• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

दिल्ली हाई कोर्ट में दिवाला कानून में संशोधन करने वाले अध्यादेश पर मांगा जवाब

Desk by Desk
28/07/2020
in Categorized
0
delhi highcourt

दिल्ली हाई कोर्ट

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नई दिल्ली| दिल्ली हाई कोर्ट में दायर दिवाला कानून में संशोधन करने वाले अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा है। इस अध्यादेश के जरिये 25 मार्च 2020 को अथवा इसके बाद सामने आने वाले डिफाल्ट मामलों में आईबीसी के तहत कार्रवाई को छह माह के लिये निलंबित किया गया है। कोरोना वायरस महामारी को देखते हुये सरकार ने यह कदम उठाया।

वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक धोखाधड़ी के 84,545 मामले आए सामने

मुख्य न्यायधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने याचिका को लेकर विधि मंत्रालय और भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन क्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) से 31 अगस्त तक जवाब देने को कहा है। याचिका में आईबीसी कानून में अध्यादेश के जरिये किए गए संशोधन को हटाने की मांग की गई है।  केन्द्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता अमित महाजन ने मंत्रालय की तरफ से पेश होते हुए याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। महाजन ने कहा कि याचिकाकर्ता, राजीव सूरी, यह बताने में असफल रहे हैं कि इस जनहित याचिका को दायर करने से उनका क्या लेना देना है।

अध्यादेश में क्या है

आईबीसी संशोधन अध्यादेश में कहा गया है कि 25 मार्च और उसके बाद से बैंक कर्ज का नियमित किस्त के अनुरूप भुगतान करने में असफल रहने पर कर्जदार के खिलाफ दिवाला एवं रिणशोधन कानून के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी। कार्रवाई से यह छूट छह महीने के लिए जिसे एक साल तक भी बढ़ाया जा सकता है, दी गई है। सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिये 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन लागू किया था।

आईबीसी कानून में यह व्यवस्था की गई है कि कोई भी बैंक कर्ज नहीं चुकाने वाली कंपनी के खिलाफ दिवाला कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर सकता है। कर्ज किस्त के भुगतान में तय समय से यदि एक दिन की भी देरी होती है तो आईबीसी के तहत दिवाला कार्रवाई का प्रावधान इसमें किया गया है। हालांकि, इसमें न्यूनतम राशि एक करोड़ रुपये तय की गई है जो पहले एक लाख रुपये रखी गई थी। सरकार ने कोरोना वायरस के मौजूदा दौर में कर्जदारों को राहत पहुंचाने के लिये कानून में संशोधन किया है।

बता दें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) के लिए एक विशेष दिवालाशोधन समाधान रूपरेखा तैयारी के अंतिम चरण में है। भारतीय दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता (आईबीबीआई) के प्रमुख एमएस साहू ने पिछले दिनों जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि इसके अलावा एक पहले से तैयार समाधान रूपरेखा पर भी काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि दिवालाशोधन कानून उभरती जरूरतों को नवोन्मेषी तरीके से पूरा करने के लिए विकसित हो रहा है। सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के कुछ प्रावधानों को निलंबित कर दिया है। आईबीसी के तहत नए मामलों को दर्ज करने का काम फिलहाल निलंबित है। यह निलंबन एक साल तक के लिए बढ़ाया भी जा सकता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज फ्यूचर ग्रुप के रिटेल बिजनेस को खरीदने के है करीब

यह पूछे जाने पर कि कोविड-19 के बाद चीजों के सामान्य होने के बाद अंतत: क्या प्रभाव रह सकता है, साहू ने कहा कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है और ध्यान तेजी से प्रतिक्रिया पर दिया जा रहा है। उन्होंने पीटीआई-भाषा को ईमेल के जरिये दिये एक साक्षात्कार में बताया, “आईबीसी अर्थव्यवस्था की उभरती जरूरतों को पूरा करने के नवोन्मेषी तरीकों की पेशकश करने के लिए विकसित हो रहा है। संहिता की धारा 240ए के तहत एमएसएमई के लिए एक विशेष दिवाला समाधान ढांचा तैयारी के अंतिम चरण में है। एक पहले से तैयार दिवाला समाधान रूपरेखा के ढांचे पर भी काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक व्यापार विफलताओं की बेहतर स्वीकार्यता होगी और इसके फलस्वरूप उद्यमिता पनपेगी। आईबीसी और मजबूत होकर उभरेगा। सरकार ने मई में आईबीसी के तहत विभिन्न छूटों की घोषणा की, जिसमें कोविड-19 से संबंधित ऋण की छूट और एमएसएमई के लिए एक विशेष रूपरेखा शामिल है।  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने महामारी और उसके बाद लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोत्साहन पैकेज के हिस्से के रूप में इन छूटों की घोषणा की थी।

Tags: "Bankruptcy ActBankruptcy Law Amendment OrdinanceDelhi high courtModi governmentNirmala Sitharamanदिल्ली हाई कोर्टदिवाला कानूनदिवाला कानून संशोधन अध्यादेशनिर्मला सीतारमणमोदी सरकार
Previous Post

रिलायंस इंडस्ट्रीज फ्यूचर ग्रुप के रिटेल बिजनेस को खरीदने के है करीब

Next Post

वाराणसी में 37 नए कोरोना पॉजिटिव ,संक्रमितों की संख्या 2268 पार

Desk

Desk

Related Posts

forehead
Categorized

माथे के कालेपन को ये नुस्खे कर देंगे गायब

28/06/2026
Vishnu Paudel
Categorized

नेपाल के पूर्व वित्त मंत्री विष्णु पौडेल अदालत में पेश, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बढ़ सकती है रिमांड

23/06/2026
CM Yogi
Categorized

दिल्ली अग्निकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया गहरा शोक

03/06/2026
Sawan
Categorized

कब शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना? जानिए सावन सोमवार और पूजा का महत्व

02/06/2026
Peanut
Categorized

मूंगफली से बनाएं ये टेस्टी डिश, कभी भी उठाए इसका लुत्फ

21/05/2026
Next Post
वाराणसी में 37 नए कोरोना पॉजिटिव

वाराणसी में 37 नए कोरोना पॉजिटिव ,संक्रमितों की संख्या 2268 पार

यह भी पढ़ें

IKEA Launches New Shopping App in India, Now Gains From Home

IKEA ने भारत में लॉन्च किया नया शॉपिंग ऐप, अब घर बैठे उठाय लाभ

27/05/2021
arrested

दो शातिर अन्तरराज्यीय वाहन चोर गिरफ्तार

26/06/2022
Dead Body

पेड़ से लटकता मिला युवक का शव, हत्या की आशंका

27/07/2022
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version