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किसानों की ट्रैक्टर रैली को दिल्ली पुलिस ने शर्तों के साथ दी मंजूरी

नई दिल्ली। ट्रैक्टर रैली पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ने कहा कि आज किसानों से अच्छा संवाद रहा है । दिल्ली के तीन जगहों से ट्रैक्टर रैली की इजाजत है। इन तीनों बॉर्डर पर बैरिकेड हटाए जाएंगे। कुछ शर्तों के साथ ये इजाजत दी गई है। इस रैली में गड़बड़ी को लेकर भी इनपुट मिले हैं। कुछ पाकिस्तान के ट्विटर हैंडल पर हमारी नजरें हैं।

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दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ने कहा कि किसानों के साथ सभी बिंदुओं पर बात हुई है। पूरे सम्मान के साथ ट्रैक्टर रैली की हमारी कोशिश है। ट्रैक्टर रैली में गड़बड़ी को लेकर पाकिस्तान से ट्विटर हैंडल चलाए जा रहे हैं। ऐसे 308 ट्विटर हैंडल की जानकारी मिली है।

सभी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के साथ-साथ सीएपीएफ व गणतंत्र दिवस परेड की सुरक्षा के लिए तैनात अन्य बलों को किसान ट्रैक्टर रैली को लेकर अलर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (खुफिया) दीपेंद्र पाठक ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दिल्ली पुलिस ने किसान संगठनों से पांच से छह बार लंबे संवाद के बाद किसानों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए गणतंत्र दिवस समारोह के बाद ट्रैक्टर रैली की अनुमति दे दी है। ट्रैक्टर रैली सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से दिल्ली के अंदर कुछ किलोमीटर तक अंदर आएगी। करीब एक सौ किलोमीटर दूरी तक ट्रैक्टर रैली दिल्ली के अंदर रहेगी। सिंघु बार्डर से ट्रैक्टर परेड चलेगी जो संजय गांधी ट्रांसपोर्ट, कंझावला, बवाना, औचन्दी बॉर्डर होते हुए हरियाणा में चली जाएगी। टिकरी बार्डर से ट्रैक्टर परेड नागलोई, नजफगढ, झरोदा, ढांसा, बादली होते हुए केएमपी पर चली जाएगी। गाजीपुर यूपी गेट से ट्रैक्टर परेड अप्सरा बार्डर गाजियाबाद होते हापुड़ रोड पर परेड पर होगी।

श्री पाठक ने कहा कि किसानों की ट्रैक्टर रैली में बाधा उत्पन्न करने के लिए पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान से 308 ट्विटर हैंडल से तरह तरह के संशय पैदा करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों की इस रैली में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न ना हो इसके लिए भी पुलिस का पूरा बंदोबस्त किया जाएगा। रैली के मार्ग में आपात चिकित्सा मुहैय्या कराने के साथ पूरी तरह शांति और सौहार्द्र के साथ इसे पूरा किया जाएगा। हर जगह एक पेशेवर तरीके से काम करने के लिये किसानों के साथ बातचीत के बाद अंतिम निर्णय लिया गया है।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में निर्णय लिया गया कि नियम काननू को ध्यान में रखकर रैली को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने पर सहमति हुई है। किसान संगठन पिछले दो माह से कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने कि मांग को लेकर राजधानी की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के साथ किसान संगठनों की ग्यारह दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका है।

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