाते हैं.

देखिए कैसे 7 लाख की कार (Car) बन जाती है 10 लाख की

आप मान लीजिए किसी कार (Car) की एक्स-शोरूम कीमत 7,00,000 रुपए है. वहीं डीलर द्वारा पेश किया गया मस्ट हैव एक्सेसरी पैक कुछ ऐसा हो सकता है—

अलॉय व्हील ₹40,000
रिवर्स कैमरा + सेंसर ₹15,000
टचस्क्रीन सिस्टम ₹35,000
सीट कवर ₹8,000
फ्लोर मैट ₹2,000
बॉडी किट ₹20,000
क्रोम पैक ₹8,000
दूसरे छोटे ऐड-ऑन ₹10,000
कुल: ₹1,38,000

कार (Car) खरीदने जा रहे हैं? पहले जानिए ये एक्स्ट्रा खर्च!

इसके साथ डीलर एक प्रीमियम पैक सुझाता है, जिसमें और ऐड-ऑन जोड़कर कीमत 23 लाख तक पहुंचा देता है. इसका परिणाम ये निकलर आता है कि ₹7 लाख की कार की ऑन-रोड कीमत आसानी से ₹9.5010 लाख तक बढ़ जाती है.
10 लाख से कम में बिकने वाली कारों का गणित

ये ट्रेंड खासतौर पर इन कारों में आम देखा जाता है;

मारुति स्विफ्ट
मारुति बलेनो
हुंडई i20
टाटा पंच
रेनो काइगर
निसान मैग्नाइट

लो-बजट कार, हाई-बजट एक्सपेन्स, कैसे बढ़ जाती है कुल कीमत?

बेस वेरिएंट सस्ता लगता है, लेकिन ज़रूरी एक्सेसरीज जोड़ते-जोड़ते कीमत काफी बढ़ जाती है.
तो क्या करें?

आप मन चाही एक्सेसरी बाहर से 30, 40% कम दाम में लगवा सकते हैं.
डीलरशिप से केवल जरूरी सुरक्षा फीचर्स ही लें.
कार खरीदते समय एक्स-शोरूम और ऑन-रोड कीमत का स्पष्ट अंतर पहले ही पूछ लें.

7 लाख की कार 10 लाख में इसलिए मिलती है क्योंकि एक्सेसरीज़ का खेल सबसे बड़ा होता है. कंपनियां बेस वेरिएंट को आकर्षक कीमत पर लॉन्च करती हैं, लेकिन वास्तविक कीमत डीलर एक्सेसरी पैक्स के जरिए बढ़ा देते हैं.

Tags: car
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