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राजकोषीय घाटा में जून अंत तक बजट पहुंचा अनुमान के 83.2 प्रतिशत पर

Desk by Desk
01/08/2020
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चालू वित्त वर्ष

चालू वित्त वर्ष

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नई दिल्ली| देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही बजट अनुमान के 83.2 प्रतिशत यानी 6.62 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण कोरोना वायरस महामारी तथा लॉकडाउन के कारण कर-संग्रह में कमी आना है।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान पहली तिमाही के अंत में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 61.4 प्रतिशत पर था। फरवरी में पेश 2020-21 के आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 7.96 लाख करोड़ रुपए यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत रखा था।

गोल्ड बॉन्ड में निवेशकों को मिल रहा जबदरस्त फायदे का सौदा

हालांकि, इन आंकड़ों को कोविड-19 संकट से उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों के मद्देनजर संशोधित किया जा सकता है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत में राजकोषीय घाटा 6,62,363 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गया था, जो सात साल का उच्च स्तर था। यह मुख्य रूप से राजस्व संग्रह में कमी के कारण था। सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, सरकार की राजस्व प्राप्ति 150008 करोड़ रुपए यानी बजट अनुमानों का 7.4 प्रतिशत रही।

पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 14.5 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों के दौरान कर से प्राप्त राजस्व 134822 करोड़ रुपए यानी बजट अनुमान का 8.2 प्रतिशत रहा। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान कर राजस्व अनुमान 15.2 प्रतिशत था। सरकार की कुल प्राप्तियां बजट अनुमान का 6.8 प्रतिशत यानी 153581 करोड़ रुपए है।

केंद्र सरकार की जीएसटी की भरपाई की बाध्यता उधार लेने का दबाव

बजट में, सरकार ने कुल प्राप्तियों का अनुमान 22.45 लाख करोड़ रुपए लगाया था। जून के अंत तक सरकार का कुल खर्च 8,15,944 लाख करोड़ रुपए यानी बजट अनुमान का 26.8 प्रतिशत रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान कुल खर्च 25.9 प्रतिशत था। आंकड़ों से पता चला है कि 134043 करोड़ रुपए राज्य सरकारों को जून तक केंद्र सरकार द्वारा करों के हिस्से के रूप में हस्तांतरित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14588 करोड़ रुपए कम है।

Tags: corona lockdowncurrent fiscal yearfinance ministerfiscal deficitNirmala Sitharamanकोरोना लॉकडाउनचालू वित्त वर्षनिर्मला सीतारमणराजकोषीय घाटावित्त मंत्री
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